03/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/11/2026 08:49
प्रौद्योगिकी की सभी तक पहुंच और नागरिकों को सशक्त बनाने की प्रधानमंत्री की कल्पना के अनुरूप, सरकार ने जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
इस कार्यक्रम के माध्यम से, भारत ने तीन-आयामी रणनीति का उपयोग करके डिजिटल विभाजन को पाटा है: इंटरनेट तक पहुँच बढ़ाना, इंटरनेट को किफायती (सस्ता) बनाना और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करना। इसके परिणामस्वरूप समावेशी डिजिटल विकास हुआ है।
Under the leadership of PM @narendramodi Ji, Digital India is advancing digital inclusion through greater access, affordability & strong Digital Public Infrastructure. pic.twitter.com/zN9VoBLZTl
- Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) March 11, 2026आज, भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच विशिष्ट स्थान रखता है जिसने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को सफलतापूर्वक लागू किया है। वास्तव में, हाल ही में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा था कि भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी अन्य देश ने नहीं बनाया है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम नीचे दिए गए हैं :
क. इंटरनेट तक पहुंच बढ़ाना :
पिछले दशक में इंटरनेट तक पहुंच कई गुना बढ़ी है।
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वर्ष |
2014 |
2025 |
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इंटरनेट कनेक्टिविटी |
25 करोड़ |
103 करोड़ |
(स्रोत : ट्राई)
4जी और 5जी नेटवर्क के तेजी से विस्तार, ऑप्टिकल फाइबर केबल के विशाल नेटवर्क और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देने के परिणामस्वरूप इंटरनेट तक पहुँच में यह व्यापक वृद्धि हुई है।
ख. इंटरनेट को किफायती (किफायती) बनाना
भारत में डेटा की दरें दुनिया में सबसे कम हैं। निम्नलिखित तालिका विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों से उपलब्ध शुल्कों की तुलना करती है:
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देश |
प्रति 1 जीबी अनुमानित लागत(अमेरिकी डॉलर) |
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भारत |
~ 0.08 - 0.10 (सबसे कम) |
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बांग्लादेश |
~ 0.23-0.34 |
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नेपाल |
~ 0.27-0.43 |
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श्रीलंका |
~ 0.25-0.35 |
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पाकिस्तान |
~ 0.12-0.18 |
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फ्रांस |
~ 0.16-0.20 |
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जर्मनी |
~ 2.14 |
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वैश्विक औसत |
~ 2.59 |
जैसा कि ऊपर से स्पष्ट है, भारत का टेलीकॉम शुल्क वैश्विक औसत से25 गुना कम हैं। यह प्रधानमंत्री द्वारा टेलीकॉम क्षेत्र में लाई गई पारदर्शिता के कारण संभव हो पाया है।
ग. डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करना
भारत ने एक अनूठा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया है, जिसने हमारे लोगों के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल समाधानों को सक्षम बनाया है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) : यूपीआई ने46 करोड़ (460 मिलियन) से अधिक उपयोगकर्ताओं और हर महीने अरबों लेनदेन के साथ बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान को अपनाने में सक्षम बनाया है। यह प्लेटफॉर्म6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवा प्रदान करता है और685 बैंकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन गई है।
अतः, इस तीन-आयामी रणनीति के परिणामस्वरूप पिछले एक दशक में हमारे देश में समावेशी डिजिटल वृद्धि हुई है।
जन सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए सुरक्षा उपाय
केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को सार्वजनिक आपातकाल और सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए इंटरनेट सेवाओं के अस्थायी निलंबन के आदेश जारी करने का अधिकार है। यह दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 और इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।
यह जानकारी आज लोकसभा में केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने दी।
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