02/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/17/2026 10:12
भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 का दूसरा दिन "एआई उपयोग पर वैश्विक संवाद - श्रम बाजार लचीलापन के लिए डेटा" सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने की तेज गति के संदर्भ में रोजगार की बदलती प्रकृति और नौकरी परिदृश्यों पर केंद्रित रहा। सम्मेलन में इस संक्रमण के प्रबंधन के लिए आवश्यक नीति विकल्पों पर चर्चा हुई। उभरते अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों पर आधारित चर्चा में उम्र समूहों, क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में भिन्न प्रभावों का उल्लेख किया गया, जिसमें प्रारंभिक रुझानों से उच्च एआई जोखिम वाले भूमिकाओं में युवा श्रमिकों पर रोजगार के दबाव का संकेत मिला।
पैनलिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के देशों में व्यापक और तुलनात्मक डेटा की कमी सरकारों की समय पर और लक्षित हस्तक्षेप डिजाइन करने की क्षमता को सीमित करती रहती है। इस चर्चा में पूर्ण जानकारी के अभाव में भी अनुकूली नीति ढांचों को आगे बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने तथा पुनर्कौशल विकास मार्गों का विस्तार करने के महत्व पर बल दिया गया। सेवा, कृषि तथा सार्वजनिक वितरण जैसे क्षेत्रों के लिए संदर्भ-विशिष्ट रणनीतियों की आवश्यकता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझी जानकारी को जरूरी बताया गया। सहमति इस बात पर जताई गई कि एआई अपनाने से समावेशी विकास होगा।
स्मति शमिका रवि, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषदकी सदस्य, ने कहा, "भारत फर्म स्तर पर एआई अपनाने के मामले में दुनिया के अव्वल देशों में से एक दिखता है, जो खुलेपन और आशावाद दोनों से प्रभावित है। इससे उत्पादकता पर पड़ने वाले प्रभाव अभी मापे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई को भारत में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों-विशेष रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवाओं -पर लागू किया जाएगा, जहां अंतिम छोर की कनेक्टिविटी बाधाओं ने परंपरागत रूप से परिणामों को सीमित किया है।
अंबेसडर फिलिप थिगो, तकनीकी के लिए विशेष दूत, केन्या गणराज्य, ने कहा, "एआई-चालित संक्रमणों के लिए तैयार होने के लिए पुनर्कौशल और कौशल उन्नयन की अधिक आवश्यकता है; इसमें मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणालियां भी आवश्यक हैं। केन्या जैसे देशों में, जहां बहुतायत युवा आबादी के साथ-साथ कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धावस्था के भी श्रमिक हैं, ऐसे में जरूरी है हम नीति नवाचार का समर्थन करें तथा सभी पीढ़ियों के लोगों को इस संक्रमण के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करें।
मिस्टर हेक्टर डी रेवोइर, निदेशक, जिम्मेदार एआई सार्वजनिक नीति, माइक्रोसॉफ्ट, ने कहा, "वर्तमान में हमारे पास एआई के रोजगार प्रभाव पर अधिकतर साक्ष्य कुछ देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से आते हैं। कई अन्य क्षेत्रों , जिसमें उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं के बारे में डेटा अभी मौजूद ही नहीं है, जिससे दृढ़ निष्कर्ष निकालना कठिन हो जाता है । ऐसे में यह जरूरी है कि इसे वैश्विक स्तर पर अपनाकर रोजगार डेटा का एक सुव्यवस्थित संग्रह किया जाए।
योशुआ बेंगियो, मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा प्रमुख वैश्विक एआई विशेषज्ञ,ने सत्र की शुरुआत की और कहा कि पिछले पांच वर्षों में नौकरियों पर एआई प्रभाव के रुझान नौकरी बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते रहेंगे। एआई तक पहुंच एक लाभ बन जाएगी, जबकि एआई तक पहुंच नहीं पाने वाले देश प्रतिस्पर्धी नुकसान में होंगे। इसलिए, इसके दुष्प्रभावों से बचने तथा एआई को सभी के लिए अच्छे दिशा में निर्देशित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय, गठबंधन और संवादों की आवश्यकता है।
मिस पामेला मिश्किन, ओपनएआई की शोधकर्ता, ने कहा, "लचीलापन एकल भविष्य की भविष्यवाणी करने के बारे में नहीं है, बल्कि कई संभावित परिदृश्यों के लिए योजना बनाने के बारे में है। कार्य करने से पहले परफेक्ट उपयुक्त डेटा का इंतजार करना भी बहुत देर होने का जोखिम लेना है, विशेष रूप से कठिन संक्रमणों के दौरान श्रमिकों के समर्थन को लेकर। संक्रमण को क्या दिखना चाहिए, कोई भी नीति इस पर ध्यान केंद्रित करें, न कि केवल दीर्घकालिक परिणाम पर।
मिस्टर भारत चंदार, स्टैनफोर्ड डिजिटल इकोनॉमी लैब, ने कहा, "शोध के जरिए यह पता चलता है कि एआई जोखिम और एआई अपनाने के बीच क्या अंतर है? एआई के अधिक जोखिम वाले नौकरियों में युवा श्रमिकों के लिए रोजगार में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जबकि इसे फर्म-स्तर पर अपनाने से इसके मिश्रित प्रभाव दिखते हैं। यह अंतर कार्यकारी अपेक्षाओं, फर्म-स्तरीय एआई उपयोग तथा उत्पादकता पर बेहतर डेटा की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि समझा जा सके कि भर्ती निर्णयों को एआई कैसा आकार दे रहा है?
सत्र ने रेखांकित किया कि एआई युग में श्रम बाजार के लचीलापन को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने के बेहतर मापन, प्रत्याशित शासन तथा कौशल, सामाजिक सुरक्षा तथा संस्थागत क्षमता में समन्वित निवेशों की आवश्यकता होगी ताकि उत्पादकता लाभ लोगों के व्यापक आर्थिक तथा सामाजिक लाभों में परिवर्तित हों।
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