Amar Ujala Ltd

07/28/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/27/2026 16:29

जंतर-मंतर आंदोलन: सिर्फ सरकारी FIR ही होंगी वापस, निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों में जारी रहेगी कार्रवाई

{"_id":"6a67da6ed46955149702ac75","slug":"only-government-fir-will-be-withdrawn-action-will-continue-in-cases-filed-on-the-basis-of-private-complaints-i-2026-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंतर-मंतर आंदोलन: सिर्फ सरकारी FIR ही होंगी वापस, निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों में जारी रहेगी कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}

जंतर-मंतर आंदोलन: सिर्फ सरकारी FIR ही होंगी वापस, निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों में जारी रहेगी कार्रवाई

Tue, 28 Jul 2026 03:55 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 28 Jul 2026 03:55 AM IST
सार

जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं।

विज्ञापन
सीजेपी प्रोटेस्ट - फोटो : अमर उजाला
  • Link Copied

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

यह खबर एप पर पढ़ें

या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

संक्षिप्त विज्ञापन देखें विज्ञापन लोड हो रहा है

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

लॉगिन करें

विस्तार

जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर, जिनमें महिला पत्रकारों से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य आपराधिक आरोप शामिल हैं, वापस नहीं ली जाएंगी। इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

विज्ञापन


केंद्र सरकार ने पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए भरोसा दिया था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी के तहत दिल्ली पुलिस अपनी ओर से दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि सोमवार शाम तक इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए।
विज्ञापन


दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार, आंदोलन के दौरान दिल्ली में करीब 20 एफआईआर दर्ज हुईं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और हिंसा से जुड़े हैं। वहीं करीब पांच एफआईआर निजी शिकायतों पर दर्ज की गई हैं। इनमें दो महिला पत्रकारों द्वारा छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


चूंकि ये निजी शिकायतों पर आधारित मामले हैं, इसलिए इन्हें सरकार या पुलिस अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकती। इन मामलों में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में दिल्ली पुलिस स्वयं शिकायतकर्ता है, केवल उन्हीं में अभियोजन पक्ष अदालत से मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करेगा। इसके लिए पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। एलजी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी। अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी कि मुकदमा वापस लिया जाए या नहीं।

ऐसे होगी सरकारी एफआईआर वापसी की प्रक्रिया
केंद्र या सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक आदेश जारी होगा।
दिल्ली पुलिस अभियोजन की ओर से उपराज्यपाल को मुकदमे वापस लेने का प्रस्ताव भेजेगी।
एलजी की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी।
अदालत आवेदन पर सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी। अदालत की अनुमति के बिना कोई भी मुकदमा स्वतः समाप्त नहीं होगा।

केस खत्म करने के तीन वैकल्पिक कानूनी रास्ते

क्लोजर रिपोर्ट: यदि चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते, तो पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बाद मामला समाप्त हो सकता है।
हाईकोर्ट की शरण: गंभीर मामलों या राहत न मिलने की स्थिति में बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट एफआईआर निरस्त करने पर विचार कर सकता है।
लोक अदालत का विकल्प: बिना अनुमति प्रदर्शन, रास्ता जाम या धारा 163 के उल्लंघन जैसे अपेक्षाकृत छोटे मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से लोक अदालत में किया जा सकता है।

आंदोलन से जुड़े मामले एक नजर में
करीब 20 एफआईआर दर्ज हैं।
14 मामले प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े।
एक मामला बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का।
पांच निजी शिकायतों वाले मामले, जिनमें पत्रकारों से मारपीट और छेड़छाड़ के आरोप शामिल।
टॉलस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर पर दो सीसीटीवी कैमरे तोड़ने के मामले की अलग जांच जारी।
Amar Ujala Ltd published this content on July 28, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 27, 2026 at 22:29 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]