09/02/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/02/2026 04:39
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लॉगिन करेंजापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआरए) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया है। एजेंसी ने देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, ठोस निजी खपत और सार्वजनिक निवेश को इसका मुख्य कारण बताया है। वित्तीय प्रणाली की सुदृढ़ता में सुधार भी इस सकारात्मक बदलाव का एक प्रमुख कारण है। एजेंसी की ओर से यह घोषणा मंगलवार को की गई।
भारत की जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक है और इसका सांकेतिक जीडीपी 3.9 खरब अमेरिकी डॉलर है। वित्त वर्ष 2026 में व्यक्तिगत आयकर कटौती और जीएसटी दरों में कमी से निजी खपत मजबूत बनी रही। वास्तविक जीडीपी के संदर्भ में अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी बढ़ी। एजेंसी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत छह फीसदी से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखेगा। 2026 की शुरुआत से खाद्य कीमतों और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई बढ़ी है। इसके बावजूद, महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की लक्ष्य सीमा के भीतर बनी हुई है।
जेसीआरए ने कहा कि भारत को राजकोषीय घाटे को ऊंचा रखने वाली संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें जटिल अंतर-सरकारी राजकोषीय संबंध और राज्यों के बीच असमानताएं कम करने के उद्देश्य से राजकोषीय हस्तांतरण शामिल हैं। सरकार ने सब्सिडी सहित चालू व्यय की वृद्धि को नियंत्रित किया है। पूंजीगत व्यय, विशेषकर अवसंरचना निवेश पर अधिक जोर दिया गया है। राजकोषीय व्यय की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने अपना राजकोषीय घाटा पिछले वित्त वर्ष के 4.7 फीसदी से घटाकर जीडीपी का 4.4 फीसदी कर दिया। पूंजीगत व्यय को उच्च स्तर पर बनाए रखा गया।
बैंकिंग क्षेत्र में सुधार हुआ है। मार्च 2026 के अंत तक सकल गैर-निष्पादित ऋण अनुपात घटकर 1.8 फीसदी हो गया। एजेंसी ने इस सुधार का श्रेय दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की स्थापना, सरकारी पूंजी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मजबूत निगरानी को दिया। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, जो अल्पकालिक बाहरी ऋण से काफी अधिक है, भारत को बाहरी झटकों के खिलाफ मजबूत लचीलापन प्रदान करता है। केंद्र सरकार का ऋण-से-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2026 के अंत में 56.1 फीसदी था। इसके धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। हालांकि, सामान्य सरकारी ऋण और संबंधित ब्याज बोझ अभी भी अधिक हैं।