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Amar Ujala Ltd

10/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/20/2026 07:16

महज 100 शब्दों का प्रॉम्प्ट और कुछ हज़ार डॉलर: AI से चीनी हैकर ने कैसे हैक कीं दर्जनों वेबसाइट्स

100 शब्दों का प्रॉम्प्ट और कुछ हजार डॉलर: AI ने दर्जनों वेबसाइट कर दीं हैक, कैसे चीनी हैकर ने मचाई तबाही?

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली कुलदीप शर्मा

Tue, 20 Oct 2026 05:49 PM IST

सार

टेक्नोलॉजी

एक चीनी भाषी हैकर ने महज़ 5000 डॉलर के एआई टोकन और बहुत ही कम शब्दों के निर्देशों की मदद से एआई एजेंट्स के ज़रिए दुनिया भर की 100 से अधिक बड़ी कंपनियों को हैक कर लिया। आखिर ये हुआ कैसे आइए जानते हैं.

एआई ने कई कंपनियों में लगाई सेंध - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रॉयटर्स पर पब्लिश के खबर के अनुसार एक चीनी भाषी हैकर ने खुद बिना कोई खास कोडिंग किए केवल एआई एजेंट्स के बल पर 100 से अधिक कंपनियों की सुरक्षा में सेंध लगा दी। इस हमले का शिकार कृषि उपकरण निर्माता कंपनी 'डियर'होम एप्लायंसेज बनाने वाली 'शार्कनिंजा' और इंजन निर्माता 'कमिंस' जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियां बनी हैं। साइबर सुरक्षा कंपनी नॉरफ़ोर्ज के शोधकर्ता स्नोर फेगरलैंड की रिपोर्ट ने एआई के खतरनाक इस्तेमाल का बड़ा खुलासा किया है।

क्या मामूली निर्देशों से संभव हैं सैकड़ों हैकिंग हमले?

हैकर्स ने इस पूरे हमले को खुद अंजाम देने के बजाय एआई एजेंट्स को सौंप दिया। चीनी भाषा में दिए गए महज 100 से भी कम शब्दों के संक्षिप्त निर्देशों के आधार पर एआई सेना को अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया की ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर हमले के लिए छोड़ दिया गया। इन एजेंट्स ने लगभग 1200 वेबसाइट्स पर सेंधमारी की कोशिश की। करीब 23 घंटे की लगातार कोशिशों के बाद एजेंट्स ने कंपनियों के सर्वर में सुरक्षा कमियां ढूंढकर हैकिंग को सफलता से अंजाम दिया।

कितना सस्ता और आसान हो गया है एआई से हैक करना?

इस बड़े साइबर हमले को अंजाम देने के लिए हैकर ने चीनी एआई मॉडल 'डीपसीक' और एंथ्रोपिक के 'क्लॉड कोड' का इस्तेमाल किया। पूरे अभियान में लगभग 5000 डॉलर मूल्य के टोकन खर्च हुए, जिसका मतलब है कि हर एक सफल हैक केवल 50 डॉलर का खर्च आया। इतने कम बजट में बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के 100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भेदना यह साबित करता है कि साइबर अपराध अब बेहद सरल और सस्ता हो चुका है।

कैसे बना 'Cairn' एआई प्लेटफॉर्म हैकर्स का हथियार?

शोधकर्ता स्नोर फेगरलैंड को इस हैकिंग का पता तब चला जब वे इंटरनेट पर 'कैरन' (Cairn) नामक ओपन-सोर्स एआई प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफॉर्म की जांच कर रहे थे। हैकर्स के बीच पॉप्यूलर इस टूल के असुरक्षित इंस्टेंस के जरिए फेगरलैंड हैकर्स की गतिविधियों को देख सके। हालांकि कैरन के डेवलपर le1xia0 का कहना है कि यह मल्टी-एजेंट आर्किटेक्चर हैकिंग के लिए नहीं बनाया गया था लेकिन अपराधियों ने इसका दुरुपयोग कर दर्जनों कंपनियों को आसानी से अपना शिकार बना लिया।

क्या अब एआई को साइबर हमलों के लिए इंसान की जरूरत नहीं?

