Amar Ujala Ltd

09/28/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/27/2026 19:09

लता मंगेशकर जयंती: अभिनय में थी दिलचस्पी, पांच वर्ष की उम्र में रंगमंच पर आईं, कैसे गायिका बनीं स्वर कोकिला

{"_id":"6ab8b30aae809dd4d50c6ca2","slug":"lata-mangeshkar-birth-anniversary-know-about-late-singer-swar-kokila-life-songs-and-unknown-facts-2026-09-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लता मंगेशकर जयंती: अभिनय में थी दिलचस्पी, पांच वर्ष की उम्र में रंगमंच पर आईं, कैसे गायिका बनीं स्वर कोकिला?","category":{"title":"Entertainment","title_hn":"मनोरंजन","slug":"entertainment"}}

लता मंगेशकर जयंती: अभिनय में थी दिलचस्पी, पांच वर्ष की उम्र में रंगमंच पर आईं, कैसे गायिका बनीं स्वर कोकिला?

Mon, 28 Sep 2026 05:50 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Mon, 28 Sep 2026 05:50 AM IST
सार

Lata Mangeshkar Birth Anniversary: स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की आज 28 सितंबर को जयंती है। वे इस दुनिया में नहीं हैं। मगर, उनकी सुरीली आवाज सदियों तक धरा पर गूंजेगी। जन्मतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़े कुछ किस्से

विज्ञापन
लता मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला
  • Link Copied

विस्तार

स्वर कोकिला लता मंगेशकर अगर आज हमारे बीच होतीं तो अपना 97वां जन्मदिन मना रही होतीं। भले ही सशरीर वे आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज आज भी हमारे मन को तर करती है। उनके गाए गीतों के सहारे प्रशंसक हर पल उन्हें अपने करीब महसूस करते हैं। दिवंगत लता मंगेशकर की आवाज ही उनकी पहचान बन गई और यह सदा बनी रहेगी। सुरीला कंठ उन्हें कुदरती रूप से उपहार में मिला था। लेकिन, हैरानी की बात है कि उन्होंने शुरुआत अभिनय से की थी। जयंती पर जानिए उनसे जुड़े किस्से

विज्ञापन
लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया

बचपन में हेमा रखा गया था नाम
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल मंगेशकर के घर हुआ था। लता जी की मां का नाम श्रीमती माई था। जन्म के समय लता जी का नाम हेमा रखा गया था, लेकिन कुछ समय बाद उनके पिता ने थिएटर के कैरेक्टर लतिका के नाम पर उनका नाम लता रख दिया। लता जी के पिता ने अपने गांव मंगेशी के नाम पर अपना उपनाम मंगेशकर रखा था। इनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे। संगीत लता दीदी को विरासत में मिला। अभिनय में भी उनकी दिलचस्पी थी और लता ने पांच साल की छोटी उम्र में पहली बार एक नाटक में अभिनय किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
लता मंगेशकर - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic

फिल्मों में साइड रोल किए
लता मंगेशकर के ऊपर बहुत कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां आ गई थीं। दरअसल, लता जी जब सिर्फ 13 वर्ष की थीं, तभी उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया था। इसके बाद उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। 14 वर्ष की उम्र में लता फिल्मों में हीरो या हीरोइन की बहन का रोल अदा किया करती थीं पर साथ ही उन्होंने संगीत की शिक्षा भी जारी रखी। फिर, गायिकी का सफर जो शुरू हुआ तो वे एक बड़ी शख्सियत बनकर उभरीं और इतनी बड़ी कि युगों-युगों तक जमाना उन्हें याद करेगा।

विज्ञापन
लता मंगेशकर - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic

कितनी थी लता मंगेशकर की पहली आमदनी?
गायिकी के सफर की बात करें तो लता मंगेशकर ने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही फिल्म 'पहिली मंगलागौर' से डेब्यू किया था। लता मंगेशकर की पहली कमाई 25 रुपये थी। उन्होंने 1942 में मराठी फिल्म 'किती हसाल' के लिए गाना गाया था। लता मंगेशकर को पहचान फिल्म महल के गाने 'आएगा आने वाला' से मिली थी। लता मंगेशकर ने दुनियाभर की 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गाना गाए।

लता मंगेशकर के चर्चित गाने - फोटो : अमर उजाला

'पिता होते तो न बन पाती सिंगर'
18 साल की उम्र में मास्टर गुलाम हैदर ने फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में लता जी को मुकेश के साथ गाने का मौका दिया। अपनी गायिकी के लिए लता मंगेशकर ने कई विश्व रिकॉर्ड बनाए। लेकिन, वह पिता के सामने गाना गाते वक्त हमेशा डरा करती थीं। एक बातचीत के दौरान खुद लता जी न इस बात का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, 'पिताजी जिंदा होते तो मैं शायद सिंगर नहीं होती।' लता जी के पिता दीनानाथ मंगेशकर को लंबे समय तक मालूम ही नहीं था कि उनकी बेटी गा सकती हैं। पिता जी को जब बेटी के हुनर का पता चला और जब वह लता जी से गाना गाने को कहते तो वह अक्सर झिझककर किचन में मां के पास भाग जाया करतीं।

