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08/16/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/16/2026 00:15

Himachal Monsoon 2026: मानसून ने हिमाचल में मचाई तबाही, 118 सड़कें बंद; नुकसान 972 करोड़ के पार; 79 मौतें

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Himachal Monsoon 2026: मानसून ने हिमाचल में मचाई तबाही, 118 सड़कें बंद; नुकसान 972 करोड़ के पार; 79 मौतें

Sun, 16 Aug 2026 11:02 AM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 16 Aug 2026 11:02 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश से जनजीवन प्रभावित है। 16 अगस्त सुबह तक प्रदेश में 118 सड़कें, 216 पेयजल योजनाएं और 19 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। मंडी में सबसे ज्यादा 48 और कुल्लू में 32 सड़कें बंद हैं। 30 जून से 15 अगस्त तक प्राकृतिक आपदाओं में 79 लोगों की मौत हुई, जबकि सड़क हादसों में 104 जानें गईं। मानसून से कुल नुकसान करीब 972.64 करोड़ रुपये दर्ज हुआ है।

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हिमाचल मानसून 2026 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार बारिश से पहाड़ी जिलों में सड़कें बंद होने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल योजनाओं के प्रभावित होने का सिलसिला जारी है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की 16 अगस्त सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में प्रदेश में 118 सड़कें बंद, 19 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित और 216 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। एक दिन पहले शाम की रिपोर्ट में बंद सड़कों की संख्या 103 थी। यानी कुछ ही घंटों में 15 और सड़कें प्रभावित हो गईं।

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मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें बंद
बारिश से सबसे अधिक असर मंडी जिले में देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 48 सड़कें बंद हैं। इनमें सराज में 26, थलौट में पांच, सुंदरनगर में चार, जोगिंद्रनगर में एक, पधर में नौ, धर्मपुर में एक और सरकाघाट में दो सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा गोहर में तीन और करसोग में नौ सड़कें भी बंद बताई गई हैं।
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मंडी के बाद कुल्लू में 32 सड़कें बंद हैं। बंजार में 12, कुल्लू में आठ, आनी में चार और निरमंड में आठ सड़कें प्रभावित हैं। चंबा में 11, सिरमौर में आठ, शिमला में सात और कांगड़ा में छह सड़कें बंद हैं। लाहौल-स्पीति में दो और ऊना में चार सड़कें भी प्रभावित हैं।

बिजली से ज्यादा पानी की योजनाएं प्रभावित
बारिश और भूस्खलन का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। प्रदेश में 216 पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। वहीं 19 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर बाधित बताए गए हैं। राज्य स्तर पर यह स्थिति बताती है कि बारिश के बाद बहाली का दबाव सिर्फ लोक निर्माण विभाग पर नहीं, बल्कि जल शक्ति और बिजली विभाग पर भी बढ़ा है।
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मानसून में अब तक 79 लोगों की आपदा से मौत
मानसून सीजन की व्यापक तस्वीर और भी चिंताजनक है। 30 जून से 15 अगस्त 2026 तक की संचयी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण 79 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन, बाढ़, डूबने, बिजली गिरने, आग, सांप के काटने, पेड़ या चट्टान से गिरने और अन्य घटनाएं शामिल हैं। जिलेवार आंकड़ों में चंबा में नौ, कांगड़ा में 13, कुल्लू में नौ, लाहौल-स्पीति में 14, मंडी में आठ, शिमला में 11 और सिरमौर में सात मौतें दर्ज हैं। हमीरपुर में दो, किन्नौर में दो, सोलन में एक और ऊना में तीन लोगों की जान गई है।

सड़क हादसों में 104 मौतें अलग से दर्ज
रिपोर्ट में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से हुई मौतों के अलावा सड़क दुर्घटनाओं में 104 मौतें भी अलग से दर्ज की गई हैं। चंबा और सिरमौर में सड़क हादसों में 16-16 मौतें दर्ज हैं, जबकि कुल्लू में 14, कांगड़ा में 10, सोलन में 10 और ऊना में नौ मौतें हुई हैं।
97 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान
मानसून सीजन के दौरान प्रदेश को हुए नुकसान का सरकारी आंकड़ा भी बेहद बड़ा है। 15 अगस्त तक की संचयी रिपोर्ट में कुल नुकसान 97,263.91 लाख रुपये, यानी करीब 972.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। इसमें सार्वजनिक और निजी संपत्ति समेत विभिन्न विभागों तथा अन्य क्षेत्रों को हुए नुकसान को शामिल किया गया है।

सबसे अधिक नुकसान के आंकड़ों में सार्वजनिक संपत्तियों और विभागीय ढांचे को हुए नुकसान का बड़ा हिस्सा शामिल है। रिपोर्ट में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास समेत कई क्षेत्रों में नुकसान दर्ज किया गया है।

पहाड़ों में बारिश का असर सबसे गहरा
ताजा रिपोर्ट से साफ है कि मानसून का दबाव प्रदेश के पहाड़ी जिलों पर सबसे ज्यादा है। मंडी और कुल्लू में बड़ी संख्या में सड़कें बंद हैं, जबकि चंबा, शिमला और सिरमौर में भी यातायात प्रभावित है। ऐसे में बारिश थमने के बाद भी लोगों के सामने सड़क संपर्क बहाल होने, पेयजल योजनाओं को दोबारा चालू करने और बिजली आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार रहेगा। प्रदेश में मानसून अभी पूरी तरह विदा नहीं हुआ है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज और बारिश की तीव्रता यह तय करेगी कि मौजूदा नुकसान का आंकड़ा यहीं थमता है या पहाड़ों की मुश्किलें और बढ़ती हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on August 16, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 16, 2026 at 06:15 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]