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09/02/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/02/2026 04:39

आर्थिक मोर्चे से अच्छी खबर: जापानी एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई, जानिए कैसे मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

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आर्थिक मोर्चे से अच्छी खबर: जापानी एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई, जानिए कैसे मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

Wed, 02 Sep 2026 03:26 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 02 Sep 2026 03:26 PM IST
सार

जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआरए) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB+ से A- तक बढ़ा दिया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि, निजी खपत, सार्वजनिक निवेश और वित्तीय प्रणाली में सुधार को इसका कारण बताया गया है। जानें भारत की अर्थव्यवस्था को बीते कुछ समय में कैसे मिला यह बड़ा बूस्ट।

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भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआरए) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया है। एजेंसी ने देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, ठोस निजी खपत और सार्वजनिक निवेश को इसका मुख्य कारण बताया है। वित्तीय प्रणाली की सुदृढ़ता में सुधार भी इस सकारात्मक बदलाव का एक प्रमुख कारण है। एजेंसी की ओर से यह घोषणा मंगलवार को की गई।

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जेसीआरए ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने लगभग सात फीसदी की उच्च वृद्धि दर बनाए रखी है। यह मजबूत निजी खपत और सार्वजनिक निवेश से समर्थित है। भारत सरकार ने उत्पादकता वृद्धि और आर्थिक विकास के लिए नीतियां लागू की हैं। इनमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विकास और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का कार्यान्वयन शामिल है। इन कदमों से देश की आर्थिक बुनियाद पहले से अधिक मजबूत हुई है। एजेंसी ने भारत गणराज्य की विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा दीर्घकालिक जारीकर्ता रेटिंग को एक पायदान ऊपर A- कर दिया है। भारत की कंट्री सीलिंग को भी एक पायदान बढ़ाकर A किया गया है।
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भारत की अर्थव्यवस्था क्यों बढ़ रही है?

भारत की जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक है और इसका सांकेतिक जीडीपी 3.9 खरब अमेरिकी डॉलर है। वित्त वर्ष 2026 में व्यक्तिगत आयकर कटौती और जीएसटी दरों में कमी से निजी खपत मजबूत बनी रही। वास्तविक जीडीपी के संदर्भ में अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी बढ़ी। एजेंसी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत छह फीसदी से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखेगा। 2026 की शुरुआत से खाद्य कीमतों और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई बढ़ी है। इसके बावजूद, महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की लक्ष्य सीमा के भीतर बनी हुई है।

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सरकारी वित्त में क्या सुधार हुए हैं?

जेसीआरए ने कहा कि भारत को राजकोषीय घाटे को ऊंचा रखने वाली संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें जटिल अंतर-सरकारी राजकोषीय संबंध और राज्यों के बीच असमानताएं कम करने के उद्देश्य से राजकोषीय हस्तांतरण शामिल हैं। सरकार ने सब्सिडी सहित चालू व्यय की वृद्धि को नियंत्रित किया है। पूंजीगत व्यय, विशेषकर अवसंरचना निवेश पर अधिक जोर दिया गया है। राजकोषीय व्यय की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने अपना राजकोषीय घाटा पिछले वित्त वर्ष के 4.7 फीसदी से घटाकर जीडीपी का 4.4 फीसदी कर दिया। पूंजीगत व्यय को उच्च स्तर पर बनाए रखा गया।

बैंकिंग क्षेत्र और बाहरी झटकों से कितनी सुरक्षा है?

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार हुआ है। मार्च 2026 के अंत तक सकल गैर-निष्पादित ऋण अनुपात घटकर 1.8 फीसदी हो गया। एजेंसी ने इस सुधार का श्रेय दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की स्थापना, सरकारी पूंजी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मजबूत निगरानी को दिया। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, जो अल्पकालिक बाहरी ऋण से काफी अधिक है, भारत को बाहरी झटकों के खिलाफ मजबूत लचीलापन प्रदान करता है। केंद्र सरकार का ऋण-से-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2026 के अंत में 56.1 फीसदी था। इसके धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। हालांकि, सामान्य सरकारी ऋण और संबंधित ब्याज बोझ अभी भी अधिक हैं।

Amar Ujala Ltd published this content on September 02, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 02, 2026 at 10:39 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]