Amar Ujala Ltd

10/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/06/2026 18:19

रिपोर्ट: दुनिया के 34 करोड़ से अधिक बच्चों पर मंडराया गंभीर खतरा, यूनिसेफ की सूखा और भुखमरी की चेतावनी

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रिपोर्ट: दुनिया के 34 करोड़ से अधिक बच्चों पर मंडराया गंभीर खतरा, यूनिसेफ की सूखा और भुखमरी की चेतावनी

Wed, 07 Oct 2026 04:44 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला ब्यूरो, अमर उजाला।
अमर उजाला ब्यूरो, अमर उजाला। Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 07 Oct 2026 04:44 AM IST
सार

यूनिसेफ ने बच्चोंं को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के चलते होने वाले बदलावों को लेकर आगाह किया गया है। जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ेगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने वैश्विक जलवायु संकट को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। कहा है कि प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने से दुनिया भर का मौसम तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव से भारत समेत करीब 100 देशों के 34.7 करोड़ से अधिक बच्चों की जिंदगी, सेहत और पढ़ाई पर सीधा संकट गहरा गया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि 2026-2027 का अल नीनो इतिहास के सबसे गंभीर दौर में से एक साबित हो सकता है।
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रिपोर्ट में यूनिसेफ ने क्या कहा है?
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के चलते अक्टूबर से दिसंबर के दौरान कई क्षेत्रों में भयंकर सूखा पड़ने, तो कई जगहों पर अप्रत्याशित बाढ़ आने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कमजोर परिवारों और मासूम बच्चों पर पड़ेगा। सूखाग्रस्त इलाकों में फसलों के नष्ट होने से भुखमरी और गंभीर कुपोषण का खतरा बढ़ेगा, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, हैजा और डेंगू जैसी जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका है। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं के कारण लाखों बच्चों की पढ़ाई ठप होने और स्कूलों के बंद होने का अंदेशा है।
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पहले से तैयारी की अपील
यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल के अनुसार, बच्चों के लिए अल नीनो सिर्फ मौसम में बदलाव नहीं है। इसका सीधा मतलब भुखमरी, कुपोषण, साफ पानी की कमी और गंभीर बीमारियों का फैलना है। एजेंसी ने प्रभावित देशों से स्वच्छ पेयजल, जीवनरक्षक पोषण किट, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन राहत तंत्र को तत्काल मजबूत करने की अपील की है, ताकि करोड़ों मासूमों के बचपन को इस मौसमी तबाही से सुरक्षित रखा जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्राथमिकता वाले देशों में 4.11 अरब डॉलर की जरूरत है, जिसमें से केवल 1.28 अरब डॉलर ही मिले हैं, यानी 69 फीसदी की कमी है।
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भारत समेत एशिया प्रशांत में 19 करोड़ बच्चे आ सकते हैं चपेट में
रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा खतरा भारत समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र है, जहां सबसे अधिक लगभग 19 करोड़ बच्चे असामान्य सूखे या बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। पूर्वी व दक्षिणी अफ्रीका में 4.1 करोड़ और लातिन अमेरिका में करीब 4.1 करोड़ बच्चे इसके असर से जूझेंगे। फिलीपीन, कोलंबिया, फिजी और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में गंभीर सूखे से खेती बर्बाद होने और पानी की भारी किल्लत होने का डर है। वहीं, सोमालिया और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने से नदियां उफान पर आ सकती हैं, जिससे पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।
Amar Ujala Ltd published this content on October 07, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 07, 2026 at 00:19 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]