07/26/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/26/2026 00:41
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।
हमारे जीवन में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें याद रखने के लिए कैलेंडर देखने की जरूरत नहीं पड़ती। आज, 26 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है। आज 'कारगिल विजय दिवस' है। ये दिन हमें गर्व से भर देता है। ये दिन हमें अपने वीर जवानों के अद्भुत साहस की याद दिलाता है। कारगिल की ऊंची-ऊंची चोटियाँ, कठिन मौसम, दुश्मन की चुनौती, हर परिस्थिति हमारे सैनिकों के सामने थी, लेकिन उनका हौंसला हर चुनौती से बड़ा था। उन्होंने माँ भारती की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। आज 'कारगिल विजय दिवस' पर मैं सभी वीर शहीदों और वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।
साथियो,
आज का भारत अपने वीरों को सिर्फ याद ही नहीं करता, बल्कि नई पीढ़ी तक उनकी गाथा भी पहुंचाता है। इसी भावना से इस वर्ष एक विशेष 'शौर्य विजय यात्रा' निकाली गई है। 14 जुलाई को दिल्ली के 'National War Memorial' से शुरू हुई यह मोटरसाइकिल यात्रा, द्रास के कारगिल वॉर मेमोरियल तक पहुंचेगी। इसका संदेश है - "One Ride, One Nation, One Salute." यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि राष्ट्र के लिए दिया गया बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
साथियो,
आज भारत अपने सैनिकों के साहस के साथ-साथ अपनी तकनीकी क्षमता को भी लगातार मजबूत कर रहा है। कुछ दिन पहले भारतीय नौ-सेना में INS महेंद्रगिरि शामिल किया गया। यह आधुनिक जंगी जहाज भारत में ही design किया गया है, भारत में ही बना है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है। इसी महीने DRDO ने Pinaka Long Range Guided Rocket का भी सफल परीक्षण किया। इस सफलता के पीछे हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का सामूहिक परिश्रम है। दो-तीन दिन पूर्व ही DRDO ने कुशा मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है।
साथियो,
आज रक्षा उत्पादन हो, रक्षा निर्यात हो या मित्र देशों के साथ राजनीतिक सहयोग - भारत लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। इस महीने की शुरुआत में, मैं, इंडोनेशिया में था, जहाँ, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है। दुनिया का भरोसा भारत के रक्षा उपकरणों और तकनीक पर बढ़ रहा है। आइए, इस 'कारगिल विजय दिवस' पर हम अपने अमर शहीदों को नमन करें, और एक सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का अपना संकल्प और मजबूत करें।
मेरे प्यारे देशवासियो,
'मन की बात' के पिछले Episode में मैंने आपसे 'Catch The Rain' अभियान की चर्चा की थी। मैंने आग्रह किया था कि बारिश की हर बूँद को सहेजने के इस अभियान को जन-आंदोलन बनाएं। 'Catch The Rain' का संदेश बहुत सीधा है - जहाँ बारिश गिरे, जब बारिश गिरे, पानी को वहीं सहेजिए, इसलिए 04 जुलाई से देश-भर में एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत बारिश के पानी के संचयन, Ground Water Recharge, पुराने जल-स्त्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नई गति दी जा रही है। मुझे बहुत खुशी है कि गाँव हों या शहर, पंचायतें हों या सामाजिक संस्थाएं हर जगह लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है। कहीं पुराने तालाबों से गाद निकाली जा रही है, कहीं कुओं और बावड़ियों को फिर से जीवन दिया जा रहा है। बंद पड़े Borewell अब Ground Water Recharge का माध्यम बन रहे हैं।
साथियो,
