09/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/11/2026 03:01
कभी अमानगढ़ और नगीना-बढ़ापुर क्षेत्र के रिजर्व फॉरेस्ट तक ही गुलदार सीमित था। कभी कभार जंगल से भटकर गन्ने के खेतों की ओर आ जाता था। कोरोना कॉल में 2022 में जब सड़कें शांत थी। आवाजाही न के बराबर थी, तो गुलदार रिजर्व फॉरेस्ट से बाहर निकला और गन्ने के खेतों में शरण ले ली। गन्ने के खेत में प्रजनन भी किया। अब जो पीढ़ी गन्ने के खेतों में पली-बढ़ी, उसका व्यवहार ही बदल गया।
इंसानों से दूरी बनाने वाला यह खूंखार जीव पिछले चार साल से बिजनौर में इंसानों का शिकार कर रहा है। अब तक चार साल में 40 इंसानों की जान ले चुका है। कई जिलों, संस्थानों के विशेषज्ञ आए, लेकिन इसके बदले व्यवहार के कारण इस समाधान नहीं खोज पाए।
अब गुलदार के लिए जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। अभी तक गन्ने के खेतों में एक हजार से ज्यादा गुलदार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गुलदार के हमले में महिला की मौत - फोटो : अमर उजाला
चार साल पहले तक बिजनौर जिले में गुलदार केवल अफजलगढ़ ब्लॉक में ही अपनी दस्तक देते थे। माना जाता था कि अमानगढ़ से बाहर आए गुलदार वहां हमले करते हैं। कोरोना काल के बीच वर्ष 2022 और 2023 में गुलदार की संख्या जिले में बढ़ गई। यह वहीं साल था जब अफजलगढ़ और नगीना क्षेत्र में गुलदार के हमलों में इस साल 17 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा हर साल बढ़ता गया और तब से अब तक 40 लोग जान गवां चुके हैं।
बढ़ती संख्या के आगे इंतजाम फेल
इस वर्ष जनवरी से अब तक 66 गुलदार जिलेभर में गन्ने के खेतों में लगाए पिंजरों में फंस चुके हैं। इनमें से कुछ की सड़क हादसों में भी जान गई। बावजूद इसके इंसानों पर हमले लगातार हो रहे हैं।
वन्य जीव विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका कारण इनकी बढ़ती संख्या है। वन विभाग ने जिलेभर में करीब 200 पिंजरे लगाए हुए हैं। ऐसे में यह इंतजाम भी गुलदार नियंत्रण में विफल साबित हो रहे हैं।
पिंजरे में कैद हुआ गुलदार - फोटो : अमर उजाला
अधिकारिक आंकड़ा नहीं, नसबंदी प्रस्ताव अटका
वन विभाग ने दो साल पहले जिलेभर में गुलदार नियंत्रण के लिए करीब 13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस प्रस्ताव में गुलदार की नसबंदी कराने, रिजर्व फॉरेस्ट और आबादी की सीमा पर तारबंदी कराने, रेस्क्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव था। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गुलदार की संख्या का अधिकारिक आंकड़ा न होने से यह प्रस्ताव पास नहीं हुआ।
जिले में डब्ल्यूआईआई की टीम कर रही सर्वे
जुलाई माह में भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की टीम जिलेभर में गुलदार पर सर्वे कर रही है। यह टीम सबसे पहले उन क्षेत्रों में काम कर रही है, जहां पर गुलदार ने अभी तक हमले किए हैं या फिर गुलदार लगातार देखे जा रहे हैं। डीएफओ जय सिंह कुशवाह का कहना है कि अगले एक से डेढ़ माह में यह सर्वे पूरा होने की उम्मीद है।
गुलदार ने महिला पर किया हमला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुरुषों से दूरी, महिला और बच्चे बने सबसे ज्यादा शिकार
पिछले साढ़े तीन साल में जिले के गुलदार के व्यवहार पर लगातार शोध हुए। विशेषज्ञों ने गुलदार के हमलों के पैटर्न पर काम किया तो हमले की प्रकृति भी देखी। इसके बाद आंकड़ों के आधार पर बताया कि गुलदार शाम के समय सबसे अधिक हमले करता है। वहीं इनके हमलों में मरने वाले 80 प्रतिशत महिला और बच्चे ही हैं।
अब तक गुलदार के हमलों में इंसानों की मौत
| वर्ष | मौत | घायल |
|---|---|---|
| 2023 | 17 | 14 |
| 2024 | 08 | 16 |
| 2025 | 06 | 20 |
| 2026 | 06 | 02 |
| कुल | 37 | 52 |
नोट: तीन इंसानों की मौत कालागढ़ क्षेत्र में हुई, जिन्हें वन विभाग उत्तराखंड में मानता है
साढ़े चार साल में पकड़े गए गुलदार और कितनों की मौत
| वर्ष | पकड़े गए | मारे गए |
|---|---|---|
| 2022 | 10 | 16 |
| 2023 | 25 | 12 |
| 2024 | 28 | 28 |
| 2025 | 36 | 28 |
| 2026 | 66 | 16 |
| कुल | 165 | 100 |
गुलदार के हमले में महिला की मौत - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के गुलदार का बदलता व्यवहार
-अब तीन से पांच साल के गुलदार भी हमलावर हो रहे हैं
-पिंजरे में बकरी की जगह मुर्गे बांधने पर सबसे ज्यादा गुलदार पकड़े गए
-आबादी के पास गुलदार घूमने लगे हैं, जबकि पहले दूर रहते थे
-अब पूरे साल गन्ने के खेतों में गुलदार के शावक मिल रहे हैं
-अकेले रहने वाले गुलदार अब दो से तीन तक की संख्या में एक साथ दिख जाते हैं
-गांवों के अंदर घुसकर इंसानों को उठाकर ले जाने लगे हैं
खेतों में पानी होने के कारण बढ़े हमले
वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लायल कहते हैं कि गुलदार पानी से बचता है। यह उस जगह रहना पसंद नहीं करता, जहां पानी भरा हो। इसलिए रात में आबादी क्षेत्रों में यह नलकूप की छतों पर, पेड़ों पर या गांवों के बाहर सड़क, पुलिया और बंद मकानों की छतों पर रहता है। इसका यही व्यवहार इसे गांवों के अंदर से ला रहा है। बरसात का मौसम चल रहा है, ऐसे में लोगों को सतर्कता के साथ रहना होगा। क्योंकि खेतों में पानी होते ही यह सूखा स्थान तलाशने लगेगा।