03/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/17/2026 05:49
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आईसीएआर-केन्द्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा2022 में प्रकाशित वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लगभग91.1 प्रतिशत समुद्री मत्स्य भंडार स्वस्थ स्थिति में हैं। यद्यपि अध्ययनों में जलवायु और पर्यावरणीय कारकों के कारण वर्ष-दर-वर्ष उतार-चढ़ाव का संकेत मिलता है, फिर भी पिछले पाँच वर्षों में समुद्री मत्स्य उत्पादन स्थिर बना हुआ है। यह उत्पादन2020-21 में34.76 लाख टन से बढ़कर2024-25 में46.15 लाख टन हो गया है, और तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा ओडीशा सहित भारत के तटीय राज्यों में समुद्री मत्स्य भंडार में गिरावट का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
निरंतर मत्स्य प्रबंधन सुनिश्चित करने और समुद्री संसाधनों के क्षरण को रोकने के लिए, सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों और संबंधित पर्यावरणीय एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करता है। प्रमुख पहलों में भारत के तटीय जल क्षेत्रों में कृत्रिम चट्टानों की स्थापना, समुद्री संवर्धन कार्यक्रम, समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देना, प्रमुख प्रजनन अवधि के दौरान61 दिनों के समान मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू करना, तथा समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए ट्रॉल जालों में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) की स्थापना शामिल है। इसके अतिरिक्त, राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को किशोर मछलियों के शिकार को रोकने के उपाय लागू करने के लिए परामर्श जारी किए जाते हैं, जैसे जाल के आकार के नियम और उनके संबंधित समुद्री मत्स्य विनियमन कानूनों (एमएफआरए) के अंतर्गत पकड़ के लिए न्यूनतम कानूनी आकार निर्धारित करना, ताकि स्थायी और जिम्मेदार मत्स्य पालन कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार ने हानिकारक मछली पकड़ने की कार्य प्रणालियों, जैसे पेयर या बुल ट्रॉलिंग, तथा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) के भीतर मछली पकड़ने के लिए एलईडी या कृत्रिम रोशनी के उपयोग पर रोक लगा दी है। इसके अतिरिक्त, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण देश के तटीय मछली पकड़ने वाले गाँवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है, ताकि मछुआरों को जिम्मेदार मत्स्य पालन के लिए एफएओ जिम्मेदार मत्स्य पालन के लिए आचार संहिता (सीसीआरएफ) के बारे में शिक्षित किया जा सके और अवैध, अपंजीकृत तथा अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र, महाद्वीपीय शेल्फ, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) और अन्य समुद्री क्षेत्र कानून, 1976 के तहत 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) में मत्स्य पालन का सतत दोहन नियम, 2025' अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य समुद्री इकोसिस्टम के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देना और साथ ही ईईजैड में अनछुए मत्स्य संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
(ग) और (घ) मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग द्वारा पिछले पाँच वर्षों (2020-21 से2024-25) तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष (2025-26) के दौरान प्रमुख योजना प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना को सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है, जिसमें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडीशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। यह योजना समावेशी विकास पर केन्द्रित है, जिसमें लघु स्तर के मछुआरों को मत्स्य विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए अधिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस अवधि के दौरान, मत्स्य विभाग ने 21,274.13 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मत्स्य विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिसमें 9,189.74 करोड़ रुपये का केन्द्रीय अंश शामिल है। इस योजना के अंतर्गत मछली भंडारण और परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए निम्नलिखित प्रमुख हस्तक्षेप और मूल्य श्रृंखला परियोजनाएँ/गतिविधियाँ हाथ में ली गई हैं; 59 मछली पकड़ने के बंदरगाह/मछली उतराने के केन्द्र, 734 आइस प्लांट/कोल्ड स्टोरेज, 21 आधुनिक थोक मछली बाजार, जिनमें2 स्मार्ट थोक मछली बाजार शामिल, 202 खुदरा मछली बाजार, 6,410 मछली कियोस्क, 27,301 मछली परिवहन इकाइयाँ, जैसे: 10,924 आइस बॉक्स के साथ मोटरसाइकिल, 9,412 आइस बॉक्स के साथ साइकिल, 3,915 ऑटो रिक्शा, 1,265 जीवित मछली विक्रय इकाइयाँ, 1,406 इंसुलेटेड ट्रक, 379 रेफ्रिजेरेटेड ट्रक। इसके अतिरिक्त, इस योजना के अंतर्गत अन्य प्रमुख हस्तक्षेपों में पारंपरिक मछुआरों के लिए नौकाएँ (प्रतिस्थापन) और जाल, बायो-टॉयलेट, संचार और/या ट्रैकिंग उपकरण (जैसे वीएचएफ/ट्रांसपोंडर) पारंपरिक और मोटर चालित नौकाओं के लिए, मछुआरों के लिए सुरक्षा किट का वितरण, तथा मछली पकड़ने पर प्रतिबंध/कम काम की अवधि के दौरान पारंपरिक मछुआरों के लिए आजीविका और पोषण सहायता आदि शामिल हैं।
यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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