मध्य-प्रदेश के सीधी जिले में करीब डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं। नरसिंहपुर में अमृत सरोवरों को संवारा गया है। महाराष्ट्र के नासिक में बड़ी मात्रा में पानी सहेजने की क्षमता विकसित हुई है। आंध्र-प्रदेश के नंद्याल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान से जुड़ी हैं और पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बनाया गया है। हमारे शहर भी पीछे नहीं हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र-प्रदेश के विजयनगरम - इस अभियान के उत्साहजनक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। आइए, हम भी अपने आस-पास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें - पानी की हर बूँद बचाएं। आज बचाई गई हर बूँद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
कुछ ही दिन पहले Glasgow में Commonwealth Games शुरू हुए हैं। हर देशवासी भारतीय दल को निरंतर अपनी शुभकामनाएं दे रहा है। उनकी कामना है कि सभी खिलाड़ी और athlete बेहतरीन प्रदर्शन करें और लोगों का दिल भी जीतें। साथियो, हमारे युवाओं ने हाल के दिनों में sports में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। PV Sindhu Badminton में Japan Open का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी लंदन में Lord's Stadium में अपना पहला Test Match जीता है। यह एक ऐतिहासिक जीत है। हमारी टीम ने 270 रनों के बड़े अंतर से यह मुकाबला जीता है। लेकिन बात सिर्फ इतनी सी नहीं है। Lord's के लंबे इतिहास में यह महिलाओं की टीम का पहला Test Match था। 1983 में इसी मैदान पर भारत ने अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता था। अब हमारी नारी शक्ति ने यहां देश का नाम रोशन किया है।
साथियो,
कुछ छोटे प्रयास ऐसे भी होते हैं, जो बहुत मायने रखते हैं। मुझे केरलम में एर्णाकुलम के साउथ चित्तूर में sports के ऐसे ही एक प्रयास के बारे में पता चला है। वहां के एक स्कूल में संस्कृत club है। यहां के teacher अभिलाष जी बड़े अनूठे तरीके से संस्कृत को लोकप्रिय बना रहे हैं। इस project को 'अक्षरकंदुक' नाम दिया गया है। इसमें संस्कृत के अक्षरों को football में इस्तेमाल होने वाले शब्दों से जोड़कर आसान तरीके से समझाया जाता है। इससे सीखने में आनंद मिलता है, साथ ही खेलों से लोगों का जुड़ाव भी बढ़ता है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
पिछले रविवार Vikram-1 इसके सफल launch से हर देशवासी गौरव से भरा हुआ है। हम सभी भारतीय space sector के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। ये private sector द्वारा विकसित भारत का पहला rocket है। हमारे युवा innovators ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी। उन्होंने गजब की skill, passion और patience दिखाया। लंबे समय तक हमारा space sector निजी क्षेत्र के लिए बंद रहा था। इस sector में रुचि रखने वाले काफी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पा रहा था। युवा हित को देखते हुए हमने space sector को private sector के लिए खोला। आज इसका परिणाम दुनिया देख रही है।
साथियो,
हमारे युवा साथी science में भी भारत का मस्तक ऊंचा कर रहे हैं| Science Olympiads दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण competition में से एक हैं। इनमें बड़ी संख्या में students हिस्सा लेते हैं। इसी महीने Physics, Chemistry, Biology और Mathematics के Olympiad हुए। इन competitions में भारतीय दल का प्रदर्शन शानदार रहा। Physics Olympiad में हमारे सभी पाँच students ने Gold Medal जीते और भारत ने पहली rank हासिल की। पिछले एक दशक में हुए हर Physics Olympiad में हमारे देश के students ने Gold या Silver Medal जरूर जीता है। Chemistry Olympiad में भी हमारे सभी students ने Gold Medal जीता। यह अब तक की best performance रही है। Biology Olympiad में भी हमारे सभी students ने medal जीते, इनमें एक Gold Medal भी शामिल है। वहीं, Mathematics Olympiad में हमारे students ने दो Gold और चार Silver Medals अपने नाम किए। मुझे देश की युवा शक्ति पर बहुत गर्व है। यह देखकर खुशी होती है कि भारत में Olympiads और Hackathons का culture निरंतर बढ़ रहा है| मुझे विश्वास है कि देश के अधिक से अधिक युवा ऐसे forums में अपना interest दिखाएंगे और भारत का परचम भी लहराएंगे।
