Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

02/18/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/18/2026 09:41

केंद्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के एआई-आधारित रूपांतरण पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया

उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय

केंद्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के एआई-आधारित रूपांतरण पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 8:12PM by PIB Delhi

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने आज नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट एवं एक्सपो 2026 के दौरान भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में एआई-सक्षम और डिजिटल नवाचारों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी मंडप का अवलोकन किया।

"सार्वजनिक वितरण के लिए एआई-सशक्त नवाचार" नाम की इस प्रदर्शनी का आयोजन उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) द्वारा विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के सहयोग से संयुक्त रूप से किया गया है।

तकनीक आधारित, लीकेज-मुक्त पीडीएस पर जोर

समिट को संबोधित करते हुए श्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत भारत 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न वितरित कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर अपने पैमाने में बेजोड़ पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करने की है कि खरीद किया गया एक-एक दाना इच्छित लाभार्थियों तक कुशलतापूर्वक और पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीक-आधारित सुधारों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लीकेज को काफी हद तक कम किया है और जवाबदेही बढ़ाई है, जिससे यह अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनी है।

अन्न चक्र - आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन के माध्यम से ₹250 करोड़ की बचत

श्री जोशी ने बताया कि स्मार्ट वेयरहाउसिंग, स्मार्ट पीडीएस, अन्न दर्पण, अन्न चक्र और आशा जैसी पहलों ने खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और संचालन दक्षता को मजबूत किया है।

उन्होंने जानकारी दी कि खाद्यान्न परिवहन के लिए एआई-आधारित आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन प्रणाली 'अन्न चक्र' ने मांग, स्टॉक उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स मार्गों का विश्लेषण कर लगभग 250 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि की बचत की है। इससे लागत और परिवहन समय में कमी आई है तथा आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन क्षमता बढ़ी है।

श्री जोशी ने बताया कि एआई-सक्षम शिकायत निवारण मंच 'आशा' (अन्न सहायता होलिस्टिक सॉल्यूशन) हर महीने लगभग 20 लाख लाभार्थियों से संपर्क कर फीडबैक एकत्र करता है, जिसे समयबद्ध समाधान के लिए जिला प्रशासन को भेजा जाता है।

प्रदर्शनी की प्रमुख झलकियां

स्मार्ट पीडीएस:एक एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल बैकबोन जो राशन कार्ड प्रबंधन, खरीद, आवंटन, भंडारण, परिवहन, उचित मूल्य की दुकान के संचालन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और शिकायत निवारण को जोड़ता है। रीयल-टाइम एनालिटिक्स डैशबोर्ड केंद्र और राज्य स्तर पर डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करते हैं।

अन्न चक्र:एआई-आधारित प्रणाली, जो मांग, स्टॉक और लॉजिस्टिक्स मार्गों का विश्लेषण कर खाद्यान्न परिवहन को अनुकूलित करती है।

डिपो दर्पण:एक स्मार्ट वेयरहाउसिंग निगरानी प्लेटफॉर्म जो तकनीक-सक्षम निरीक्षण और निगरानी के माध्यम से बेहतर बुनियादी ढांचा प्रबंधन, स्वच्छता मानकों और भंडारण सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

स्वचालित अनाज विश्लेषक:डिजिटल गुणवत्ता-परीक्षण प्रणाली जो खरीद कार्यों में पारदर्शिता, गति और निष्पक्षता बढ़ाती है, जिससे किसानों का विश्वास मजबूत होता है।

नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म

आशा (एएसएचए): बहुभाषी शिकायत निवारण और नागरिक फीडबैक प्रणाली।

स्कैन (एससीएएन):सब्सिडी दावों के तेज और पारदर्शी निपटान के लिए इंटेलिजेंट डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म।

अन्नपूर्णा ग्रेन एटीएम:बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से सटीक और गरिमामय खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करने वाली स्वचालित मशीनें।

इस अवसर पर खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव श्री संजीव चोपड़ा, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के उप कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी श्री कार्ल स्काउ तथा डब्ल्यूएफपी इंडिया की कंट्री डायरेक्टर एवं प्रतिनिधि सुश्री एलिजाबेथ फॉर भी मौजूद रहीं।

ये पहलें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बड़े पैमाने पर जन-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण को सशक्त बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों के उपयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

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पीके/ केसी/ केजे


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