07/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/24/2026 22:36
नीट पेपर लीक विवाद ने पूरे देश में जिस तरह युवाओं का आक्रोश भड़काया, उसके बाद केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए के 47 अधिकारियों को एक साथ बर्खास्त कर दिया गया। इससे एक दिन पहले उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को भी उनके पद से हटाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, हटाए गए कई अधिकारियों पर कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की तैयारी भी चल रही है।
सरकार का कहना है कि अब एनटीए की पूरी व्यवस्था बदली जाएगी। एजेंसी को मजबूत बनाने के लिए तीन साल के लिए चार नए महाप्रबंधकों की नियुक्ति होगी, जबकि यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 युवा पेशेवर भी जोड़े जाएंगे। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, एनटीए में स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे परीक्षाएं कराई जा रही थीं। ऐसे में अब स्थायी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
लेकिन सरकार की इस कार्रवाई के बावजूद छात्रों का आंदोलन थमा नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। बैठक के बाद पार्टी ने साफ कहा कि उनकी पहली और सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। इसके अलावा छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी दोहराई गई। सरकार ने कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन इस्तीफे पर जवाब देने के लिए एक दिन का समय मांगा है।
उधर विपक्ष भी सरकार पर लगातार हमलावर है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा पैलेट गन चलाने का आरोप लगाया। वहीं मुंबई, पटना, अहमदाबाद, चेन्नई, जयपुर समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किए। पश्चिम बंगाल में पुलिस और छात्रों के बीच झड़प के बाद लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। बिहार विधानसभा से लेकर कई राज्यों तक इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गर्म है।
अब सरकार इस पूरे विवाद पर कानूनी शिकंजा और कसने जा रही है। केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों में सख्त संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसे 27 जुलाई को संसद में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों को कम से कम 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान होगा। इतना ही नहीं, सभी मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी और अदालत को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा।
सवाल अब सिर्फ 47 अधिकारियों की बर्खास्तगी का नहीं है। सवाल उस भरोसे का है, जिसके सहारे करोड़ों छात्र अपने भविष्य का सपना देखते हैं। सरकार ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है और सख्त कानून का रास्ता भी चुना है। लेकिन असली परीक्षा अब सरकार की है... क्या इन फैसलों से पेपर लीक का सिलसिला रुकेगा, या फिर छात्रों का गुस्सा आने वाले दिनों में और बड़ा आंदोलन बन जाएगा? यही सबसे बड़ा सवाल है।