मेरे प्यारे देशवासियो,
जब हुनर भी हो और कुछ करने का जज्बा भी हो, तो हर राह, आसान हो जाती है। कश्मीर की पारंपरिक चटाई 'वगू' को लेकर आज जो प्रयास हो रहे हैं उसमें इसी की झलक मिलती है। इसे सरकंडे और धान के पुआल से, straw से, तैयार किया जाता है। इस चटाई को बनाने की परंपरा बरसों पुरानी है। इसके लिए सबसे पहले कश्मीर के दलदली इलाकों की घास और सरकंडे की कटाई की जाती है। धूप में सुखाने के बाद छंटाई होती है और फिर शुरू होता है हाथों से बुनाई का काम। दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में करीब-करीब चार दिन लगते हैं। यह चटाई अनूठी भी है और eco-friendly भी है। एक बड़ी खासियत ये है कि आपको गर्मियों में इससे ठंडक मिलेगी और सर्दियों में गर्माहट| पहले यह कश्मीर के हर घर में दिखती थी, लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में इसका उपयोग कम होने लगा था। ऐसे में श्रीनगर के गुलाम हुसैन जी और उनकी बेटी तंजीला जी ने एक संकल्प लिया। दोनों 'वगू' craft की परंपरा को एक नया जीवन देने में जुट गए। गुलाम हुसैन जी बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं। उन्हें इस काम में कई तरह की चुनौतियां भी आई। लेकिन 'वगू' के संरक्षण का उनका संकल्प अडिग था। देखते ही देखते उनके इस प्रयास से बहुत सारे लोग जुड़ते चले गए। गुलाम हुसैन जी ने इस कौशल को खूब बढ़ाया। अपने मिशन में उन्हें स्थानीय स्तर पर सरकारी सहयोग भी मिला। आज तेजी से लोकप्रिय हो रहा, 'वगू' देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रहा है। मुझे इस प्रयास से जुड़े सभी लोगों पर बहुत गर्व है। आज हम सभी का Local products पर जोर है। हम Vocal for Local के मंत्र को लेकर चल रहे हैं। ऐसे में कश्मीर का 'वगू' भी आपके घर का हिस्सा बने, इस पर एक बार जरूर सोचिएगा।
साथियो,
हमारे देश में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है - ये अपनापन भी है। सुबह की शुरुआत हो, दोस्तों की मुलाकात हो या परिवार के साथ कुछ पल बिताने हों 'चाय' हर मौके का हिस्सा बन जाती है। वैसे तो आप भी भलीभाँति जानते हैं मेरा चाय से रिश्ता क्या है। लेकिन आज मैं जिस चाय की चर्चा कर रहा हूं, उसने सिर्फ स्वाद ही नहीं दिया, बल्कि अनेक बहनों के जीवन में, आत्मनिर्भरता की नई खुशबू भी घोल दी है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव में Self Help Group से जुड़ी महिलाओं ने 'विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' तैयार की है। इसमें lemongrass, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं। अपने अनोखे स्वाद और गुणों की वजह से इस चाय ने बहुत कम समय में लोगों के बीच खास पहचान बना ली। प्रयागराज के महाकुंभ और दिल्ली के International Food Festival में इस हर्बल चाय को खूब सराहना मिली है। विदेशों से आए लोगों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है।
साथियो,
सबसे प्रेरक बात इसकी शुरुआत है। यह पूरा प्रयास सिर्फ एक लाख रुपये से शुरू हुआ था। आज यह brand देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है। ये पहल हमें बताती है कि जब स्थानीय ज्ञान, प्रकृति और महिलाओं का आत्मविश्वास साथ आते हैं, तो एक छोटा-सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाता है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
