04/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/01/2026 05:40
सरकार ने राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (एनसीआरएमपी) को इस समग्र उद्देश्य के साथ स्वीकृति दी थी कि चक्रवात-प्रभावित राज्यों में तटीय इकोसिस्टम के संरक्षण के साथ तालमेल रखते हुए चक्रवातों के प्रति संवेदनशीलता को कम करने और लोगों तथा अवसंरचना को आपदा-रोधी बनाने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया जा सके। एनसीआरएमपी को आठ तटीय राज्यों में दो चरणों में लागू किया गया। एनसीआरएमपी के प्रथम चरण को जनवरी 2011 में आंध्र प्रदेश और ओडिशा राज्यों के लिए स्वीकृत किया गया था, जिसे दिसम्बर 2018 में पूरा किया गया। एनसीआरएमपी के द्वितीय चरण को जुलाई 2015 में गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल राज्यों के लिए स्वीकृत किया गया था, जिसे मार्च 2023 में पूरा किया गया। परियोजना के मुख्य घटक थे- प्रारंभिक चेतावनी प्रसार प्रणाली; चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण अवसंरचना जैसे बहुउद्देश्यीय चक्रवात आश्रय, निकासी/पहुंच मार्ग/पुल, लवणीय तटबंध और भूमिगत केबलिंग; बहु-आपदा जोखिम प्रबंधन हेतु तकनीकी सहायता एवं क्षमता निर्माण; तथा परियोजना प्रबंधन और कार्यान्वयन सहायता।
परियोजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता प्रसार के माध्यम अपनाए गए। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए केन्द्र स्तर पर एक प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट स्थापित की गई। इसी प्रकार, राज्यों ने भी राज्य स्तर पर परियोजना के विभिन्न घटकों के कार्यान्वयन एवं निगरानी तथा केन्द्र के साथ बेहतर समन्वय के लिए समान व्यवस्था अपनाई।
यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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