04/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/12/2026 02:29
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में "विज्ञान और प्रौद्योगिकी उपायों के माध्यम से जनजातीय जीवन में परिवर्तन - भाषा, आस्था और संस्कृति का संरक्षण" सम्मेलन का उद्घाटन किया।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan inaugurated a conference titled "Transformation of Tribal Lives through Science and Technological Interventions - Preserving Language, Faith and Culture" at Bharat Mandapam, New Delhi today.
Addressing the gathering, the Vice President… pic.twitter.com/1WBRsH5ZPe
इस सम्मेलन का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने उत्तर पूर्वी प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं प्रसार केंद्र (नेक्टर) और आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल, देहरादून के सहयोग से किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्मेलन ने पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक सोच और तकनीकी प्रगति की शक्ति को खूबसूरती से प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि जब आधुनिक विज्ञान भाषा, आस्था और संस्कृति के साथ सामंजस्य से काम करता है, तो यह संरक्षण और सशक्तिकरण की एक शक्ति बन जाता है।
उपराष्ट्रपति ने जनजातीय समुदायों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत में लगभग 1.4 लाख जनजातीय गाँव हैं जिनमें देश की लगभग 9 प्रतिशत आबादी रहती है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों के पास अमूल्य पारंपरिक ज्ञान है जो जैव विविधता और वन संसाधनों के सतत उपयोग में सहायक है। उन्होंने आगे कहा कि सदियों से इन समुदायों ने भारत की प्राचीन संस्कृति, आस्था और सभ्यतागत विरासत को संरक्षित रखा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में हरित आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने जनजातीय समुदायों के डिजाइन, वस्त्र और रंग संयोजन में असाधारण कौशल की भी सराहना की। यह कौशल पीढ़ियों से संरक्षित है।
विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत @ 2047 का मार्गदर्शक सिद्धांत "विकास भी, विरासत भी" है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आधुनिक विकास और परंपराओं का संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं।
उपराष्ट्रपति ने 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड राज्यों के गठन का समर्थन किया था । इससे जनजातीय उत्थान में योगदान मिला। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे जनजातीय समुदायों के लिए न्याय, सम्मान और अवसर के प्रति नैतिक प्रतिबद्धता बताया।
उपराष्ट्रपति ने झारखंड के उलिहातु में भगवान बिरसा मुंडा के जन्मस्थान की अपनी यात्राओं के बारे में भी बात की और जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को राष्ट्रीय चेतना में सबसे आगे लाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की।
सरकार की प्रमुख पहलों के बारे में बताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री-जनमान कार्यक्रम का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 7,300 किलोमीटर लंबी 2,400 से अधिक सड़कों और 160 से अधिक पुलों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने धरती आभा - जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें 63,000 से अधिक जनजातीय गांवों में स्वच्छ जल, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और स्थायी आजीविका उपलब्ध कराई जाती है।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और संपर्क में हुए महत्वपूर्ण विकास का उल्लेख किया और समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल को रजत जयंती पर बधाई देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इस संस्थान का उद्घाटन 25 वर्ष पहले पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। उन्होंने उत्तराखंड, उत्तर-पूर्व और लद्दाख के जनजातीय बच्चों के लिए आशा की किरण बनकर उभरे इस स्कूल की सराहना की और बताया कि इस संस्थान में 2,000 से अधिक जनजातीय छात्रों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिला है।
इस अवसर पर, दिल्ली के उपराज्यपाल, श्री तरणजीत सिंह संधू; अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री, श्री चौना मीन; विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, प्रो. अभय करंदीकर; और पूर्व सांसद एवं आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल के संस्थापक ट्रस्टी श्री तरूण विजय भी उपस्थित थे।
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