आज देश-भर में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं| जब समाज इस भावना से जुड़ता है, तो बहुत सुन्दर और प्रेरक उदाहरण सामने आते हैं। साथियो, अमदाबाद (अहमदाबाद) में जन-भागीदारी की अद्भुत शक्ति दिखाई दी है। भाड़ज़ क्षेत्र में एक घंटे के भीतर साढ़े 3 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, इसमें, 25 हजार से अधिक लोग जुटे। स्कूली बच्चे, NCC Cadets, स्वयंसेवक और आम नागरिक - सभी ने इस अभियान में हिस्सा लिया। आने वाले वर्षों में यही पौधे एक घने शहरी वन का रूप लेंगे। इस प्रयास को Guinness Book of World Record में दर्ज किया गया है। साथियो 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत यूपी में भी जन-शक्ति का अद्भुत संकल्प देखने को मिला है। वहां एक ही दिन में 12 जुलाई को 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। UP का सांसद होने के नाते मेरे लिए ये भी विशेष गर्व की बात है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
पेड़ केवल मनुष्यों के लिए नहीं होते, वे अनगिनत जीवों के घर भी होते हैं। गुजरात के गिर के जंगलों में करीब 60 वर्षों बाद Indian Grey Hornbill फिर से बसेरा बना रहा है। ये गिर में बरसों से हो रहे संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों का परिणाम है। Hornbill को जंगलों का किसान कहा जाता है। ये फल खाते हैं और बीजों को दूर-दूर तक पहुंचाते हैं, उन्हीं बीजों से, जंगल में नए पेड़ उगते है इस तरह एक पक्षी जंगल को फिर से हरा-भरा बनाने में मदद करता है। मैं आप सभी से कहूँगा, हम सभी अपने जीवन के किसी विशेष अवसर को, प्रकृति से जरूर जोड़ें। एक पेड़ माँ के नाम लगाएं। आज का लगाया एक छोटा सा पौधा, आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ हवा और सुंदर भविष्य की विरासत बन सकता है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हम सभी जानते हैं कि आज plastic प्रदूषण पूरी दुनियाँ के पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। Single use plastic का कचरा कई वर्षों तक प्रकृति को नुकसान पहुंचाता रहता है, इसलिए, plastic का सही निस्तारण बहुत जरूरी है। साथियो, बिहार के सीतामढ़ी में 'Waste to Wealth' का शानदार उदाहरण सामने आया है। यहां कचरे की recycling कर उससे आकर्षक bench बनाई जा रही है। एक bench तैयार होने में करीब 40 किलो single use plastic खप जाती है। यह मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक होने के साथ-साथ eco-friendly भी होती है। इसे सरकारी स्कूलों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाता है। इसके जरिए लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। इस प्रयास में स्थानीय इकाई के साथ ही जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। सीतामढ़ी का ये प्रयास हमें बताता है कि Reduce, Reuse और Recycle आज केवल एक नारा नहीं बल्कि हमारा जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है।
साथियो,
आपको याद होगा पिछली बार 'मन की बात' में, मैंने 'गणेश उत्सव' की बात की थी। मैंने आग्रह किया था कि हमें अपने देश की मिट्टी से ही बने गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। जो POP (पी.ओ.पी.) से बने गणेश जी होते हैं या विदेश से आई गणेश जी की प्रतिमा होती है, उसके बजाय हमें देश की मिट्टी से बने गणेश जी को घर में स्थापित करना चाहिए। इस विषय पर अनेक लोगों ने मुझे संदेश भेजा है और अपने विचार रखे हैं। लोगों ने बताया कि उन्होंने मेरे आग्रह को अपनाया है। उन्होंने स्थानीय मिट्टी से तैयार होने वाले गणेश जी को स्थापित करने का संकल्प लिया है। लोगों ने लिखा है कि 'मन की बात' में पहले ही इस पर चर्चा हुई, इससे उन्हें सही वक्त पर सही कदम उठाने में मदद मिली। मैं एक बार फिर अपना आग्रह दोहराता हूं, इस बार गणपति पूजा में देश की मिट्टी से बने गणेश जी को अपने घर पर स्थापित करें, उनकी पूजा करें। आपका ये प्रयास भी एक तरह से प्रकृति की ही पूजा होगा।
