Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

02/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/12/2026 02:22

कार्यस्थल में एआई: उत्पादकता, रोजगार और नवाचार को बढ़ावा देना

PIB Headquarters

कार्यस्थल में एआई: उत्पादकता, रोजगार और नवाचार को बढ़ावा देना


समावेशी विकास, नवाचार और कौशल के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) का उपयोग

प्रविष्टि तिथि: 12 FEB 2026 1:38PM by PIB Delhi

मुख्य बिंदु

  • भारत स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की वर्ष 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है।
  • डेटा आधारित संरचना, उद्यमिता और जनसांख्यिकी एआई अपनाने के प्रमुख कारक हैं।
  • भारत में एआई कौशल की सापेक्ष पहुंच इसी तरह के कामों में वैश्विक औसत से 2.5 गुना अधिक है (स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई इंडेक्स रिपोर्ट)।
  • 87% कंपनियां सक्रिय रूप से एआई समाधान का उपयोग कर रही हैं (नैसकॉम एआई एडेप्शन इंडेक्स)।.

एआई: विकास का इंजन

कोड से लेकर रचनात्मकता तक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) विकास के नियमों को फिर से लिख रहा है, उद्योगों को सशक्त बना रहा है, नौकरियों को बदल रहा है और भारत को भविष्य की ओर ले जा रहा है। एआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और रोजगार के विकास के लिए एक गतिशील उत्प्रेरक बनता जा रहा है।

भारत-एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026

16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मेलन को एआई पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श के व्यापक संदर्भ में रखा गया है।

इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उपयोग के लिए वैश्विक सहयोग को सामंजस्यपूर्ण बनाने में योगदान देना है।

अपने मुख्य उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, शिखर सम्मेलन अपनी विषय आधारित प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करेगा, जिन्हें सात "चक्रों" के रूप में संदर्भित किया गया है: यानि, मानव संसाधन, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई, विज्ञान, लचीलापन, नवाचार और दक्षता, एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास तथा सामाजिक भलाई के लिए एआई।

भारत एआई-तैयार देशों के पहले समूह में शामिल है, जहां एआई आर्किटेक्चर के सभी पांच स्तरों-एप्लिकेशन, मॉडल, चिप्स, अवसंरतना और ऊर्जा-में व्यवस्थित प्रगति हो रही है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग(सीसीआई) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक एआई बाजार का आकार वर्ष 2020 में 103.6 बिलियन अमेरिकन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 288.8 बिलियन अमेरिकन डॉलर हो गया है। इसी अवधि में, भारत में एआई बाजार 2.97 बिलियन डॉलर से बढ़कर 7.63 बिलियन डॉलर हो गया है। भारतीय एआई बाजार के वर्ष 2032 तक 42.2% के सालाना यौगिक वृद्धि दर(सीएजीआर) से बढ़कर 131.31 बिलियन अमेरिकन डॉलर होने की संभावना है।

भारत सरकार सक्रिय रूप से भारत में एआई-नेतृत्व वाले परिवर्तन के अनुरूप तकनीकी विकास को बढ़ावा दे रही है। यह अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में केन्द्रित पहलों के माध्यम से संभव हुआ है, साथ ही "सबके लिए कल्याण, सबके लिए खुशी" सुनिश्चित किया गया है। सरकार द्वारा उठाए गए कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि तकनीक उत्पादकता बढ़ाए, रोजगार के नए अवसर पैदा करे, और देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करे।

वैश्विक एआई में भारत का उभरता नेतृत्व

वैश्विक मानकों से बताते हैं कि भारत एआई तैयारियों के मामले में अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति वाली अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।

वैश्विक सूचकांक में भारत की स्थिति

सूचकांक

भारत की रैंकिंग

यह क्या संकेत देता है?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी

तीसरे स्थान पर, अमेरिका और चीन के बाद

अनुसंधान एवं विकास(R&D), प्रतिभा और अर्थव्यवस्था में वृद्धि

आईएमएफ का एआई तैयारी सूचकांक

भारत ने 49.3 का स्कोर हासिल किया, जो अन्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के 42.1 के औसत से अधिक है।

भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने और इसके लाभ प्राप्त करने के लिए बेहतर स्थिति में है।

