03/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/11/2026 09:14
इस वर्ष कोयले का उत्पादन और आपूर्ति खपत से अधिक बनी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप तापीय ऊर्जा संयंत्रों और कोयला खदानों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, गैर-विनियमित क्षेत्र को आपूर्ति पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14% अधिक रही है।
सीआईएल की खदानों में कोयले का भंडार 1 अप्रैल, 2025 को 106.78 मीट्रिक टन था। यह9 मार्च, 2026 को बढ़कर 121.39 मीट्रिक टन हो गया है। इसके अलावा, एससीसीएल की खदानों में लगभग 6.07 मीट्रिक टन कोयला, कैप्टिव/वाणिज्यिक खदानों में 15.12 मीट्रिक टन और लगभग 14 मीट्रिक टन कोयला परिवहन के लिए उपलब्ध है। कुल मिलाकर यह भंडार अब तक के उच्चतम स्तर 156.58 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह कोयले का भंडार बिजली संयंत्रों में पहले से उपलब्ध कोयले के अतिरिक्त है, जो 9 मार्च, 2026 तक लगभग 54.05 मीट्रिक टन है , जो वर्तमान खपत दर के अनुसार लगभग 24 दिनों के लिए पर्याप्त है।
देश में उपलब्ध कोयले का कुल भंडार लगभग 210 मीट्रिक टन है, जो लगभग 88 दिनों के लिए पर्याप्त होगा।
देश में कोयले का उत्पादन समान गति से जारी है, जिससे खदानों में भंडार बढ़ता जा रहा है, ताकि रेलवे की सहायता से उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुसार आपूर्ति बनाए रखा जा सके।
कोयला मंत्रालय निरंतर नीतिगत सुविधा, गहन प्रदर्शन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वित जुड़ाव से एक स्थिर और प्रदर्शन-संचालित वातावरण बनाने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन को बनाए रखना और देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है, जिससे 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान दिया जा सके।
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