मेरे प्यारे देशवासियो,
अब मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताऊँगा, जिनके बारे में सुनकर आपको बहुत गर्व होगा। एक ऐसे व्यक्ति जो science और innovation के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं, दुनिया में जिनकी पहचान बन रही है, लेकिन इसके बाद भी वो अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं, अवसर मिलते ही वो अपनी मिट्टी का सम्मान करना नहीं भूलते - वो व्यक्ति हैं, मणिपुर के Dr. Ronaldo Laishram जी। नाम उनका Ronaldo है लेकिन काम से वो एक Astrophysicist हैं। वे जापान में काम करते हैं और young galaxies के एक विशाल समूह की खोज करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। आप जानना चाहेंगे कि उन्होंने आखिर किया क्या है? दरअसल, उन्होंने इस पूरे समूह का नाम मणिपुर की एक खूबसूरत झील से जोड़कर Loktak proto-cluster रखा है। Loktak ताजे पानी की बहुत बड़ी झील है। Loktak लेक में तैरती हुई फूमडी मिलकर एक अनोखा landscape बनाती है। ऐसा लगता है कि विशाल समंदर में छोटे-छोटे द्वीप तैर रहे हों। उसी प्रकार universe में ये young galaxies भी एक विशाल संरचना का निर्माण करती हैं। आज मणिपुर की Loktak केवल देश के Map पर ही नहीं, बल्कि विशाल ब्रह्मांड में भी अपनी चमक बिखेर रही है। यह उपलब्धि हर भारतीय का गौरव बढ़ाने वाली है। इससे हमारे युवा साथियों को सीख मिलती है कि वे अपनी परंपरा से जुड़े रहकर भी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। ये ऐसी जड़ें हैं, जो सितारों की दुनिया को भी जगमगा सकती हैं।
मेरे प्यारे देशवासियो,
कुछ ही दिनों बाद, 7 अगस्त को हमारा देश 'National Handloom Day' मनाएगा। इस अवसर पर हम अपने बुनकर भाई-बहनों के कौशल और उनकी सृजनशीलता का उत्सव मनाते हैं। हमारे ये साथी पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
साथियो,
हथकरघे से बना हर परिधान किसी-न-किसी क्षेत्र, समुदाय और इससे जुड़े असंख्य लोगों की कहानी को सामने लाता है। ये वो लोग हैं, जो गर्व के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोने में जुटे हैं। आज के दिन मेरा आग्रह है कि हम हस्तकला को प्रोत्साहित कर, अपने बुनकर साथियो का सम्मान करें। आइए, हम vocal for local की भावना को और सशक्त करें।
साथियो,
आज देश में जिस तरह handloom को बढ़ावा दिया जा रहा है। उससे बड़ी संख्या में लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है। पोचमपल्ली से पटना और कुथमपल्ली से कच्छ तक इसके कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। आज ऐसे कई लोग और समूह हैं, जो, handloom की हमारी गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा और पहचान दे रहे हैं। कोई 'पोचमपल्ली इकत' की सुंदर परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, तो कोई महिला बुनकरों को जोड़कर wool products बना रहा है। कुछ लोग केरलम की पारंपरिक 'कसावु कला' को संरक्षित कर रहे हैं। इससे हमारी माताओं-बहनों को रोजगार भी मिल रहा है।
साथियो,
