09/30/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/30/2026 05:32
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देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक टाटा समूह में जारी बोर्डरूम विवाद अब एक नया और गंभीर मोड़ ले चुका है। टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत नियंत्रण रखने वाली प्रमुख चैरिटेबल संस्था 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' (एसडीटीटी) के कामकाज और प्रशासन को लेकर ट्रस्टी व टाटा संस के नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है।
वेणु श्रीनिवासन ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि 16 सितंबर को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) द्वारा सर्कुलर रिजॉल्यूशन नंबर 107 जारी किया गया था, जिसका उद्देश्य उन्हें टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग पर चर्चा या मतदान करने से रोकना था। श्रीनिवासन के अनुसार, यह प्रयास उनकी स्वतंत्र राय और वोट देने के अधिकार को दबाने और कुछ ही ट्रस्टियों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति को केंद्रित करने की कोशिश थी।
वेणु श्रीनिवासन ने चेतावनी दी है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और टाटा ट्रस्ट्स का टाटा संस के व्यावसायिक व रणनीतिक मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप लगातार बढ़ रहा है।
1 सितंबर 2025 से लागू महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट (MPT Act), 1950 में हुए संशोधनों का हवाला देते हुए श्रीनिवासन ने ट्रस्ट के प्रशासन की तत्काल जांच की मांग की है।
वर्तमान ट्रस्टी: वर्तमान में एसडीटीटी के ट्रस्टियों में नोएल एन. टाटा (फरवरी 2022 से आजीवन ट्रस्टी), वेणु श्रीनिवासन (कार्यकाल 12 नवंबर 2028 तक), विजय सिंह (13 जुलाई 2027 तक), डारियस खंबाटा (9 नवंबर 2026 तक), नेविल एन. टाटा (12 नवंबर 2028 तक) और भास्कर भट (12 नवंबर 2028 तक) शामिल हैं।
श्रीनिवासन की ओर से मांगी गई राहत: श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से मांग की है कि नोएल एन. टाटा को टाटा संस के किसी भी आम सम्मेलन या मतदान से जुड़े फैसलों से अलग रहने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, जांच लंबित रहने तक एसडीटीटी के बोर्ड के पुनर्गठन को फ्रीज करने और ट्रस्टियों के निलंबन या हटाने जैसी सख्त कार्रवाई करने की अपील की गई है।
यह विवाद बेहद संवेदनशील इसलिए है क्योंकि वेणु श्रीनिवासन दोनों संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं- वह टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी भी हैं और टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स के नामांकित निदेशक भी हैं। ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ती आंतरिक कलह अब सीधे तौर पर होल्डिंग कंपनी के व्यावसायिक निर्णयों, शापूरजी पालोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी के मुद्दों और शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग को प्रभावित कर रही है। यदि चैरिटी कमिश्नर इस मामले में औपचारिक जांच शुरू करते हैं, तो टाटा समूह के 90 साल से अधिक पुराने चैरिटेबल मॉडल के गवर्नेंस ढांचे की गहन समीक्षा होना तय है।