07/31/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/31/2026 00:10
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लॉगिन करेंEV adoption India: सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलना वाला जहरीला धुआं अब न केवल जनता के फेफड़ों को खोखला कर रहा है, बल्कि मासूम बच्चों की सांसों पर भी भारी पड़ रहा है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन यानी आईसीसीटी की एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अगर भारत परिवहन क्षेत्र में पूरी तरह से शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो साल 2050 तक लगभग 17 लाख असमय (अकाल) मौतों को टाला जा सकता है। इसके साथ ही 97,200 बच्चों को अस्थमा जैसी सांस की गंभीर बीमारी से सुरक्षित किया जा सकता है।
देश में हर छह मिनट में एक जान ले रहा परिवहन प्रदूषण
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में भारत में प्रदूषण के हैरान करने वाले आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्तमान में देश में सड़क परिवहन से फैलने वाला जहरीला धुआं हर साल हजारों जानें ले रहा है।
एनसीआर (NCR) बना प्रदूषण का सबसे बड़ा शिकार
दुनिया में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर
क्या है समाधान?