गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में लाभ और हानि के बीच उतार-चढ़ाव बना रहा। यह स्थिति अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद बनी। फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, कई नीति निर्माताओं ने इस साल के अंत में ब्याज दर में वृद्धि का संकेत दिया है। इस घोषणा का असर बाजार की चाल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
बाजार में आईटी क्षेत्र के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में उत्साह रहा। इसके विपरीत, रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में गिरावट देखने को मिली, जिससे इस सेक्टर के निवेशक चिंतित दिखे। भारतीय इक्विटी बाजारों ने दिन की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ की थी। शुरुआती कारोबार में बाजार ने अपनी ऊपर की गति को सफलतापूर्वक बनाए रखा। भारतीय रुपये में कमजोर स्तरों से सुधार आया, जिससे बाजार को अतिरिक्त सहारा मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की शॉर्ट कवरिंग ने भी बाजार की समग्र धारणा को बेहतर बनाया। विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में निफ्टी एक प्रमुख प्रतिरोध क्षेत्र की ओर बढ़ सकता है। यह क्षेत्र 24,500 से 24,600 अंकों के बीच स्थित है। यह स्तर मौजूदा महीने के उच्च और अप्रैल 2026 के शिखर के संगम से चिह्नित है। सेंसेक्स 77,643.80 अंक पर -10.80 अंक (-0.01 फीसदी) की मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी ने 24,260.15 अंक पर 9.96 अंक (0.04 फीसदी) की मामूली बढ़त हासिल की।
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वैश्विक बाजारों पर क्या रहा असर?
गुरुवार को वैश्विक शेयर बाजारों में भी मिश्रित रुझान दर्ज किया गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ा। टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:42 बजे तक S&P 500 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की वृद्धि देखी गई। जापान का Topix सूचकांक 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 सूचकांक भी 0.5 फीसदी नीचे आया। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक लगभग अपरिवर्तित रहा, उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। वहीं, यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में 0.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इन वैश्विक संकेतों ने भारतीय बाजार के उतार-चढ़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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भारतीय बाजार को किन कारकों से मिला सहारा?
भारतीय इक्विटी बाजारों ने दिन की शुरुआत काफी मजबूत स्थिति के साथ की थी। बाजार ने शुरुआती घंटों में अपनी ऊपर की गति को सफलतापूर्वक बनाए रखा। इस सकारात्मक रुझान के पीछे कई प्रमुख कारक जिम्मेदार थे। भारतीय रुपये में कमजोर स्तरों से सुधार देखने को मिला। रुपये की मजबूती ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने में मदद की। इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा शॉर्ट कवरिंग की गई। शॉर्ट कवरिंग से बाजार में खरीदारी का दबाव बढ़ा और नकारात्मकता कम हुई। इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार की समग्र धारणा को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
निफ्टी के लिए आगे क्या हैं विश्लेषकों के अनुमान?
बाजार विश्लेषकों ने निफ्टी के लिए निकट अवधि के अनुमान जारी किए हैं। उनका मानना है कि निफ्टी सूचकांक आगे बढ़कर एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र की ओर बढ़ सकता है। यह प्रमुख प्रतिरोध क्षेत्र 24,500 से 24,600 अंकों के बीच स्थित है। यह स्तर मौजूदा महीने के उच्च बिंदु को दर्शाता है, जो बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है। साथ ही, यह अप्रैल 2026 के शिखर के साथ भी मेल खाता है, जो एक ऐतिहासिक उच्च स्तर है। इन दोनों स्तरों का संगम निफ्टी के लिए एक मजबूत बाधा बन सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, इस क्षेत्र को सफलतापूर्वक पार करना निफ्टी के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी और आगे की दिशा तय करेगा।