Amar Ujala Ltd

09/27/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/27/2026 09:25

वायुसेना ने किया 60 विमानों का करार: एम्ब्रेयर ने महिंद्रा को चुना साथी, कमर्शियल विमानों के लिए अदाणी से करार

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वायुसेना ने किया 60 विमानों का करार: एम्ब्रेयर ने महिंद्रा को चुना साथी, कमर्शियल विमानों के लिए अदाणी से करार

Sun, 27 Sep 2026 07:39 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 27 Sep 2026 07:39 PM IST
सार

भारतीय वायुसेना के 60 मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम में एम्ब्रेयर ने महिंद्रा ग्रुप को अपना रक्षा साझेदार चुना है। कंपनी केसी-390 मिलेनियम विमान पेश करेगी, जबकि कमर्शियल कारोबार में अदाणी के साथ साझेदारी है।

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60 विमानों का करार - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर ने भारतीय वायुसेना के 60 मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) कार्यक्रम को लेकर अपनी साझेदारी स्पष्ट कर दी है। कंपनी ने कहा है कि इस रक्षा सौदे के लिए वह महिंद्रा ग्रुप के साथ मिलकर बोली लगाएगी और अपने केसी-390 मिलेनियम विमान को पेश करेगी। वहीं, नागरिक विमानन क्षेत्र में भारत में बढ़ती कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय उड़ानों की मांग को देखते हुए एम्ब्रेयर ने अदाणी ग्रुप के साथ साझेदारी की है।
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सैन्य सौदे में महिंद्रा, कमर्शियल कारोबार में अदाणी
एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी के प्रेसिडेंट और सीईओ बोस्को दा कोस्टा जूनियर ने एएनआई से बातचीत में दोनों साझेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एमटीए कार्यक्रम के लिए कंपनी का भारतीय साझेदार महिंद्रा ग्रुप है, जबकि नागरिक विमान कारोबार के लिए अदाणी ग्रुप के साथ काम किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि कंपनी ने 2023 में भारत में सी-390 का प्रदर्शन किया था। उस दौरान भारतीय बाजार और संभावित साझेदारों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद एमटीए कार्यक्रम के लिए महिंद्रा ग्रुप को अपना साझेदार चुना गया।
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बोस्को ने स्पष्ट किया कि सैन्य परिवहन विमान कार्यक्रम में महिंद्रा के साथ साझेदारी बनी रहेगी, जबकि नागरिक विमान क्षेत्र में अदाणी के साथ कंपनी की साझेदारी अलग दिशा में आगे बढ़ेगी।

IAF को 60 विमान, 50 फीसदी अतिरिक्त खरीद का विकल्प
भारतीय वायुसेना के एमटीए कार्यक्रम का उद्देश्य पुराने हो रहे परिवहन विमान बेड़े को चरणबद्ध तरीके से बदलना है। इसके तहत शुरुआत में 60 परिवहन विमानों की खरीद की योजना है। इसके अलावा जरूरत के मुताबिक शुरुआती संख्या से 50 फीसदी तक अतिरिक्त विमान खरीदने का विकल्प भी रखा गया है।

एम्ब्रेयर इस कार्यक्रम के लिए दो इंजन वाले केसी-390 मिलेनियम विमान को पेश कर रही है। यह विमान पहले से ब्राजील, पुर्तगाल समेत कई देशों की वायुसेनाओं में इस्तेमाल हो रहा है। कंपनी के रक्षा प्रमुख ने कहा कि केसी-390 को सिर्फ पुराने एएन-32 विमानों के संभावित विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे भारतीय वायुसेना के मध्यम श्रेणी के परिवहन विमान बेड़े को मानकीकृत करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया जा रहा है।

महिंद्रा, टाटा, HAL समेत पांच कंपनियों को RFP
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के इस कार्यक्रम के लिए पांच कंपनियों को प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया है। इनमें महिंद्रा, टाटा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), रिलायंस डिफेंस और अदाणी शामिल हैं। बोस्को ने कहा कि एम्ब्रेयर इस कार्यक्रम की समयसीमा के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने में पूरी तरह जुटी है। उनके मुताबिक, वायुसेना को अपनी परिवहन क्षमता बढ़ाने के लिए यह क्षमता जल्द चाहिए और कंपनी केसी-390 को इस जरूरत के अनुरूप मानती है।

C-130J से तुलना पर क्या बोले एम्ब्रेयर सीईओ?
जब बोस्को से अमेरिकी सी-130जे से केसी-390 की तुलना करने को कहा गया, तो उन्होंने केसी-390 की क्षमताओं को अधिक बताया। उन्होंने दावा किया कि केसी-390 ज्यादा सामान ले जा सकता है और अधिक गति तथा ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है।

कंपनी के मुताबिक, उसके वैश्विक बेड़े में केसी-390 की उपलब्धता दर करीब 93 फीसदी और मिशन पूरा करने की दर 99 फीसदी है। बोस्को ने यह भी बताया कि एक ग्राहक के पास पिछले महीने चार से अधिक विमानों के बेड़े ने 100 फीसदी उपलब्धता हासिल की। उन्होंने कहा कि केसी-390 ने संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेना के साथ एक सप्ताह के परीक्षण के दौरान बिना पक्की रनवे वाली रेगिस्तानी पट्टियों से भी संचालन क्षमता प्रदर्शित की है।

भारत को सप्लाई चेन और MRO हब बनाना चाहती है कंपनी
एम्ब्रेयर के अनुसार दुनियाभर में केसी-390 के करीब 70 विमानों के ऑर्डर हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात के 10 और कोलंबिया के दो नए ऑर्डर भी शामिल हैं। कंपनी भारत को अपनी वैश्विक सप्लाई चेन और एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही है। बोस्को ने कहा कि कंपनी भारत को अपने लिए एक हब के रूप में विकसित करना चाहती है। उनके मुताबिक, केसी-390 का वैश्विक बेड़ा बढ़ रहा है और दुनिया भर में ऑपरेटरों को बेहतर समर्थन देने के लिए सप्लाई चेन तथा एमआरओ नेटवर्क का विस्तार जरूरी है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 27, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 27, 2026 at 15:25 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]