09/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/09/2026 11:22
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
प्रविष्टि तिथि: 09 SEP 2026 6:52PM by PIB Delhi
शिक्षा और नवाचार उन व्यक्तियों के लिए नए मार्ग खोल सकते हैं, जिनमें सीखने और उत्कृष्टता प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प हो। समय पर मिलने वाली फेलोशिप सहायता से शोधार्थियों को उन्नत शोध करने और अपने ज्ञान को सार्थक पेशेवर उपलब्धि में बदलने के लिए आवश्यक स्थिरता और संसाधन उपलब्ध होते हैं।
फेलोशिप सहायता के प्रभाव को दर्शाते हुए, अनुसूचित जाति समुदाय के 36 वर्षीय शोधार्थी डॉ. पंचानन दास ने रिमोट सेंसिंग और जीआईएस में सफलतापूर्वक पीएच.डी. पूरी की और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। उनकी यात्रा दृढ़ता, निरंतर सीखने और शैक्षणिक तथा पेशेवर उन्नति में संस्थागत सहायता की भूमिका को दर्शाती है।
डॉ. दास एक ऐसे ग्रामीण परिवार में पले-बढ़े, जहां शिक्षा और कड़ी मेहनत को महत्व दिया जाता था। उनके पिता दिहाड़ी मज़दूर के तौर पर काम करके अपने परिवार की शिक्षा और घर-गृहस्थी की ज़रूरतों को पूरा करते थे। अपने परिवार के संघर्ष और दृढ़ता से प्रेरित होकर, डॉ. दास ज्ञान अर्जित करने, विशेष कौशल विकसित करने और अपने परिवार के लिए बेहतर अवसर सृजित करने पर ध्यान केंद्रित करते रहे।
अपनी पढ़ाई के दौरान, उन्हें उच्च शिक्षा, शोध कार्यों और तकनीकी संसाधनों में होने वाले खर्चों की व्यवस्था करनी पड़ती थी। अपनी पीएच.डी. के दौरान फेलोशिप प्राप्त करने में हुई देरी से उन पर दबाव बढ़ा और उनकी पढ़ाई तथा शोध कार्य में निरंतरता बनाए रखना अधिक कठिन हो गया।
ग्रामीण इलाके में पले-बढ़े होने के कारण, बेहतर शिक्षा सुविधाओं, प्रोफेशनल अनुभव और आधुनिक तकनीक तक उनकी अपेक्षाकृत सीमित पहुंच थी। जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जियोएआई जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन और उद्योग नेटवर्क के अवसर आसानी से उपलब्ध नहीं थे।
इन परिस्थितियों के बावजूद, डॉ. दास अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहे। उन्होंने स्वयं से सीखने, शोध करने और लगातार कोशिशों के ज़रिए अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाया और इसके साथ ही उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल ज़रूरतों के साथ-साथ पारिवारिक ज़िम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया।
इस योजना से उन्हें अपनी उच्च शिक्षा और शोध के दौरान वित्तीय, शैक्षणिक और फेलोशिप सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता से उन्हें अपनी पीएच.डी. जारी रखने, शोध-संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियोएआई तथा सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपने तकनीकी कौशल को बढ़ाने में मदद मिली।
प्राप्त सहायता और अपनी सतत् मेहनत से, डॉ. दास ने रिमोट सेंसिंग और जीआईएस में अपनी पीएच.डी. सफलतापूर्वक पूरी की। वे वर्तमान में अनचार्टेड एआई के साथ मैपिंग और जीआईएस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और जियोएआई विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर रहे हैं, जहां वे जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, लिडार और रूट ऑप्टिमाइज़ेशन से जुड़ी परियोजनाओं में योगदान दे रहे हैं।
अपनी नौकरी की वजह से वे आर्थिक रूप से स्थिर हो पाए और अपने परिवार की मदद करने के साथ ही एक विशिष्ट प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आगे भी बढ़ पाए। ग्रामीण शैक्षणिक परिवेश से जियोएआई में करियर बनाने का उनका सफ़र दिखाता है कि कैसे शिक्षा और उपयुक्त संस्थागत सहायता से प्रोफेशनल अवसर बढ़ते हैं।
भविष्य में, डॉ. दास जियोएआई और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में अपनी विशेषज्ञता को और विकसित करना चाहते हैं। इसके साथ ही, उनका लक्ष्य रिमोट सेंसिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और जियोस्पेशियल एनालिटिक्स के क्षेत्र में लोगों पर केंद्रित तकनीकी समाधानों के ज़रिए अनुसंधान और नवाचार में योगदान देना है, ताकि व्यापक जन-हित हो सके।
डॉ. पंचानन दास का सफ़र शिक्षा, फ़ेलोशिप से मिलने वाली मदद और लगातार निरंतर कौशल विकास की बदलाव लाने वाली भूमिका को दर्शाता है। उनकी उपलब्धि महत्वाकांक्षा और दृढ़ता की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जिसे संस्थागत सहयोग और प्रोफेशनल अवसरों से और मज़बूती मिली है।
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पीके/केसी/एमके/एसएस
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