11/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/31/2026 20:10
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आज के समय स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर बैंकिंग, खरीदारी और मनोरंजन तक कई जरूरी काम के लिए यह उपयोग में आ रहा है। वहीं पिछले कुछ समय से नया स्मार्टफोन खरीदना लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। पहले जो फोन कम कीमत में मिल जाते थे अब उनके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
एक रिसर्च के मुताबिक 2026 में अब तक भारत में स्मार्टफोन की कीमतों में दुनिया के अन्य बाजारों के मुकाबले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश में स्मार्टफोन की औसत खुदरा कीमतें 21 फीसदी बढ़ गई हैं। यह बढ़ोतरी एशिया प्रशांत क्षेत्र में 19 फीसदी, मध्य पूर्व और अफ्रीका में 18 फीसदी और लैटिन अमेरिका में 16 फीसदी रही है। इस आंकड़े से साफ है कि भारत में स्मार्टफोन खरीदना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी का असर बजट से लेकर महंगे स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ रहा है।
बाजार में जब इन चिप्स की उपलब्धता कम होती है, तो इनकी कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं। इसका सीधा असर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों की लागत पर पड़ता है। रिपोर्ट की मानें तो पहले स्मार्टफोन की कुल उत्पादन लागत में मेमोरी का हिस्सा करीब 12 फीसदी था, जो अब बढ़कर 40 से 45 फीसदी तक पहुंच सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए फोन की पुरानी कीमत बनाए रखना काफी मुश्किल हो रहा है।
स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर बजट फोन पर देखने को मिल रहा है। 10 हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन औसतन करीब 32 फीसदी महंगे हो गए हैं। इसकी वजह यह है कि कम कीमत वाले फोन की कुल उत्पादन लागत में मेमोरी चिप्स का हिस्सा ज्यादा होता है। बजट सेगमेंट के स्मार्टफोन की कीमत बढ़न से इनकी मांग भी प्रभावित हुई है। 2026 की पहली छमाही में इस श्रेणी के स्मार्टफोन की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 65 फीसदी गिर गई। वहीं 10 हजार से 15 हजार रुपये वाले मिड-रेंज फोन की बिक्री में भी 20 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
वहीं 20 हजार रुपये से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की बिक्री में बढ़ोतरी जारी रही। इसकी एक वजह यह है कि इन फोन की शुरुआती कीमत पहले से ही ज्यादा होती है। इस कारण लागत बढ़ने का असर ग्राहकों पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। इसके अलावा पुराने फोन के बदले छूट और बिना ब्याज वाली ईएमआई जैसी सुविधाओं से ग्राहकों को फोन खरीदना आसान हो जाता है। इससे महंगे स्मार्टफोन की मांग बनी हुई है।
भारत में बड़ी संख्या में स्मार्टफोन की असेंबलिंग होती है। हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात ये भी है कि इन स्मार्टफोन के कई जरूरी पार्ट्स दूसरे देशों से आयात किए जाते हैं। इनमें प्रोसेसर, डिस्प्ले, मेमोरी चिप्स और कैमरा सेंसर जैसे महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं। वहीं जब भारतीय रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरती है या आयात की लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को इन पार्ट्स को खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इस बढ़ी हुई लागत का असर स्मार्टफोन की कुल उत्पादन लागत पर पड़ता है। इस कारण कंपनियां इसकी भरपाई के लिए फोन की कीमतें बढ़ा सकती हैं। यह भी स्मार्टफोन की कीमत बढ़ने की वजह है।
कुल मिलाकर स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे एआई की बढ़ती मांग, मेमोरी चिप्स की महंगाई और आयात की लागत जैसे कई कारण हैं। इनका सीधा असर स्मार्टफोन बाजार पर देखने को मिल रहा है। इस कारण ग्राहकों के लिए नया फोन खरीदना पहले के मुकाबले महंगा हो गया है। अगर आप भी नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर फैसला लेना जरूरी है। वहीं कंपनियों के सामने भी यह चुनौती है कि वे इस बढ़ती लागत के बीच ग्राहकों को किफायती स्मार्टफोन कैसे उपलब्ध करा सकती हैं।