Amar Ujala Ltd

09/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/11/2026 00:06

अंतरराष्ट्रीय अध्ययन: क्या हफ्ते में 20 मिनट की बातचीत से बेहतर होती है पढ़ाई? रिपोर्ट में सामने आई अहम बात

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अंतरराष्ट्रीय अध्ययन: क्या हफ्ते में 20 मिनट की बातचीत से बेहतर होती है पढ़ाई? रिपोर्ट में सामने आई अहम बात

Fri, 11 Sep 2026 10:30 AM IST
शाहीन परवीन अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शाहीन परवीन Updated Fri, 11 Sep 2026 10:30 AM IST
सार

स्कूल लंबे समय तक बंद रहने पर भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखी जा सकती है। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षक और बच्चे के बीच हफ्ते में करीब 20 मिनट की नियमित बातचीत सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

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अंतरराष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट - फोटो : AI
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विस्तार

स्कूल लंबे समय तक बंद हों तो बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए महंगी ऑनलाइन कक्षाएं ही जरूरी नहीं हैं। शिक्षक की हर सप्ताह महज 20 मिनट की फोन कॉल भी बच्चों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार कर सकती है। खासकर तब, जब कॉल के साथ पढ़ाई से जुड़े छोटे टेक्स्ट मैसेज भी भेजे जाएं। नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से यह बात सामने आई है। नेचर में प्रकाशित अध्ययन में भारत समेत पांच देशों के 16 हजार से अधिक परिवारों को शामिल किया गया। भारत, केन्या, नेपाल, फिलीपींस और युगांडा में किए गए अलग-अलग रैंडमाइज्ड ट्रायल में अधिकांश बच्चे तीसरी से पांचवीं कक्षा के थे। केन्या में पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को भी शामिल किया गया।

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बच्चों को तीन समूहों में बांटा गया। पहले समूह को कोई अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता नहीं मिली। दूसरे समूह को गणित और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने वाले छोटे टेक्स्ट मैसेज भेजे गए। तीसरे समूह को यही मैसेज भेजने के साथ हर सप्ताह शिक्षक की फोन पर ट्यूशन दी गई। यह सहायता आठ या 12 सप्ताह तक जारी रही। फोन पर होने वाली ट्यूशन की खासियत यह थी कि शिक्षक किसी तय पाठ को एक ही तरीके से सभी बच्चों को नहीं पढ़ाते थे।
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पहले यह समझा जाता था कि बच्चा क्या जानता है और कहां कठिनाई हो रही है। फिर उसी स्तर से पढ़ाई शुरू की जाती थी। बच्चे की समझ बढ़ने के साथ सवालों और पढ़ाई का स्तर भी आगे बढ़ाया जाता था। पांचों देशों के आंकड़ों को एक साथ देखने पर फोन पर शिक्षक की ट्यूशन और टेक्स्ट मैसेज पाने वाले बच्चों की सीखने की क्षमता में सबसे ज्यादा सुधार देखा गया। केवल टेक्स्ट मैसेज पाने वाले बच्चों को भी लाभ हुआ, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत कम था।
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लंबे समय तक स्कूल बंद होने की स्थिति में बेहद मददगार साबित होगा यह तरीका

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शिक्षा शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक नोआम एंग्रिस्ट के मुताबिक, महामारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति में स्कूल लंबे समय तक बंद रहने पर यह कम लागत वाला विकल्प हो सकता है। अध्ययन में मुख्य रूप से छोटे बच्चों और गणित सीखने पर ध्यान दिया गया था। शिक्षक की नियमित कॉल को गंभीरता से लेना और बच्चे को उसमें सक्रिय रूप से शामिल कराना पढ़ाई के नुकसान को कम करने का सरल और कम खर्चीला तरीका हो सकता है।

अभिभावकों के लिए भी अहम संकेत:

अध्ययन का एक व्यावहारिक संदेश अभिभावकों के लिए भी है। स्कूल बंद होने या नियमित कक्षाएं बाधित होने की स्थिति में शिक्षक की फोन कॉल को महज एक औपचारिक बातचीत न समझें। बच्चे को कॉल के समय उपलब्ध कराना, शिक्षक से बात करने देना और जरूरत हो तो बताए गए अभ्यास को पूरा करवाना इस तरह की सहायता का लाभ बढ़ा सकता है। यह तरीका विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास तेज इंटरनेट, कंप्यूटर या महंगी ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा नहीं है। मोबाइल फोन की व्यापक उपलब्धता के कारण शिक्षक बच्चे से सीधे जुड़ सकता है और उसकी समस्या के अनुसार मदद कर सकता है।

Amar Ujala Ltd published this content on September 11, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 11, 2026 at 06:07 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]