ऑक्सफोर्ड का सरकार एआई तैयारी सूचकांक 2025,

भारत दक्षिण और मध्य एशिया में अग्रणी बना हुआ है और 66.55 के स्कोर के साथ 27वें स्थान पर है।

वर्ष 2025 में विभिन्न पहलों और प्रयासों के आधार पर भारत की साल-दर-साल मजबूत प्रगति जारी रही।

साथ ही, ये वैश्विक संकेतक दिखलाते हैं कि भारत एआई का उपयोग उत्पादकता बढ़ाने, सभी के लिए अवसर सुनिश्चित करने और लंबे समय में आर्थिक बदलाव लाने में कर सकता है।

जनसांख्यिकी

भारत विश्व के सबसे युवा कार्यबलों में से एक है, जहां 65% से अधिक जनसंख्या 35-वर्ष से कम उम्र की है। इस बड़े, टेक्नोलॉजी में निपुण प्रतिभाशाली वर्ग को एआई-संचालित उद्योगों के लिए प्रशिक्षित और अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे नवाचार, डिजिटल सेवाओं और भविष्य के रोजगार के लिए एक मजबूत आधार तैयार होगा।

डिजिटल अवसंरचना

भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल बदलाव को मजबूत आधारभूत अवसंरचना का सहारा मिल रहा है, जिसमें डेटा सेंटर और बड़े पैमाने पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, देश भर में क्लाउड अपनाने, एआई लागू करने और डेटा-आधारित शासन के लिए महत्वपूर्ण सहायक बन रहे हैं।

भारत की डिजिटल अवसंरचना के मुख्य स्तंभों में से एक डेटा केन्द्रों का विस्तार और विकास है। ये केन्द्र क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा स्टोरेज और एआई/एमएल एप्लिकेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र(एनआईसी) ने दिल्ली, पुणे, भुवनेश्वर और हैदराबाद जैसे शहरों में अत्याधुनिक राष्ट्रीय डेटा केंद्र(एनडीसी) स्थापित किए हैं, जो सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों(पीएसयू) को मजबूत क्लाउड सेवाएं प्रदान करते हैं। एनडीसी में स्टोरेज क्षमता लगभग 100PB तक बढ़ाई गई है, जिसमें ऑल फ्लैश एंटरप्राइज क्लास स्टोरेज, ऑब्जेक्ट स्टोरेज और यूनिफाइड स्टोरेज शामिल हैं। डेटा स्टोरेज एआई मॉडल के प्रशिक्षण, तैनाती और होस्टिंग के लिए महत्वपूर्ण है, और डेटा केन्द्र में तेजी से बढ़ोतरी से रुकावटें कम होती हैं।

  • जून 2025 तक इंटरनेट कनेक्शन 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर 100.29 करोड़ पहुंच गया, जबकि मार्च 2014 में यह 25.15 करोड़ था, जिसमें 298.77% की वृद्धि दर्ज हुई।
  • 400 मिलियन से अधिक 5जी उपयोगकर्ताओं के साथ, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी ग्राहक आधार और वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से अपनाने वाले देशों में से एक है।
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल(ओएफसी) की लंबाई 19.35 लाख रूट किमी(2019) से बढ़कर 42.36 लाख रूट किमी हो गई। कुल 2,14,843 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है।
  • दिसंबर 2025 तक, उभरती टेलीकॉम तकनीकों जैसे 5जी/6जी, एआई, क्वांटम कम्युनिकेशन आदि में ₹550 करोड़ की लागत वाले 136 परियोजनाओं को धनराशि प्रदान की जा चुकी है।
  • वर्ष 2024 में एआई को प्राथमिकता देने के साथ, भारत ने पहले ही 38,000 जीपीयू(ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) हासिल कर लिए हैं, जो भारत के 'वैश्विक एआई नेतृत्व' बनने के प्रयास को दर्शाता है।

उद्यमिता(व्यवसाय शुरू करने की क्षमता)

भारत स्टार्टअप और नवाचार-प्रधान उद्यमों में तेजी देखा जा रहा है। पिछले दशक में, भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने अभूतपूर्व विस्तार दर्ज किया है, और पूरे देश में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग(डीपीआईआईटी) ने 2-लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता प्रदान की है। स्टार्टअप और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं, और यह बढ़ता हुआ उद्यमिता इकोसिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि एआई समाधान स्थानीय रूप से प्रासंगिक, आगे बढ़ता हुआ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो।

