02/05/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/05/2026 08:49
संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) की संचार साथी पहल वेब पोर्टल (www.sancharsaathi.gov.in) और मोबाइल ऐप के माध्यम से सुलभ है। संचार साथी की 'चक्षु' सुविधा नागरिकों को विभिन्न श्रेणियों के तहत संदिग्ध धोखाधड़ी वाले कम्युनिकेशन की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाती है। इसके शुभारंभ के बाद से चक्षु सुविधा के माध्यम से रिपोर्ट किए गए संदिग्ध धोखाधड़ी कम्युनिकेशन का वर्ष-वार और श्रेणी-वार विवरण इस प्रकार है:
|
श्रेणी |
2024 |
2025 |
2026 |
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नकली कस्टमर केयर हेल्पलाइन |
30969 |
60985 |
4519 |
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आईवीआर / रोबो कॉल |
16037 |
14925 |
1376 |
|
डीओटी / ट्राई के रूप में पहचान |
217 |
15595 |
809 |
|
पुलिस, सीबीआई, कस्टम्स, आधार, आरबीआई आदि के रूप में पहचान |
44865 |
54639 |
6675 |
|
किसी रिश्तेदार या मित्र के रूप में पहचान बताना (बहुरूपिया बन कर धोखाधड़ी) |
258 |
19564 |
1201 |
|
निवेश, शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग |
165 |
29140 |
2112 |
|
बैंक / बिजली / गैस / बीमा आदि से संबंधित केवायसी और पेमेंट |
21281 |
106483 |
8325 |
|
मिसलेनियस लिंक / वेबसाइट |
8304 |
19418 |
2933 |
|
ऑनलाइन नौकरी / लॉटरी / उपहार / लोन के ऑफर |
23634 |
58560 |
4591 |
|
सेक्स्टॉर्शन |
10901 |
21189 |
1774 |
|
कोई अन्य संदिग्ध धोखाधड़ी |
51593 |
119164 |
8540 |
|
कुल |
208224 |
519662 |
42855 |
संचार साथी पहल सतर्क नागरिकों को उन संदिग्ध धोखाधड़ी वाले कम्युनिकेशन की रिपोर्ट करने के लिए सशक्त बनाती है, जहाँ धोखाधड़ी का प्रयास तो किया गया था लेकिन वास्तव में धोखाधड़ी हुई नहीं थी। धोखाधड़ी के कारण वास्तविक वित्तीय नुकसान से जुड़े मामलों का निपटारा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा किया जाता है, जो गृह मंत्रालय (एमएचए) के तहत एक संगठन है और जिसे कार्य आवंटन नियमों के अनुसार साइबर अपराध को संभालने का अधिकार दिया गया है। रिपोर्ट किए गए व्यक्तिगत संदिग्ध धोखाधड़ी कम्युनिकेशन पर सीधे कार्रवाई करने के बजाय, दूरसंचार विभाग (डीओटी) दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग की पहचान करने के लिए क्राउड-सोर्स्ड डेटा (नागरिकों से प्राप्त जानकारी) का उपयोग और विश्लेषण करता है। कार्रवाई आम तौर पर मोबाइल उपयोगकर्ता को दोबारा वेरिफिकेशन का अवसर देने के बाद ही की जाती है। इस तरह के विश्लेषण के आधार पर की गई कार्रवाई का विवरण संचार साथी पोर्टल के डैशबोर्ड पर उपलब्ध है। नागरिकों द्वारा प्रदान किए गए 7.7 लाख इनपुट के आधार पर, 39.43 लाख मोबाइल कनेक्शन काट दिए गए हैं, 2.27 लाख मोबाइल हैंडसेट ब्लैकलिस्ट किए गए हैं और 1.31 लाख एसएमएस टेम्प्लेट ब्लैकलिस्ट किए गए हैं।
साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को और अधिक रोकने के लिए, दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने हितधारकों के बीच सूचनाओं के द्विपक्षीय आदान-प्रदान के लिए एक सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) स्थापित किया है। डीआईपी पर 1200 से अधिक संगठनों को जोड़ा गया है, जिनमें केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), 1100 बैंक, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सेवा प्रदाता, भुगतान प्रणाली ऑपरेटर (पीएसओ), दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी), व्हाट्सएप आदि शामिल हैं। डीआईपी पर काटे गए मोबाइल नंबरों की सूची उपलब्ध रहती है, जिसे मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (एमएनआरएल) कहा जाता है, जिसमें नंबर बंद करने के कारण और तारीख शामिल होती है। साथ ही यहाँ वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) भी होता है, जो एक जोखिम-आधारित पैमाना है जो किसी मोबाइल नंबर को वित्तीय धोखाधड़ी के मध्यम, उच्च या बहुत उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत करता है। चक्षु पर नागरिकों द्वारा प्रदान किए गए संदिग्ध मोबाइल नंबरों को भी उचित विश्लेषण के बाद एफआरआई के हिस्से के रूप में साझा किया जाता है।
डीआईपी पर साझा की गई जानकारी के आधार पर, हितधारक अपने संबंधित क्षेत्र के खातों या प्रोफाइल के विश्लेषण के अनुसार आवश्यक कार्रवाई शुरू करते हैं। हितधारकों द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) के माध्यम से लेनदेन को रोकने और नागरिकों को अलर्ट/सूचनाएं भेजने के आधार पर ₹1000 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी राशि को रोका गया है। इसके अतिरिक्त, व्हाट्सएप ने साझा किए गए मोबाइल नंबरों से जुड़े 28 लाख प्रोफाइल/खातों को बंद कर दिया है।
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