एक और विषय जिसका मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा, वह है 'खादी'। हम सभी जानते हैं कि 'खादी' महात्मा गांधी को बहुत प्रिय थी। बीते कुछ वर्षों में 'खादी' काफी लोकप्रिय हुई है। पिछले 12 वर्षों में इसकी बिक्री 6 गुना बढ़ी है। बिक्री का यह आंकड़ा अब 8,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि आने वाले त्योहार में 'खादी' का कोई-न-कोई, handloom का कोई-न- कोई, handicraft का कोई-न-कोई product जरूर खरीदें|
मेरे प्यारे देशवासियो,
अगर आपसे पूछा जाए कि भारत के कितने तरह के musical instruments हैं, तो आप सोच में पड़ जाएंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारे यहां बहुत से वाद्ययंत्र और उनसे जुड़ी परम्पराएं हैं। इसी तरह का एक instrument है - त्रिपुरा का 'चौंगप्रेंग'। यह वहां की tribal communities में काफी लोकप्रिय है। बांस से बने इस वाद्ययंत्र में तीन तार होते हैं। इससे निकली धुन बहुत मधुर होती है, जो सरोद से मिलती-जुलती है। कुछ वजहों से युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता कम होने लगी थी। ऐसे में सूरज कुमार देबबर्मा जी ने इसे फिर से लोकप्रिय बनाने का संकल्प लिया। आज उनका प्रयास रंग ला रहा है। वे चौंगप्रेंग के साथ ही वहां के अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर भी perform करते रहे हैं। Kokborok folk songs, Baul songs, Bangali Folk उन्हें खूब भाता है। अब मैं आपको एक छोटी सी clip सुनाना चाहता हूं। इस संगीत को आप कभी भूल नहीं पाएंगे।
#(Music)#
साथियो,
मुझे विश्वास है इसे सुनकर आपके मन को बहुत अच्छा लगा होगा। मुझे देबबर्मा जी पर बहुत गर्व है। पारंपरिक संगीत को लोकप्रिय बनाने का उनका प्रयास बहुत ही सराहनीय है। मेरा आग्रह है कि आप भी अपने आस-पास के पारंपरिक वाद्ययंत्र की जानकारी social media पर जरूर share करें। आपकी यह कोशिश दूसरों को भी पारंपरिक भारतीय संगीत से जरूर जोड़ेगी।
मेरे प्यारे देशवासियो,
कल 27 जुलाई को, भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि है। डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरक रूप थे, लेकिन, उनके हृदय के सबसे करीब एक शिक्षक की भूमिका थी। वे बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे। संयोग से, इसी हफ्ते हम 'गुरु पूर्णिमा' का पावन पर्व मनाएंगे। हमारे माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं। स्कूल के शिक्षक हमें अक्षर ज्ञान देते हैं। गुरु पूर्णिमा ऐसे सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। मैं देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।
साथियो,
कुछ ही सप्ताह बाद हम अपनी स्वतंत्रता का महापर्व भी मनाएंगे। 15 अगस्त हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। ये उन असंख्य वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने 'भारत माता' की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। उनके त्याग और तपस्या की वजह से आज हमारे हाथ में तिरंगा है। इस तिरंगे में हमारे संविधान के आदर्श हैं।
साथियो,
पिछले कुछ वर्षों में 'हर घर तिरंगा' अभियान ने पूरे देश को एक अद्भुत भावना से जोड़ा है। हर घर, हर गली में तिरंगे का उत्सव दिखाई देता है। इस वर्ष भी हमें 'हर घर तिरंगा' अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है। अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराना है।
साथियो,
हर वर्ष 15 अगस्त से पहले आप मुझे बहुत से विचार और सुझाव भेजते हैं। इस वर्ष भी आप अपने विचार MyGov पर जरूर साझा कीजिए। मुझे आपके सुझावों का इंतजार है।
साथियो,
'मन की बात' में आज इतना ही। अगले महीने हम फिर मिलेंगे देशवासियों की अनेक नई उपलब्धियां, और, प्रेरक प्रयासों के साथ, तब तक के लिए मुझे अनुमति दीजिए।
बहुत-बहुत धन्यवाद, नमस्कार।
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MJPS/ST/VK