एआई स्टार्ट-अप्स

भारत एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 की तैयारी के तहत, फाउंडेशन मॉडल पिलर के अंतर्गत चयनित 12 भारतीय एआई स्टार्टअप्स ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित राउंडटेबल में भाग लिया और अपने विचार और कार्य प्रस्तुत किए।

ये स्टार्टअप्स विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनमें भारतीय भाषा फाउंडेशन मॉडल, बहुभाषी एलएलएम, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-ऑडियो और टेक्स्ट-टू-वीडियो; ई-कॉमर्स, मार्केटिंग और व्यक्तिगत कंटेट बनाने के लिए जेनरेटिव एआई का उपयोग करके 3डी कंटेंट; उद्योगों में डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए इंजीनियरिंग सिमुलेशन, सामग्री अनुसंधान और उन्नत एनालिटिक्स; स्वास्थ्य देखभाल निदान और चिकित्सा अनुसंधान, आदिल अन्य कई क्षेत्र शामिल हैं।

एआई एक अवसर के रूप में: श्रम बाजार का विकास

जहां एआई को दुनिया भर में अक्सर कार्यबल में व्यवधान के तौर पर देखा जाता है, वहीं यह भारत को समान विकास और नवाचार को बढ़ावा देने का एक अनोखा अवसर प्रदान करता है।

एआई कौशल और रोजगार की बढ़ती मांग

एआई से संबंधित कौशल की मांग तेजी से बढ़ रही है। दक्षिण एशिया में, जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच, एआई से संबंधित नौकरी पोस्टिंग का अनुपात दोगुना से अधिक बढ़कर 2.9% से 6.5% हो गया। समान अवधि में, एआई कौशल की मांग गैर-एआई भूमिकाओं की तुलना में 75% तेजी से बढ़ी, जो मुख्य रूप से उच्च वेतन वाले, शहरी, व्हाइट-कॉलर नौकरियां हैं। कुल मिलाकर, एआई से संबंधित नौकरियों में यह तेजी उच्च कौशल और शहरी रोजगार की ओर निर्णायक बदलाव को दर्शाती है, और भारत तेजी से खुद को एआई अपनाने और प्रतिभा की मांग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर स्थापित कर रहा है।

भारत के श्रम बाजार में बदलाव

एआई से संबंधित नौकरियों में तेज वृद्धि भारत के श्रम बाजार में सकारात्मक बदलाव का संकेत देती है।

स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत लगभग 33% की वार्षिक भर्ती दर के साथ एआई प्रतिभा अधिग्रहण में दुनिया में अग्रणी है।

भौगोलिक वितरण के अनुसार गिटहब(GitHub) एआई प्रोजेक्ट्स के वैश्विक डेटा के मुताबिक, 2024 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता था, जो सभी एआई प्रोजेक्ट्स का 19.9% है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में एआई कौशल की सापेक्ष पहुंच समान व्यवसायों में वैश्विक औसत से 2.5 गुना अधिक थी।

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के अनुसार, भारत ने 2015-2025 के दौरान 2,62,404 एआई-संबंधित शोध लेख प्रकाशित किए, जिससे यह दुनिया के प्रमुख एआई शोध योगदानकर्ताओं में शामिल हुआ। यह शोध उत्पादन भारत की गहरी तकनीकी प्रतिभा को दर्शाता है, जिसकी पुष्टि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी हुई है।

दुनिया के सबसे एआई-साक्षर कार्यबल वाले देशों में, अमेरिका के बाद, भारत स्वास्थ्य, कृषि, वित्त, शिक्षा और सार्वजनिक प्रशासन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपने व्यापक घरेलू डेटा इकोसिस्टम से महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ का भी आनंद लेता है।

यह तकनीक, सेवाओं, विनिर्माण और रचनात्मक उद्योगों में नए, उच्च-मूल्य वाले रोजगार अवसरों के सृजन की ओर संकेत करता है। जैसे-जैसे एआई को अपनाया जा रहा है, वैसे ही एआई ट्रेनर, सेफ्टी टेस्टर्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियर जैसे अलग-अलग तरह के कार्यों के लिए मांग बढ़ रही है। यह विविधता स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और फ्यूचरस्किल्स प्राइम जैसे कार्यक्रम के तहत उपयुक्त कौशल विकास और पुनःकौशल पहलों के माध्यम से अनुभवी पेशेवरों और नए लोगों, दोनों को समर्थन दे रहा है।

