Amar Ujala Ltd

09/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/23/2026 18:43

भू-राजनीतिक तनाव बेअसर: भारत की अर्थव्यवस्था का दमदार प्रदर्शन: विकास दर 7.1% तक पहुंचने का अनुमान

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भू-राजनीतिक तनाव बेअसर: भारत की अर्थव्यवस्था का दमदार प्रदर्शन: विकास दर 7.1% तक पहुंचने का अनुमान

Thu, 24 Sep 2026 06:02 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 24 Sep 2026 06:02 AM IST
सार

वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का भरोसा बढ़ा है। पहली तिमाही में 7.8% की उम्मीद से बेहतर जीडीपी वृद्धि, मजबूत घरेलू मांग, निवेश, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात के आधार पर ओईसीडी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने शानदार मजबूती दिखाई है। इसी का परिणाम है कि मूडीज के बाद अब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स, फिच रेटिंग्स, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी तक कर दिया है। इससे पहले मूडीज रेटिंग्स ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धिदर का अनुमान बढ़ाकर 7% किया था।

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पहली तिमाही के बेहतर प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा
एजेंसियों ने अनुमान बढ़ाने के पीछे पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक वृद्धि, मजबूत घरेलू मांग, निवेश, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात को प्रमुख कारण बताया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी दर उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रहने के बाद वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति भरोसा और पुख्ता हुआ है।
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जी-20 में सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था रहने का अनुमान
एजेंसियों के मुताबिक, बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड सरकारी खर्च, घरेलू मांग और लचीले निर्यात तंत्र के दम पर भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख जी-20 अर्थव्यवस्था बना रहेगा। हालांकि, कई एजेंसियों ने आगे चलकर इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ने की आशंका भी जताई। एजेंसी
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ओईसीडी : सर्वाधिक वृद्धि का भरोसा
आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 0.80 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में सबसे अधिक है। इससे पहले जून में ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। हालांकि, संगठन ने कहा कि हालिया मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बावजूद कम क्रय शक्ति होने से इस साल की दूसरी छमाही में भारत की वृद्धि प्रभावित होने की आशंका है। इसके बाद 2027 में धीरे-धीरे सुधार होने का अनुमान है।

एडीबी : मजबूत निवेश मांग और विनिर्माण से मजबूती के आसार
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में लगाए गए 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया, जो 0.4% की बढ़ोतरी दर्शाता है। अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की उम्मीद से बेहतर वृद्धि, मजबूत निवेश मांग, टिकाऊ खपत और विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की मजबूती इसके प्रमुख कारण रहे। एडीबी ने अगले वित्त वर्ष में 7.1% वृद्धि का अनुमान लगाया है। महंगाई का अनुमान भी 5.2% से घटाकर 5% किया है।

एडीबी ने फिर बढ़ाया विकास दर का अनुमान
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में लगाए गए 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया, जो 0.4% की बढ़ोतरी दर्शाता है। अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की उम्मीद से बेहतर वृद्धि, मजबूत निवेश मांग, टिकाऊ खपत और विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की मजबूती इसके प्रमुख कारण रहे। एडीबी ने अगले वित्त वर्ष में 7.1% वृद्धि का अनुमान लगाया है। महंगाई का अनुमान भी 5.2% से घटाकर 5% किया है।

मजबूत घरेलू खपत बनी अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत
भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से निर्यात पर कम और घरेलू खपत पर अधिक निर्भर है। खुदरा महंगाई के नियंत्रण में रहने और ईंधन की कीमतों के सीमित असर के कारण मध्यम वर्ग और परिवारों की क्रय शक्ति सुरक्षित रही है, जिससे कारों, आवास और रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की मांग लगातार बनी हुई है।

निवेश का बढ़ता दायरा
सरकारी पूंजीगत व्यय और निजी निवेश में तेजी देखने को मिल रही है। फिच के अनुसार, इस वित्त वर्ष में निवेश में 10% से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है, और जुलाई तक गैर-खाद्य ऋण वृद्धि 19% तक पहुंच गई है।

बाहरी झटकों को झेलने की क्षमता बढ़ी
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापारिक दबाव और खाड़ी संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस तरह खुद को संभाला है, उससे वैश्विक एजेंसियों का भरोसा काफी बढ़ा है। जून तिमाही के आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब बाहरी झटकों का मुकाबला करने में अधिक सक्षम है।

एसएंडपी और फिच : 0.25% बढ़ सकती है ब्याज दर
एसएंडपी और फिच ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 7 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत किया है। दोनों एजेंसियों ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव आरबीआई को चालू वित्त वर्ष में नीतिगत ब्याज दर कम से कम 0.25 प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है। एसएंडपी ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई औसतन 5.1% रहने का अनुमान लगाया है और इस दौरान आरबीआई की नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना जताई है। फिच ने भी अक्तूबर की मौद्रिक नीति बैठक में 0.25 प्रतिशत दर बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 24, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 24, 2026 at 00:43 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]