Amar Ujala Ltd

09/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/08/2026 17:01

ब्रिक्स का आकार बढ़ा, पर घटी एकता: साझा सुर की राह कठिन; क्या भारत सभी सदस्यों के बीच सहमति बना पाएगा

{"_id":"6aa08deb9ef3c6290704bfb3","slug":"brics-expands-but-unity-declines-finding-a-common-voice-gets-harder-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रिक्स का आकार बढ़ा, पर घटी एकता: साझा सुर की राह कठिन; क्या भारत सभी सदस्यों के बीच सहमति बना पाएगा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}

ब्रिक्स का आकार बढ़ा, पर घटी एकता: साझा सुर की राह कठिन; क्या भारत सभी सदस्यों के बीच सहमति बना पाएगा?

आशुतोष भाटिया
Updated Wed, 09 Sep 2026 04:06 AM IST
सार

ब्रिक्स का कुनबा बढ़ा है, लेकिन इसके साथ देशों के बीच मतभेद भी गहरे हुए हैं। मई की बैठक में संयुक्त बयान तक नहीं बन पाया था। अब सवाल है कि शिखर सम्मेलन में भारत इन मतभेदों के बीच सभी देशों को साथ ला पाएगा? पढ़िए रिपोर्ट

विज्ञापन
ब्रिक्स 2026 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
  • Link Copied

विस्तार

आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले कूटनीतिक हलकों में यह सवाल सबसे अहम है कि क्या ब्रिक्स देश अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे। इस चिंता की मुख्य वजह यह है कि भारत की अध्यक्षता में मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में तमाम कोशिशों के बावजूद किसी संयुक्त घोषणापत्र पर आम सहमति नहीं बन पाई थी। ब्रिक्स पारंपरिक रूप से सर्वसम्मति से काम करता है, लेकिन असहमति इस बात का संकेत है कि जैसे-जैसे इसका कुनबा बढ़ा है, वैसे-वैसे इसके भीतर अंतर्विरोध भी गहरे हुए हैं।
विज्ञापन


क्यों फंसा था पेंच? : विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, फलस्तीन मुद्दे और लाल सागर में नौवहन सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर सदस्य देशों के बीच तीखा मतभेद देखने को मिला था। इस गतिरोध के केंद्र में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात थे। ईरान ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर कड़ी भाषा की मांग की, जबकि यूएई समेत कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई। ईरान ने फिलिस्तीन और लाल सागर से जुड़े कुछ प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। नतीजतन संयुक्त बयान के स्थान पर भारत को अध्यक्षीय बयान से ही संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: दिल्ली नहीं, गुजरात में होगा 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह: उद्धव ने सरकार पर साधा निशाना; क्या कहा?
विज्ञापन
विज्ञापन


विस्तारित कुनबे की जटिलताएं
ब्रिक्स में अब केवल पांच पारंपरिक देश- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका- के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया भी जुड़ चुके हैं। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की नुमाइंदगी करने वाले इस विस्तारित मंच का आकार जितना बढ़ा है, कूटनीति के पेचीदा मामलों पर आमराय कायम करना उतना ही कठिन होता गया है। संगठन के भीतर अलग-अलग सामरिक गठबंधनों से जुड़े देशों के हित टकराते हैं, तो सहमति तलाशना कठिन साबित होता है।

संतुलन साधने की परीक्षा
ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहे भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। भारत की अध्यक्षता का मुख्य फोकस लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के एजेंडे के तहत वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करना है। साथ ही आर्थिक-तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ते ध्रुवीकरण के बीच भारत को यह सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि ब्रिक्स किसी एकपक्षीय गुट के रूप में उभर कर न आए। इसकी बजाय विकासशील देशों के आर्थिक हितों का मंच बना रहे।
Amar Ujala Ltd published this content on September 09, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 08, 2026 at 23:01 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]