10/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/01/2026 10:12
दिल्ली नई ईवी नीति का असर: शुरुआती तीन महीनों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन कितने बढ़े
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दिल्ली नई ईवी नीति का असर: शुरुआती तीन महीनों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन कितने बढ़े?
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 01 Oct 2026 09:25 PM IST
सार
दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू होने के शुरुआती तीन महीनों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जानें नई ईवी नीति से क्या बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
एक जुलाई को लागू हुई दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति ने अपने शुरुआती तीन महीनों (जुलाई-सितंबर तिमाही) के भीतर ही ऑटो बाजार में सकारात्मक असर दिखाना शुरू कर दिया है। अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में जुलाई-सितंबर के दौरान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (2W) के पंजीकरण में 30% का उछाल दर्ज किया गया है।
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इलेक्ट्रिक वाहनों के अपनाव में अन्य सेगमेंट का प्रदर्शन कुछ ऐसा रहा:
4-व्हीलर गुड्स व्हीकल (मालवाहक): पंजीकरण में सबसे ज्यादा 83% की भारी वृद्धि दर्ज की गई।
इलेक्ट्रिक कारें (4W): रजिस्ट्रेशन में 27% की बढ़त देखी गई।
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (3W): रजिस्ट्रेशन में 18% की वृद्धि हुई।
सब्सिडी आवेदन: अब तक दिल्ली ईवी सब्सिडी पोर्टल के माध्यम से 6,225 लोगों ने सब्सिडी के लिए आवेदन किया है।
दिल्ली सरकार की ईवी नीति 2030 का मुख्य लक्ष्य क्या है और खरीदारों को क्या वित्तीय प्रोत्साहन मिल रहे हैं?
इस नीति का मुख्य लक्ष्य 2030 तक दिल्ली के कुल वाहन बेड़े का कम से कम 30% विद्युतीकरण करना है। चूंकि दोपहिया वाहन दिल्ली के कुल बेड़े का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं, इसलिए नीति में इस वर्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है। नीति के तहत अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल/डीजल (ICE) टू-व्हीलर के पंजीकरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
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इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाली सब्सिडी स्कीम (एक्स-शोरूम कीमत ₹2.25 लाख तक):
पहला वर्ष: ₹10,000 प्रति kWh की सब्सिडी (अधिकतम ₹30,000 की सीमा के साथ)।
दूसरा वर्ष: ₹6,600 प्रति kWh की सब्सिडी (अधिकतम ₹20,000 तक)।
तीसरा वर्ष: ₹3,300 प्रति kWh की सब्सिडी (अधिकतम ₹10,000 तक)।
चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
ईवी उपयोगकर्ताओं की 'रेंज एंग्जाइटी' (चार्ज खत्म होने का डर) को खत्म करने के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है।
साइट्स का चयन व मंजूरी: राजस्व विभाग और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के माध्यम से कुल 505 स्थलों (Sites) की पहचान की गई थी। इनमें से भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने 382 साइट्स को मंजूरी दे दी है।
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सेगमेंट-वाइज री-असेसमेंट: पिछले 90 दिनों में इन 382 साइट्स का टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और फोर-व्हीलर के हिसाब से अलग-अलग मूल्यांकन पूरा कर लिया गया है।
नोडल एजेंसी: दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL) को चार्जिंग व बैटरी-स्वैपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की योजना, समन्वय और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
चार्जिंग स्टेशनों के टेंडर और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए क्या नई प्रगति हुई है?
ईवी नीति पर गठित जीओएम के अध्यक्ष और बिजली मंत्री आशीष सूद के अनुसार, "सच्ची ईवी क्रांति केवल अल्पकालिक वित्तीय सब्सिडी पर निर्भर नहीं रह सकती; इसके लिए मजबूत, विश्वसनीय और सेगमेंट-स्पेसिफिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।"
सरकार ने वैश्विक परामर्शदाता फर्म KPMG (केपीएमजी) को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के रूप में अपने साथ जोड़ा है। केपीएमजी के ऑनबोर्ड आने के बाद साइट्स का व्यापक मूल्यांकन पूरा हो चुका है। सरकार जल्द ही उच्च-तैयारी वाली पहली किश्त के तहत 160 से 180 चार्जिंग साइट्स के लिए तुरंत टेंडर जारी करने जा रही है।
Amar Ujala Ltd published this content on October 01, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 01, 2026 at 16:12 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]