Amar Ujala Ltd

09/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/21/2026 02:51

स्वर्ण बाजार: त्योहारों-शादियों के दौरान सोने की मांग बढ़ने के प्रति आशावान व्यापारी, डब्ल्यूजीसी क्या कह रहा

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स्वर्ण बाजार: त्योहारों-शादियों के दौरान सोने की मांग बढ़ने के प्रति आशावान व्यापारी, डब्ल्यूजीसी क्या कह रहा?

Mon, 21 Sep 2026 01:47 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Mon, 21 Sep 2026 01:47 PM IST
सार

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी और शादी के मौसम में सोने की मांग को लेकर व्यापारी सतर्क आशावान हैं। उच्च कीमतों और अस्थिरता के बावजूद, डिजिटल सोने और ईटीएफ में निवेश बढ़ा है, जबकि आयात घटा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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सोने-चांदी का भाव - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

आगामी त्योहारी और शादी के मौसम की वजह से आभूषणों की मांग में सुधार होने की उम्मीद है, जो स्थिर निवेश और शादी से जुड़ी हुइ खरीदारी को मजबूत करेगी। हालांकि उच्च कीमतों और अस्थिरता के बीच विवेकाधीन (सोच-समझकर) खरीदारी की जा सकती है। इसके बावजूद व्यापारी त्योहारों और शादियों के मौमस के दौरान की मांग को लेकर सतर्कतापूर्वक आशावान बने हुए हैं।

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वर्ल्ड गोल्ड कांउसिल ने भारत के स्वर्ण बाजार पर रिपोर्ट जारी कर बताया है, आगामी त्योहारी और शादी के मौसम की वजह से आभूषणों की मांग में सुधार होने की उम्मीद है, जो स्थिर निवेश और शादी से जुड़ी हुइ खरीदारी को मजबूत करेगी। हालांकि उच्च कीमतों और अस्थिरता के बीच विवेकाधीन (सोच-समझकर) खरीदारी की जा सकती है। पिछले महीने अगस्त में सोने की कीमतों तेज वृद्धि के बाद नरमी आई है। इसके बावजूद व्यापारी त्योहारों और शादियों के मौमस के दौरान की मांग को लेकर सतर्कतापूर्वक आशावान बने हुए हैं।
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अगस्त में सोने की कीमतों पर क्या असर दिखा?

अगस्त में सोने की कीमतों में लगभग तीन दशकों में सबसे मजबूत मासिक उछाल दर्ज किया गया। घरेलू सोने की कीमतें मोटे तौर पर वैश्विक रुझान के अनुरूप रहीं और महीने के दौरान 12 प्रतिशत बढ़कर 158,854 रुपये प्रति ग्राम हो गईं, हालांकि भारतीय रुपये के मामूली सुदृढ़ीकरण से इस वृद्धि पर थोड़ा असर पड़ा। फेड नीति को लेकर बदलती उम्मीदों और वैश्विक गोल्ड ईटीएफ प्रवाह में नरमी के बीच सितंबर में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों कीमतों में क्रमशः 3.9 प्रतिशत और 4.6 प्रतिशत की गिरावट आई है ।

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घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर कितना उतार-चढ़ाव?

घरेलू बाजार में सोने की कीमतें आयात समता मूल्य (किसी आयातित वस्तु के लिए खरीदार द्वारा भुगतान की जाने वाली कुल लागत) से नीचे बनी हुई हैं, जिससे पता चलता है कि मांग की तुलना में स्थानीय आपूर्ति पर्याप्त है। जुलाई में औसतन 34 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस की छूट अगस्त में बढ़कर 51 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गई और 11 सितंबर तक यह और बढ़कर 78 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गई, जिससे घरेलू कीमतें आयात समता मूल्य या बाजार मूल्य से लगभग 2 प्रतिशत नीचे आ गईं। बाजार की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि पुराने सोने के बदले नए आभूषणों के आदान-प्रदान से स्थानीय आपूर्ति बढ़ी है और घरेलू कीमतों को बाजार मूल्य से नीचे बनाए रखने में मदद मिली है। अनौपचारिक आपूर्ति की उपलब्धता को भी छूट में वृद्धि का एक कारण बताया जा रहा है।

त्योहारों को लेकर उपभोक्ता और विक्रेता दोनों सतर्क क्यों?

वर्ल्ड गोल्ड कांउसिल की अनुसंधान प्रमुख कविता चाको ने अपने नोट में बताया है, उद्योग से मिली प्रतिक्रिया से पता चलता है कि, अगस्त के अंत के शुरू हुए त्योहारी सीजन से पहले सोने के आभूषणों की मांग मजबूती आई लेकिन इस महीने की शुरुआती हफ्तों में कम हो गई है। इसकी मुख्य वजह अगस्त में सोने की कीमतों में आई तेजी और उसके बाद कीमतों गिरावट ने कई उपभोक्ताओं को असमंजस में डाल दिया है, इस उतार-चढ़ाव की वजह से उपभोक्ता अब गैर जरूरी खरीदारी को टाल रहे हैं। वे बताती हैं, दूसरी ओर खुदरा विक्रेता भी स्टॉक बढ़ाने में सतर्क नजर आ रहे हैं और मांग के अनुसार ही स्टॉक कर रहे है। वहीं कई निर्माताओं ने खुदरा विक्रेताओं द्वारा ऑर्डर लेने में देरी की भी सूचना दी है। हालांकि शादी से जुड़ी आभूषणों की मांग फिलहाल स्थिर है।

कीमतें अधिक होने से हल्के वजन के आभूषणों क्यों बन रहे पसंद?

