07/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/25/2026 02:37
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लॉगिन करेंईरान यमन के हूती विद्रोहियों के माध्यम से लाल सागर में बाब अल-मंदेब जलमार्ग बंद करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा व्यवधान पैदा कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर एक साथ संकट आ जाएगा। ये मार्ग पश्चिम एशिया के ऊर्जा उत्पादकों को एशिया, यूरोप और अन्य देशों के ग्राहकों से जोड़ते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी के तेल उत्पादकों ने लाल सागर को प्राथमिकता दी। इससे लाल सागर गलियारे से तेल की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। केपलर सिग्नल ओशन के आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में लाल सागर से तेल का प्रेषण औसतन 40 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। जून में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कुल पेट्रोलियम मात्रा 74 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई। यह आंकड़ा वैश्विक तेल उत्पादन का सात फीसदी है। यह मार्ग पश्चिम एशिया के ऊर्जा उत्पादकों को दुनिया के बड़े बाजारों से जोड़ता है।
रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के अनुसार, लाल सागर के लगातार बंद रहने से भारत को बड़ा नुकसान होगा। भारत को निर्यात के मोर्चे पर 30 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह व्यवधान कृषि और कपड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। रसायन, पेट्रोलियम उत्पाद और विनिर्माण आपूर्ति शृंखला उद्योग भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। भारत का 95 फीसदी व्यापार समुद्री मार्ग से होता है, जिससे यह संकट और गंभीर हो जाता है। यूरोपीय देशों के साथ भारत का 80 फीसदी व्यापार इसी मार्ग पर निर्भर है।
इस व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार हैं, जो अस्थायी व्यवधानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। हालांकि, यदि लाल सागर और होर्मुज का दोहरा संकट लंबे समय तक बना रहा, तो सरकारी तेल कंपनियों पर लाभ अंतर का दबाव बढ़ेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें घरेलू अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करेंगी। इससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और हवाई ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। माल ढुलाई लागत और अंततः खुदरा कीमतें भी प्रभावित होंगी, जिससे महंगाई बढ़ेगी। तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि विनिर्माण, कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं में महंगाई को बढ़ावा देगी।