Amar Ujala Ltd

09/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/01/2026 06:48

जीडीपी के आंकड़े: भारत की आर्थिक रफ्तार पर संदेह क्यों? जानकार बोले- बिना ठोस सबूत के निराशावाद फैलाना गलत

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जीडीपी के आंकड़े: भारत की आर्थिक रफ्तार पर संदेह क्यों? जानकार बोले- बिना ठोस सबूत के निराशावाद फैलाना गलत

Tue, 01 Sep 2026 05:51 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 01 Sep 2026 05:51 PM IST
सार

क्या भारत की 7.8% जीडीपी विकास दर पर कोई संदेह है? यह असली है या महज आंकड़ों का उलटफेर? इस बारे में जानकारों की क्या राय है, आइए समझते हैं विस्तार से।

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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

भारत की आर्थिक विकास दर के ताजा आंकड़ों ने देश के नीतिगत गलियारों में फिर बहस छेड़ दी है। सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की यह रफ्तार उम्मीद से अधिक रही है। इस मजबूत वृद्धि दर ने न केवल रिजर्व बैंक के सात प्रतिशत के अनुमान को पीछे छोड़ा है, बल्कि भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी बनाए रखा है। हालांकि, इन आंकड़ों के आते ही आर्थिक विशेषज्ञों और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है।

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भारत की जीडीपी ग्रोथ के ताजा आंकड़े क्या कहते हैं?

ताजा आंकड़ों में सबसे सकारात्मक संकेत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से मिला है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के अनुसार, पहली तिमाही में इसमें 9.2 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि पिछले वर्षों की निरंतरता को दर्शाती है, जब वित्त वर्ष 2024 में 12.7%, वित्त वर्ष 2025 में 9.3% और वित्त वर्ष 2026 में 10.7% की ग्रोथ देखी गई थी। हालांकि, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इन आंकड़ों को सांख्यिकीय कसरत (स्टैटिस्टिकल जिमनास्टिक्स) करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि नॉमिनल और रियल जीडीपी के बीच का अंतर केवल 2.3 प्रतिशत दिखाया गया है, जो वास्तविक महंगाई से काफी कम है। उन्होंने दावा किया कि यदि ईमानदार आंकड़े दिए जाएं, तो वास्तविक वृद्धि बहुत कम होगी।

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भरोसेमंद आशावाद और चीयरलीडिंग में क्या अंतर है?

आंकड़ों पर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यन ने विकास दर पर संदेह जताने वालों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों पर आधारित भरोसेमंद आशावाद (क्रेडिबल ऑप्टीमिज्म) को चियरलीडिंग नहीं कहा जा सकता। सुब्रमण्यन के अनुसार, बिना सबूत के सिर्फ आशावान होना हवाई सोच है, लेकिन बिना किसी ठोस साक्ष्य के लगातार निराशावाद फैलाना भी कोई बौद्धिक चतुराई या समझदारी नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पांच साल पहले उन्होंने इस दशक में भारत की विकास दर सात प्रतिशत से अधिक रहने की भविष्यवाणी की थी, जो सच साबित हो रही है।

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वैश्विक संस्थाओं और आलोचकों के अनुमान क्यों गलत साबित हुए?

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आईएमएफ जैसी वैश्विक संस्थाओं और कुछ अर्थशास्त्रियों पर भारत की प्रगति को लगातार कम आंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2024 से 2027 के लिए क्रमशः 6.6%, 6.3%, 6.2% और 6.1% की ग्रोथ का अनुमान लगाया था, जो वास्तविक दर से काफी कम रहे। सुब्रमण्यन के अनुसार, जब पूर्वानुमानों में गलतियां लगातार एक ही दिशा में हो रही हों, तो संस्थाओं को अपने तौर-तरीकों की समीक्षा करनी चाहिए।

क्या जीडीपी के आंकड़ों में वाकई कोई बड़ी गड़बड़ी है?

कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की जीडीपी विकास दर को हर साल लगभग 2.7 प्रतिशत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। कृष्णमूर्ति ने गणितीय विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि विकास दर को सालाना 2.7 प्रतिशत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया होता, तो 14 वर्षों में वास्तविक जीडीपी और घोषित जीडीपी के बीच 74.7 प्रतिशत का भारी अंतर आ जाता। जबकि भारत के जीडीपी आंकड़ों में बाद में किया गया संशोधन केवल तीन प्रतिशत के आसपास रहा है, जो कि अरविंद सुब्रमण्यन के दावों से बहुत कम है। उन्होंने साफ किया कि देश को अंध-आशावाद या आत्मसंतुष्टि की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हमें पुरानी संकीर्ण सोच का कैदी भी नहीं बने रहना चाहिए।

Amar Ujala Ltd published this content on September 01, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 01, 2026 at 12:49 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]