दक्षिण भारत: उभरता हुआ एआई केन्द्र

विश्व बैंक की दक्षिण एशिया विकास अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में एआई से संबंधित नौकरी के अवसर मुख्य रूप से भारत और श्रीलंका में केन्द्रित हैं, जिसमें भारत अधिकांश लिस्टिंग का हिस्सा रखता है।

भारत में, वर्ष 2025 में व्हाइट-कॉलर नौकरियों में 5.8% लिस्टिंग में एआई विशेषज्ञता की आवश्यकता थी, जिसमें बेंगलुरु (एआई नौकरियों का 11% हिस्सा) और हैदराबाद (9.57%) के साथ समेत दक्षिणी तकनीकी कॉरिडोर सबसे आगे था, इसके बाद महाराष्ट्र में पुणे (6.95%) और चेन्नई (6.62%) का नंबर आता है।

वेतन प्रीमियम और श्रम बाजार प्रोत्साहन

एआई-संबंधित रोजगार में वेतन के मामले में महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं, जो उभरते कौशल के लिए वैश्विक मांग को दिखलाता है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल कौशल वाली नौकरियों में औसतन 12% वेतन प्रीमियम मिलता है, जबकि एआई-केंद्रित नौकरियों में यह प्रीमियम 28% तक है। जैसे-जैसे एआई कौशल बढ़ रहे हैं, भारत उच्चतर-मूल्य वाले निवेश और तकनीक-प्रधान परियोजनाओं को आकर्षित करने के लिए तैयार है, जिससे बेहतर वेतन वाली नौकरियां सृजित होंगी और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

भारत में रोजगार की सुरक्षा

भारत के पास अपनी कार्यबल को पुनःकौशल देने और एआई को धीरे-धीरे, समावेशी और उत्पादकता बढ़ाने वाले तरीके से लागू करने का महत्वपूर्ण अवसर है। कृषि, स्वास्थ्य देखभाल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र, जहां मानव कौशल अभी भी महत्वपूर्ण है, वे भी एआई अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उत्पादकता में वृद्धि और कौशल अंतर में कमी

साक्ष्य बताते हैं कि भारत में एआई अपनाने से उत्पादकता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई हैं।नैसकॉम एआई एडेप्शन इंडेक्स में भारत को 4 में से 2.45 अंक प्राप्त हुए हैं, और 87% उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधान का उपयोग कर रहे हैं (दिसंबर 2025)। McKinsey द्वारा 1993 कंपनियों के सर्वेक्षण के आधार पर, वर्ष 2025 में 88% संगठनों ने बताया कि वे कम-से-कम एक व्यापारिक कार्य में एआई का उपयोग कर रहे हैं। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि जनरेटिव एआई टूल्स कुल मिलाकर उत्पादकता को 14% तक और नए या कम-कौशल वाले कर्मचारियों के बीच यह लाभ 34% तक बढ़ाते हैं, जिससे दक्षता और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाते हुए कौशल अंतर को कम करने में मदद मिलती है।

सेवा क्षेत्र में एआई-आधारित वृद्धि

वर्ष 2024-25 में भारत के सकल मूल्य संवर्धन(GVA) का लगभग 55.3% योगदान देने वाला सेवा क्षेत्र, अभी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। आईटी, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसे प्रमुख उद्योग एआई को तेजी से अपनाकर उत्पादकता, नवाचार और स्थायी बिजनेस प्रैक्टिस को बढ़ावा दे रहे हैं।इन क्षमताओं को आधार बनाकर, भारतीय कंपनियां एआई को अपनाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।

एआई और मानवता

भारत में एआई धीरे-धीरे कार्य के भविष्य को तेज़ी से बदल रहा है, मानव क्षमताओं को बढ़ाते हुए और उच्च-मूल्य वाले रोजगार अवसरों का विस्तार कर रहा है, साथ ही यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि निर्णय लेने और रचनात्मकता में मानव ही केंद्र में रहे। एआई मानव कार्य को को बदलने के बजाय, विशेष रूप से जटिल और संदर्भ-समृद्ध कार्यों में, उसे बढ़ाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है।

