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08/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/01/2026 08:35

EV: क्या जलभराव में पेट्रोल-डीजल कारों से बेहतर साबित हो सकती हैं ईवी? जानें क्या कहते हैं ऑटो एक्सपर्ट्स

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EV: क्या जलभराव में पेट्रोल-डीजल कारों से बेहतर साबित हो सकती हैं ईवी? जानें ऑटो एक्सपर्ट्स की राय

Sat, 01 Aug 2026 06:20 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 01 Aug 2026 06:20 PM IST
सार

भारत में मानसून के मौसम में जब भी शहरों में जलभराव होता है, तो सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगते हैं। पानी में डूबी ईवी के वीडियो अक्सर बिजली के झटके या बैटरी में विस्फोट के डर को बढ़ा देते हैं, जिससे इस गलतफहमी को बढ़ावा मिलता है कि पानी और इलेक्ट्रिक कारें एक साथ नहीं चल सकतीं। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि यह सोच भ्रामक और गलत है। जानें क्या है ईवी के पीछे की इंजीनियरिंग।

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EV In Flooded Road - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारत में हर साल मानसून के दौरान शहरी इलाकों में जलभराव एक बड़ी समस्या बनकर सामने आता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठते हैं। अक्सर सोशल मीडिया पर पानी में डूबी इलेक्ट्रिक कारों के वीडियो देखकर यह धारणा बन जाती है कि ईवी में करंट लग सकता है या बैटरी फट सकती है। हालांकि, ऑटोमोबाइल इंजीनियरों का कहना है कि यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। उनके अनुसार, कई परिस्थितियों में इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल और डीजल कारों की तुलना में जलभराव का बेहतर सामना कर सकती हैं।

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बाढ़ के समय इलेक्ट्रिक कारों को लेकर सबसे बड़ा भ्रम क्या है?

जलभराव के दौरान अक्सर यह माना जाता है कि इलेक्ट्रिक कार और पानी का मेल खतरनाक होता है।

लोगों के मन में बनी आम धारणाएं

  • पानी में EV जाने पर करंट लग सकता है।

  • बैटरी फटने या आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

  • पानी में डूबते ही इलेक्ट्रिक कार सबसे पहले खराब हो जाती है।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये धारणाएं वास्तविक इंजीनियरिंग और सुरक्षा तकनीक को पूरी तरह नहीं दर्शातीं।

पेट्रोल और डीजल कारें बाढ़ में ज्यादा जोखिम में क्यों होती हैं?

पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की सबसे बड़ी कमजोरी उनका इंजन होता है, जो दहन के लिए हवा पर निर्भर करता है।

जलभराव में क्या समस्या हो सकती है?

  • अगर पानी इंजन के एयर इनटेक तक पहुंच जाता है, तो हाइड्रोलॉक (Hydrolock) की स्थिति बन सकती है।

  • पानी संपीड़ित (कंप्रेस) नहीं होता, इसलिए इंजन के अंदर गंभीर नुकसान हो सकता है।

  • इससे कनेक्टिंग रॉड मुड़ सकती है।

  • इंजन ब्लॉक में दरार आ सकती है।

  • मरम्मत पर भारी खर्च आ सकता है।

इसी वजह से बीमा कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल वाहनों में बाढ़ से होने वाले नुकसान को सबसे महंगे दावों में शामिल करती हैं।


इलेक्ट्रिक कारें इस मामले में अलग कैसे हैं?

इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक दहन इंजन नहीं होता, इसलिए उनमें हाइड्रोलॉक जैसी समस्या नहीं आती।

ईवी की प्रमुख विशेषताएं

  • इनमें कंब्शन इंजन नहीं होता।

  • वाहन सीलबंद इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है।

  • मोटर को लिथियम-आयन बैटरी से ऊर्जा मिलती है।

हालांकि अगर वाहन लंबे समय तक पानी में डूबा रहे तो नुकसान हो सकता है। लेकिन उसे वही इंजन संबंधी गंभीर क्षति नहीं होती, जो पेट्रोल या डीजल कारों में देखने को मिलती है।

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इलेक्ट्रिक कारों को पानी से सुरक्षित रखने के लिए कौन-सी तकनीक इस्तेमाल की जाती है?

आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों को पानी के संपर्क को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाता है।

सुरक्षा के लिए अपनाए गए प्रमुख उपाय

  • बैटरी पैक मजबूत एल्यूमिनियम या स्टील के आवरण में बंद रहता है।

  • हाई-वोल्टेज केबल पूरी तरह इंसुलेटेड और नमी से सुरक्षित होती हैं।

  • कई निर्माता अंतरराष्ट्रीय वॉटरप्रूफिंग मानक का पालन करते हैं।

  • बैटरी सिस्टम को नियंत्रित परिस्थितियों में कुछ समय तक पानी का सामना करने लायक बनाया जाता है।

  • एडवांस्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) लगातार इलेक्ट्रिकल पैरामीटर की निगरानी करता है।

  • किसी असामान्य स्थिति में हाई-वोल्टेज बैटरी को तुरंत डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। जिससे करंट लगने का खतरा काफी कम हो जाता है।


क्या इसका मतलब है कि EV पूरी तरह बाढ़ प्रूफ हैं?

इसका जवाब है नहीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी वाहन पूरी तरह बाढ़-रोधी नहीं होता।

किन हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है?

  • इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम।

  • सस्पेंशन से जुड़े हिस्से।

  • अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स।

इसीलिए यदि कोई वाहन जलभराव से गुजरता है, तो सामान्य उपयोग शुरू करने से पहले उसकी जांच कराना जरूरी माना जाता है। यह सलाह इलेक्ट्रिक और पारंपरिक दोनों तरह के वाहनों पर लागू होती है।

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भारत में यह चर्चा क्यों महत्वपूर्ण होती जा रही है?

देश में लगातार बदलते मौसम और तेज बारिश के कारण कई शहरों में जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

इसकी वजहें

  • भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव बढ़ रहा है।

  • शहरी ड्रेनेज सिस्टम कई बार पर्याप्त साबित नहीं हो रहे।

  • भारत में अब 80 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं।

  • ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ईवी का प्रदर्शन संभावित खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है।


दुनिया के दूसरे देशों का अनुभव क्या बताता है?

रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग अधिक है, वहां भी इनका प्रदर्शन बेहतर देखा गया है।

किन देशों का उल्लेख किया गया?

  • नॉर्वे

  • चीन

इन देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों ने भारी बारिश और कठिन मौसम की परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन किया है।

हालांकि, लंबे समय तक पूरी तरह पानी में डूबे रहने के बाद लिथियम-आयन बैटरी में आग लगने की कुछ अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार ये मामले बेहद दुर्लभ हैं और सामान्य शहरी जलभराव जैसी परिस्थितियों से अलग हैं।

बाढ़ के दौरान वाहन चलाते समय सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, चाहे वाहन पेट्रोल, डीजल या इलेक्ट्रिक हो, सबसे सुरक्षित उपाय जलभराव वाले रास्तों से बचना है।

ड्राइवरों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • जहां तक संभव हो, पानी भरी सड़क से वाहन न निकालें।

  • पानी के भीतर छिपे खतरे किसी भी वाहन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • वाहन निर्माता द्वारा तय की गई पानी में चलने की सीमा का पालन करें।

  • जलभराव से निकलने के बाद वाहन की जांच जरूर कराएं।


क्या बदल रही है लोगों की सोच?

जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की इंजीनियरिंग और सुरक्षा तकनीकों को लेकर जानकारी बढ़ रही है, वैसे-वैसे उनसे जुड़े कई भ्रम भी दूर हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिस वाहन को लोग अक्सर बाढ़ में सबसे ज्यादा जोखिम वाला मानते हैं। वही कई परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल कारों की तुलना में जलभराव का बेहतर सामना करने में सक्षम हो सकता है।

Amar Ujala Ltd published this content on August 01, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 01, 2026 at 14:35 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]