रिपोर्ट बताती है, बाजार के ट्रेंड और कई रिपोर्ट से पता चला है कि, अब लोग हल्के वजन के आभूषणों को पसंद कर रहे हैं। क्योंकि बड़े संगठित विक्रेताओं ने इस कैटेगरी में तुलनात्मक रूप से मजबूत मांग देखी है और उन्हें नए उत्पादों को पेश किए हैं। पिछले महीने अगस्त में सोने की कीमतों तेज वृद्धि के बाद नरमी आई है। इसके बावजूद व्यापारी त्योहारों और शादियों के चरम मौमस के दौरान की मांग को लेकर सतर्कतापूर्वक आशावान बने हुए हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि फिजिकल निवेश की मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि कुछ निवेशक डिजिटल रूप में सोने की ओर रूख कर रहे है।

डिजिटल गोल्ड की ओर लोग क्यों कर रहे रुख?

रिपोर्ट के अनुसार जून से अगस्त तक डिजिटल सोने की खरीदारी स्थिर रही, जो औसतन लगभग 25 अरब रुपये (262 मिलियन अमेरिकी डॉलर) प्रति माह रही। हालांकि इस अवधि में मासिक खरीदारी लगभग स्थिर रही, लेकिन मांग पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक थी, अगस्त में खरीदारी में 110 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो डिजिटल सोने की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है। रिपोर्ट ने बताया कि मात्रा के हिसाब से, जून से अगस्त तक खरीदारी औसतन 1.6 टन प्रति माह रही।

गोल्ड ईटीएफ में खरीदारी स्थिर क्यों?

रिपोर्ट ने भारतीय म्यूचुअल फंड एसोसिएशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है, कि अगस्त में भारतीय ईटीएफ में निवेश मासित आधार पर 67 प्रतिशत बढ़कर 25.97 अरब रुपये (272 मिलियन अमेरिकी डॉलर) हो गया। मात्रा के हिसाब से, होल्डिंग्स में 1.6 टन की वृद्धि हुई, जिससे कुल ईटीएफ होल्डिंग्स 121.3 टन हो गईं , जबकि कुल एयूएम बढ़कर 1,912 अरब रुपये (लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर) हो गया। हालांकि निवेश की मात्रा पहली तिमाही में देखी गई असाधारण रूप से मजबूत स्तर से काफी कम है , लेकिन यह लगभग पूरे वर्ष सकारात्मक बनी रही है, जो पोर्टफोलियो में सोने के प्रति निवेशकों की रुचि को दर्शाती है। शुरुआती उच्च स्तर से आई यह गिरावट संभवतः समय-समय पर मुनाफावसूली और कीमतों में नरमी को दर्शाती है। बड़े प्रत्यक्ष निवेश पर लगाई गई सीमाएं भी इस मंदी का कारण हो सकती हैं।

क्या निवेशकों की भागीदारी में भी कमी आई है?

रिपोर्ट के अनुसार निवेशकों की भागीदारी में भी कमी आई है, अगस्त में लगभग 4,000 नए खाते (फोलियो) जोड़े गए, जिससे कुल फोलियो की संख्या 12.54 मिलियन हो गई, जो जनवरी से जुलाई तक की औसत मासिक वृद्धि 330,000 की तुलना में काफी कम है। इससे पता चलता है कि मौजूदा निवेशक ईटीएफ के माध्यम से सोना जमा करना जारी रखे हुए हैं, लेकिन नए निवेशकों के प्रवेश की गति धीमी हो गई है।

क्या सोने के वायाद बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट का कहना है, घरेलू बाजार में अगस्त में सोने के वायदा कारोबार में उल्लेखनीय तेजी देखी गई, जो वैश्विक सोने के बाजारों में बढ़ी गतिविधि को दर्शाती है। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर औसत दैनिक कारोबार में 38 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई और यह 295 अरब रुपये (3.1 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक है। वहीं, औसत दैनिक मात्रा में 27 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई और यह 19 टन तक पहुंच गई। कारोबार में यह वृद्धि महीने के दौरान सोने की कीमतों में आई जोरदार तेजी के साथ हुई, जिससे संभवतः हेजिंग और रणनीतिक कारोबार में वृद्धि हुई, जिससे कुल तरलता और बाजार में रुचि बढ़ी। मासिक सुधार के बावजूद, कारोबार और मात्रा जनवरी के उच्चतम स्तर से 48 प्रतिशत कम रही।

सोने के आयात की गति पर क्या अपडेट है?

रिपोर्ट कहती है, अगस्त में सोने के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो मासिक आधार पर 45 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 58 प्रतिशत की गिरावट है। आयात की कुल मात्रा 15-20 टन के बीच रहने का अनुमान है, जबकि कुल माल आयात में सोने की हिस्सेदारी घटकर 3 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 9 प्रतिशत थी। आयात में इस गिरावट से संकेत मिलता है कि मौजूदा घरेलू आपूर्ति अपेक्षित मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी। आयात में कमी आंशिक रूप से डोरे सोने की कम खेप को भी दर्शा सकती है। महीने के दौरान घरेलू सोने की कीमतें आयात समता से 1 प्रतिशत से अधिक की छूट पर कारोबार कर रही थीं, और चूंकि डोरे सोने के आयात पर बुलियन की तुलना में 0.65 प्रतिशत का शुल्क लाभ मिलता है, इसलिए संभवतः इस छूट ने आयातित डोरे सोने को स्थानीय शोधकों के लिए आर्थिक रूप से कम आकर्षक बना दिया।

Amar Ujala Ltd published this content on September 21, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 21, 2026 at 08:51 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]