एआई से उत्पादकता में वृद्धि होने की उम्मीद है, यह कर्मचारियों को रचनात्मक, विश्लेषणात्मक और अंतरवैयक्तिक भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है, क्योंकि यह मानव श्रम को प्रतिस्थापित करने के बजाय मानव और मशीन को साथ में काम करने में सक्षम बनाता है। भारत का टेक और एआई इकोसिस्टम पहले ही 6 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है और यह लगातार तेजी से बढ़ रहा है, जो नौकरियों को हटाने के बजाय उनका रूपांतरण सुनिश्चित कर अपनी कार्यबल रणनीति में एआई और मानवता के बीच संतुलन बनाने के देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विभिन्न क्षेत्रों में एआई और कार्य का भविष्य

सेवाओं के अलावा, एआई का बदलाव लाने का काम क्षमता निर्माण, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ-साथ ग्राहक-संपर्क गतिविधियों में भी फैला हुआ है, जिससे अधिक दक्षता और व्यक्तिगत अनुभव सुनिश्चित होता है। इसे बड़े पैमाने पर अपनाने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, श्रम बाजार को नया आकार मिल सकता है, और निरंतर कौशल उन्नयन को बढ़ावा भी मिल सकता है। यह एक गतिशील और समावेशी कार्यबल का समर्थन करता है, जो मानव विशेषज्ञता को तकनीकी प्रगति के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ता है।

एआई के माध्यम से कार्य का नया स्वरूप

भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के क्षेत्र में रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रहा है। यह दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण कितना आवश्यक है, जिसे भारत सरकार राष्ट्रीय कार्यक्रमों और कौशल उन्नयन पहलों के माध्यम से प्राप्त कर रही है, जिनका उद्देश्य प्रौद्योगिकी को उत्पादकता, समावेशन और रोजगार का मूल प्रेरक बनाना है।

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट "The Opportunity for Accelerated Economic Growth" में इस बात पर प्रकाश डाला है कि एआई के नेतृत्व में मूल्य सृजन का एक प्रमुख संभावित परिणाम भारत का वर्ष 2035 तक अग्रणी देशों के साथ एआई कौशल अंतर को धीरे-धीरे कम करने की क्षमता है। इसी तरह, आईएमएफ की रिपोर्ट में यह पाया गया है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में हर 10वीं नौकरी और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में हर 20वीं नौकरी अब कम-से-कम एक नए कौशल की आवश्यकता रखता है, जो श्रम बाजार में कौशल परिवर्तन की बढ़ती गति को दर्शाता है।

यह एक कुशल कार्यबल का विकास, अनुसंधान क्षमताओं को सशक्त बनाना, और एआई मॉडलों और नवाचार में सक्रिय योगदान सुनिश्चित कर ही हासिल किया जा सकता है। यह प्रवृत्ति लगातार कौशल उन्नयन की आवश्यकता को दर्शाती है, ताकि बदलती कार्य दुनिया में प्रासंगिकता बनी रहे। इस बदलाव को पहचानते हुए, भारत अपने कुशल कार्यबल को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग के लिए तैयार करने हेतु लक्षित कौशल विकास पहलों की श्रृंखला के माध्यम से सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है।

राष्ट्रीय कार्यक्रम

विकसित भारत विजन 2027 के तहत, एआई को डिजिटल रूपांतरण का प्रमुख चालक माना गया है। उद्योगों में एआई को एकीकृत करके, भारत कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाने, नए रोजगार अवसर सृजित करने और कौशल अंतर को कम करने का लक्ष्य रखता है। यह तरीका उच्च-कुशल और प्रवेश स्तर के कर्मचारियों दोनों को सशक्त बनाता है, ताकि विकसित होती डिजिटल अर्थव्यवस्था में समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय(MeitY) ने राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। यह कार्यक्रम एआई अपनाने को बढ़ावा देने, समावेशन, रचनात्मकता और सामाजिक प्रभाव के लिए एआई के उपयोग का समग्र ढांचा प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के चार स्तंभ हैं:

  • राष्ट्रीय एआई केंद्र
  • डेटा प्रबंधन कार्यालय
  • एआई में कौशल विकास
  • जिम्मेदार एआई