लता मंगेशकर के भाई-बहन - फोटो : साभार@imdb

महज एक दिन स्कूल गई थीं स्वर कोकिला

क्या आप मानेंगे कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थी? यह सच है। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोसले को स्कूल लेकर गई तो अध्यापक ने आशा भोंसले को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया। बता दें कि लता मंगेशकर पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी बहन थीं। उनके बाद उनकी तीन बहनें मीना मंगेशकर, आशा भोसले, उषा मंगेशकर और भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने भी आजीविका के रूप में संगीत को ही चुना।
लता मंगेशकर-आशा भोसले - फोटो : सोशल मीडिया

लाजवाब हलवा बनाती थीं लता दीदी
लता मंगेशकर के सिंगिंग के हुनर से तो दुनिया वाकिफ रही। लेकिन, इसके अलावा लता दीदी को कुकिंग का भी काफी शौक था। रिपोर्ट्स के मुताबिक लता मंगेशकर को मेहमान नवाजी का काफी शौक था। उनके हाथों का बना चिकन जिसने खाया, वह उसे भुला नहीं पाया। चिकन के अलावा स्वर कोकिला सूजी का हलवा भी बहुत अच्छा बनाती थीं। लता मंगेशकर को सी फूड भी काफी पसंद था। खासकर गोवा की फिश और समुद्री झींगे उनकी पसंदीदा डिश थी।

लता मंगेशकर के सम्मान - फोटो : अमर उजाला

गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम
वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में लता मंगेशकर को पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त हुआ। सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का 'गिनीज बुक रिकॉर्ड' उनके नाम पर दर्ज किया गया था।

इस वजह से रहना पड़ा था मौन
लता मंगेशकर की जिंदगी में एक पल ऐसा भी आया, जब उन्हें कुछ वक्त ब्रेक लेना पड़ा। साथ ही मौन भी रहना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 60 के दशक में लता को वोकल कॉर्ड्स में कुछ समस्या हुई। इस तकलीफ के चलते वे गा नहीं पा रही थीं। तब, मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद अमीर खान की सलाह पर उन्होंने कुछ समय के लिए सिंगिंग से ब्रेक लिया। महीनों ब्रेक पर रहने के दौरान उन्होंने मौन व्रत रखा। उनका यह मौन वर्त हेमंत कुमार ने तुड़वाया था। दरअसल, हेमंत को फिल्म 'बीस साल बाद' के लिए लता की आवाज चाहिए थी। उन्होंने लता मंगेशकर को राजी किया और 'कहीं दीप जले, कहीं दिल' गाना गाने को कहा। यह गाना सुपरहिट हुआ। लता दीदी को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था।

मोहम्मद रफी, आशा भोसले, लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया

मोहम्मद रफी से हो गई थी तकरार, फिर ऐसे हुई बात
लता ने मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ो गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत बंद कर दी थी। दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया था। हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में 'दिल पुकारे' गीत गाया।

लता मंगेशकर - फोटो : साभार@imdb

अपनी प्रतिभा को बताया था ईश्वर और माता-पिता का आशीष
साल 2021 में लता मंगेशकर ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में अपने लंबे करियर को याद किया था। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, 'एक लंबा सफर मेरे साथ है। वह छोटी बच्ची आज भी मेरे साथ है। वह कहीं नहीं गई। कुछ लोग मुझे 'सरस्वती' कहते हैं और कहते हैं कि मेरे ऊपर उनकी कृपा है। मेरा मानना है कि मेरे ऊपर मेरे माता-पिता, हमारे देवता मंगेश, साई बाबा और भगवान की कृपा है'। लता दीदी ने आगे कहा था, 'यह उनकी कृपा है कि मैं जो भी गाती हूं, लोग वह पसंद करते हैं। अन्यथा मैं कौन हूं? मैं कुछ भी नहीं हूं। मुझसे बेहतर गायक हुए हैं और उनमें से कुछ आज हमारे साथ नहीं हैं। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसके लिए मैं भगवान और अपने माता-पिता की आभारी हूं'।
मालूम हो कि 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की उम्र में लता मंगेशकर इस दुनिया को अलविदा कह गईं। लेकिन, उनके गाने हमेशा उनकी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

Amar Ujala Ltd published this content on September 28, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 28, 2026 at 01:09 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]