तीन दशकों से साइबर सुरक्षा क्षेत्र में काम कर रहे फेगरलैंड ने एआई एजेंट्स द्वारा इस्तेमाल की गई जटिल तकनीकों पर हैरानी जताई है। जब एआई किसी मुख्य एप्लीकेशन में कमी ढूंढने में विफल रहा तो उसने खुद डिजिटल रिकॉर्ड खंगालकर कंट्रोल पैनल खोजा और डेटा प्रोसेसिंग की सूक्ष्म कमजोरी का फायदा उठाकर सर्वर से मनचाहे कमांड दिए। फेगरलैंड के अनुसार तकनीक अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है जहां हैकर-एजेंस को किसी भी प्रकार की इंसानी देखरेख की आवश्यकता नहीं है।

दिग्गज कंपनियों ने हैकिंग के बाद क्या कदम उठाए?

रॉयटर्स द्वारा की गई स्वतंत्र जांच में इस हमले की शिकार बनी कई वैश्विक कंपनियों की पुष्टि हुई है। कृषि उपकरण निर्माता कंपनी डियर ने कहा कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद सुधारात्मक उपाय किए हैं और किसी संवेदनशील जानकारी के चोरी होने का सबूत नहीं मिला है। शार्कनिंजा ने बताया कि हमला केवल प्रोडक्ट सपोर्ट वाली एक अलग वेबसाइट तक सीमित था जिसे नियंत्रित कर लिया गया है, जबकि कमिंस अपने थर्ड-पार्टी वेंडर की वेबसाइट पर हुए हमले की जांच कर रही है।

क्या अन्य हैकर्स भी कर रहे हैं एआई का ऐसा ही दुरुपयोग?

जांच के दौरान फेगरलैंड ने पाया कि केवल यही चीनी हैकर एआई का गलत इस्तेमाल नहीं कर रहा था। एक अन्य हैकर ने क्रेडिट कार्ड डेटा की एक बड़ी खेप चुरा ली. वहीं एक अन्य अपराधी ने एआई एजेंट्स के जरिए क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज को लूटने की कोशिश की। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि एआई टूल केवल वैधानिक कार्यों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि साइबर अपराध की अंडरवर्ल्ड दुनिया में तेजी से एक मुख्य हथियार के रूप में अपनी जगह बना रहे हैं।

क्या वैश्विक साइबर सुरक्षा के लिए खड़ी हो गई है नई मुसीबत?

ऑटोनॉमस एआई एजेंट्स की यह क्षमता पूरी दुनिया के लिए भारी चिंता का कारण बन रही है। हाल के हफ्तों में दक्षिण कोरिया और जापान में भी एआई-संचालित हैकिंग के कई बड़े मामले सामने आए हैं। अगस्त में रूसी हैकर्स ने स्पेसएक्स के 'कर्सर एआई' टूल का इस्तेमाल कर सात संगठनों में सेंध लगाई थी, जबकि सितंबर में एआई एजेंट्स के जरिए 25 कंपनियों से 60 लाख क्रेडिट कार्ड रिकॉर्ड चुराए गए थे। साइबर क्रिमिनल फोरम्स पर अब इन एजेंट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।

एआई ड्रिवन हैकिंग से कितना खतरा?

  • एट्रेडिशनल हैकिंग की तुलना में बेहद आसान:जहां पहले बड़े साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए दर्जनों हैकर्स की टीम और हफ्तों की लंबी मेहनत लगती थी, वहीं अब एक अकेला व्यक्ति कुछ हजार डॉलर खर्च करके दुनिया भर के सर्वर को ध्वस्त कर सकता है।
  • डिजिटल सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को चुनौती:एआई तकनीक का यह खौफनाक और ऑटोनोमस रूप आज वैश्विक स्तर पर डिजिटल सुरक्षा के पूरे ढांचे को बुरी तरह हिलाकर रख रहा है।
  • सख्त सुरक्षा मानकों की सख्त जरूरत: यदि समय रहते इन ऑटोनोमस एआई एजेंट्स और ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा नियम और मानक तय नहीं किए गए, तो हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।
  • वैश्विक इंटरनेट सुरक्षा पर मंडराता बड़ा खतरा: इन आधुनिक और स्वचालित एआई टूल्स पर नियंत्रण न पाने की स्थिति में आने वाले समय में पूरी वैश्विक इंटरनेट सुरक्षा प्रणाली के पूरी तरह चरमराने का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
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