07/26/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/25/2026 18:38
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लॉगिन करेंशिक्षा मंत्रालय (पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के मंत्रियों का विवादों से पुराना नाता रहा है। 1965 से 2026 तक यूपीए से लेकर मोदी सरकार के कार्यकाल में कई शिक्षा मंत्री अपने नीतिगत फैसलों, बयानों और डिग्री से जुड़े मुद्दों के कारण सुर्खियों में रहे। धर्मेंद्र प्रधान के पद गंवाने की वजह चार बड़े विवाद बने। इनमें नीट पेपर लीक, स्कूलों में त्रिभाषा नीति के तहत हिंदी को लेकर विवाद, एनसीईआरटी की इतिहास की किताबों में बदलाव, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और आपातकाल (इमरजेंसी) से जुड़े विषयों को शामिल करना तथा यूजीसी रेग्यूलेशन-2025 प्रमुख रहे। इन मुद्दों के चलते धर्मेंद्र प्रधान छात्र संगठनों, शिक्षकों और विपक्ष के सीधे निशाने पर रहे।
| वर्ष | केंद्रीय शिक्षा मंत्री | प्रमुख विवाद |
| 1965 | एम.सी. चागला | हिंदी विरोधी आंदोलन |
| 1967 | त्रिगुण सेन | क्षेत्रीय भाषा विवाद |
| 1990 | वी.पी. सिंह | मंडल आयोग और आरक्षण |
| 2002 | मुरली मनोहर जोशी | एनसीईआरटी के 'भगवाकरण' का विवाद |
| 2006 | अर्जुन सिंह | ओबीसी आरक्षण का विरोध |
| 2013-14 | कपिल सिब्बल | चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम |
| 2014 | स्मृति ईरानी | चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम |
| 2016 | स्मृति ईरानी | रोहित वेमुला, जेएनयू और इलाहाबाद विश्वविद्यालय विवाद |
| 2020 | रमेश पोखरियाल | नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) |
| 2024-26 | धर्मेंद्र प्रधान | नीट परीक्षा में गड़बड़ी, नीट पेपर लीक, एनसीईआरटी की किताबों पर विवाद और त्रिभाषा नीति |