#AIforAllके सिद्धांत के अनुरूप, सरकार प्रत्येक जीवन चरण के लिए स्व-शिक्षण ऑनलाइन कार्यक्रम पर जोर दे रही है, ताकि सभी को इस डिजिटल बदलाव से परिचित कराया जा सके। इस प्रोग्राम दो खंडों में बांटा गया है: पहला, एआई जागरूक (AI Aware) और दूसरा, एआई की सराहना (AI Appreciate)

BHASHINI पहल, जो 36+ भाषाओं में एआई का उपयोग करती है और 1.2 मिलियन+ मोबाइल ऐप डाउनलोड्स के साथ है, डिजिटल अर्थव्यवस्था में संचार बाधाओं को तोड़ रही है। इससे कार्यबल की भागीदारी बढ़ती है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां अंग्रेजी बोलने वाले कम हैं, और स्थानीय उद्यमियों और डिजिटल कर्मचारियों को सशक्त बनाती है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, एक 'एआई आर्थिक परिषद' गठित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य देश में एआई अपनाने की गति को नियंत्रित करना होगा। यह परिषद सुनिश्चित करेगी कि 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता' का उपयोग 'मानव बुद्धिमत्ता' की कीमत पर न हो। यह एक समन्वय प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगी, जो तकनीकी तैनाती को भारत की शिक्षा और कौशल अवसंरचना के विकास के साथ जोड़ने के लिए जिम्मेदार होगी, साथ ही संसाधन सीमाओं की कमी और विकास प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखेगी।

इन सभी कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में कार्य के स्वरूप को नया आकार दिया जा रहा है और देश को उत्पादकता, समावेशन और सतत रोजगार सृजन के लिए एआई का प्रभावी उपयोग करने हेतु तैयार किया जा रहा है।

कौशल विकास पहल

  1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी)2020: यह नीति डिजिटल और एआई साक्षरता को सभी शैक्षणिक स्तरों पर मुख्य कौशल के रूप में महत्व देती है। पाठ्यक्रम में कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई से सीखने को शामिल करके, यह नीति सुनिश्चित करती है कि भारत की अगली पीढ़ी बदलते तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयार होकर कार्यबल में प्रवेश करे।
  1. स्किल इंडिया मिशन: स्किल इंडिया मिशन, जिसे कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा संचालित किया जाता है, अपने प्रशिक्षण इकोसिस्टम में एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल कर रहा है।

दिसंबर 2025 तक, SOAR (Skilling for AI Readiness) पहल में 1.34 लाख छात्रों और शिक्षकों ने नामांकन कराया। इस पहल के तहत, AI-Readiness कोर्सेस Microsoft, HCL Technologies और NASSCOM के सहयोग से चलाए जा रहे हैं, ताकि छात्रों और शिक्षकों को मूलभूत और व्यावहारिक एआई कौशल से परिपूर्ण किया जा सके।

राष्ट्रपति ने एआई-रेडीनेस के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए SOAR (Skilling for AI Readiness) के तहत #SkilltheNation चुनौती की शुरूआत की है।

  1. YUVAi (Youth for Unnati with AI): यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) द्वारा शुरू किया गया था, और इसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को एआई, तकनीकी और सामाजिक कौशल के साथ समावेशी रूप से सशक्त बनाना है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा शिक्षार्थियों को 8-विषयागत क्षेत्रों में एआई-प्रेरित समाधान खोजने और लागू करने का मंच प्रदान करना है, जो हैं:

YUVAi के आठ विषयगत क्षेत्र

कृषि

आरोग्य

शिक्षा

पर्यावरण

परिवहन

ग्रामीण विकास

स्मार्ट शहर

विधि और न्याय

  1. 'सभी के लिए युवा एआई': यह एक राष्ट्रीय मुफ्त कोर्स है, जिसका उद्देश्य एआई साक्षरता को जीवन कौशल के रूप में स्थापित करना और 1 करोड़ (10 मिलियन) नागरिकों को आधारभूत एआई कौशल से सशक्त बनाना है। यह पाठ्यक्रम 11 भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु) में FutureSkills Prime, iGOTKarmayogi, DIKSHA और दूसरे अन्य लोकप्रिय एड-टेक पोर्टल्स जैसे बड़े लर्निंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।
  1. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संगणनात्मक सोच(एआई और सीटी):कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संगणनात्मक सोच(एआई और सीटी) भविष्य के लिए तैयार शिक्षा के आवश्यक घटक हैं। ये सीखने, सोचने और पढ़ाने की अवधारणा को मजबूत करते हैं और धीरे-धीरे "सार्वजनिक भलाई के लिए एआई" (AI for Public Good) की दिशा में विकसित होकर आगे बढ़ेंगे। यह पहल एआई के नैतिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह प्रौद्योगिकी कक्षा 3 से शुरू होकर शुरूआती समय से प्राकृतिक रूप से पाठ्यक्रम में शामिल हो जाएगी।
  1. फ्यूचरस्किल्स प्राइम पहल: यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय(MeitY) और नैसकॉम के सहयोग से संचालित है और इसका उद्देश्य एआई, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में पेशेवरों का कौशल विकास करना है। यह पहल नेशनल ऑक्यूपेशनल स्टैंडर्ड्स(NOS) और नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क(NSQF) के अनुरूप है, जिससे सीखने वाले वह कौशल प्राप्त कर सकें जिसे नियोक्ता अत्यधिक मूल्यवान मानते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 25.3 लाख से अधिक पंजीकृत सीखने वाले और 3000+ कोर्स और पाथवे उपलब्ध हैं। यह पहल प्रत्यक्ष रूप से कार्यबल परिवर्तन में योगदान देता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की योग्यता और उत्पादकता बढ़ती है।
  1. इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स: इंडियाएआई मिशन(2024) के तहत शुरू किए गए इस पहल का उद्देश्य विभिन्न शिक्षा स्तरों अंडरग्रेजुएट से लेकर डॉक्टरेट तक लक्षित तरीके से एआई-कुशल पेशेवरों का मजबूत इकोसिस्टम बनाना है। इसकी मुख्य संरचनाओं में, UG, ड्यूल डिग्री, PG और PhD छात्रों के लिए फैलोशिप प्रोग्राम्स, एआई और डेटा लैब्स की स्थापना, विशेषीकृत कौशल-विकास पाठ्यक्रमों का विकास करना शामिल है।

दिसंबर 2025 तक, सरकार एआई से जुड़े कार्यों के लिए 500 PhD स्कॉलर्स, 5,000 पोस्टग्रेजुएट्स, और 8,000 अंडरग्रेजुएट्स को एआई से संबंधित कार्यों के लिए तैयार कर रही है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान(NIELIT) के माध्यम से 27 इंडियाएआई डेटा और एआई लैब्स टायर-2 और टायर-3 शहरों में स्थापित किए गए हैं, जहां एआई, डेटा क्यूरेशन, एनोटेशन, क्लीनिंग और अनुप्रयुक्त डेटा विज्ञान के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, 27 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 174-ITIs और पॉलिटेक्निक्स को अतिरिक्त इंडियाएआई डेटा और एआई लैब्स स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।

  1. स्किल इंडिया डिजिटल हब(एसआईडीएच): एमएसडीई ने 8. स्किल इंडिया डिजिटल हब(एसआईडीएच) की भी शुरूआत की है, जो कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसमें एआई और मशीन लर्निंग के पाठ्यक्रमों का विविध चयन उपलब्ध है, जिसमें प्रारंभिक स्तर से लेकर उन्नत स्तर तक के प्रोग्राम शामिल हैं, ताकि सभी दक्षता स्तर के शिक्षार्थियों का समर्थन किया जा सके।

भविष्य के लिए सक्षम और समावेशी कार्यबल

भारत एआई से होने वाले बदलाव में सबसे आगे है, जहां प्रौद्योगिकी उत्पादकता, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मजबूत डिजिटल अवसंरचना, युवा कार्यबल और प्रगतिशील नीतियों के साथ, देश समावेशी विकास के लिए एआई का प्रभावी उपयोग करने के लिए अच्छी स्थिति में है। सरकार का यह एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि एआई रोजगार योग्यता बढ़ाए और विभिन्न क्षेत्रों में कौशल अंतर को कम करे। प्रौद्योगिकी को समावेशन के साथ जोड़कर, भारत एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बना रहा है।

संदर्भ

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