08/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/09/2026 04:52
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अगली औद्योगिक क्रांति जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित होगी। इसके विपरीत, पिछली औद्योगिक क्रांति सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से प्रेरित थी, जिसमें भारत की भागीदारी अपेक्षाकृत देर से हुई थी।
एक मीडिया सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास जैव प्रौद्योगिकी के लिए समर्पित नीति है, यानी बीआईओई3। हमारे पास राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, भारतीय एआई मिशन भी हैं और हमने अंतरिक्ष और अन्य अग्रणी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो पहले लगभग न के बराबर थी, बढ़कर लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है और अगले आठ से नौ वर्षों में इसके 40-45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सम्मेलन में मीडिया से बातचीत की, जिसमें प्रौद्योगिकी विकासकर्ता, उद्योगपति और अन्य हितधारक शामिल थे। चर्चा का केंद्र बिंदु भारत का वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरना, तकनीकी परिवर्तन की तीव्र गति, नवाचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और उभरते क्षेत्रों में अवसरों पर था। मंत्री ने डिजिटल उपकरण पुरस्कार विजेताओं को भी बधाई दी।
मंत्री जी ने कहा कि भारत की तकनीकी यात्रा में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है और देश अब कई क्षेत्रों में वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य कर रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने चंद्रयान मिशन द्वारा चंद्रमा पर जल अणुओं के साक्ष्य की खोज को वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान में देश के योगदान का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में मानवीय प्रतिभा या वैज्ञानिक क्षमता की कभी कमी नहीं रही, बल्कि आवश्यकता एक ऐसे अनुकूल नीतिगत वातावरण की है जो इन क्षमताओं को परिणामों में परिवर्तित कर सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे जैव प्रौद्योगिकी, चक्रीय अर्थव्यवस्था, पुनर्चक्रण और अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों के साथ-साथ पारंपरिक विनिर्माण की ओर अग्रसर हो रही है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक परिवर्तन का अगला चरण एआई और जैव प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित होने की अधिक संभावना है।
उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही इस परिवर्तन का हिस्सा है और समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति वाले कुछ चुनिंदा देशों में से एक है। सरकार की बीआईओई3 पहल (अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यावरण के लिए जैव प्रौद्योगिकी) का उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा विज्ञान, कृषि और खाद्य उत्पादन को तेजी से प्रभावित करेगी और आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने का जिक्र करते हुए कहा कि इस निर्णय ने देश के भीतर क्षमताओं को विकसित करने के लिए एक अनुकूल नीतिगत ढांचे की क्षमता को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो पहले लगभग न के बराबर थी, अब लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गई है और तेजी से विस्तार कर रही है, जिसके अगले आठ से नौ वर्षों में 40-45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
मंत्री जी ने इस परिवर्तन के उदाहरण के रूप में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के उदय का जिक्र किया, जिनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन्होंने रॉकेट विकसित किए हैं और कुछ ही वर्षों में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा और क्षमता दोनों हैं, लेकिन उस क्षमता का दोहन करने के लिए आवश्यक अनुकूल वातावरण अब तैयार किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार उन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र को अधिकाधिक शामिल कर रही है जो पहले निजी उद्यम के दायरे से काफी हद तक बाहर थे। परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम से नए अवसर तो पैदा होते हैं, लेकिन उद्योग जगत को उभरते क्षेत्रों के लिए खुद को तैयार करने और आवश्यक क्षमताएं विकसित करने की भी आवश्यकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पास विजन 2047 से जुड़े अवसरों के लिए खुद को तैयार करने का सीमित समय है। यदि देश को वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करनी है, तो हर क्षेत्र को विकसित होना होगा और निजी क्षेत्र को नए क्षेत्रों में भाग लेने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस परिवर्तन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रही है।
मंत्री जी ने कहा कि प्रौद्योगिकी शिक्षा और अवसरों तक पहुंच को भी बदल रही है, विशेष रूप से बड़े महानगरों से बाहर रहने वाले युवाओं के लिए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के एक छात्र से हुई अपनी बातचीत को याद करते हुए, जिसने डिजिटल शिक्षण संसाधनों का उपयोग करके आईआईटी-जेईई परीक्षा उत्तीर्ण की थी, उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी ने उन शैक्षिक अवसरों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बना दिया है जो पहले प्राप्त करना मुश्किल था।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का विकास यह दर्शाता है कि नवाचार अब केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई युवा उद्यमी छोटे शहरों से भी उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी तक पहुंच और उसका प्रभावी उपयोग करने की क्षमता युवा भारतीयों के लिए नए अवसर उत्पन्न कर रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अप्रचलित कानूनों और प्रक्रियाओं को हटाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 2,000 अप्रचलित कानूनों को हटा दिया गया है, जिनमें वे प्रावधान भी शामिल हैं जो समाज और शासन में बदलाव के बावजूद पूर्ववर्ती युग से चले आ रहे थे।
मंत्री जी ने अविवाहित बेटियों के पारिवारिक पेंशन अधिकारों, महिला सरकारी कर्मचारियों के नामांकन अधिकारों और दस वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले ही मृत्यु हो जाने वाले कर्मचारियों के परिवारों के लिए पेंशन प्रावधानों से संबंधित सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने बड़ी संख्या में दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारी सत्यापन की आवश्यकता को समाप्त करने के निर्णय को भी याद दिलाया और कहा कि यह सुधार नागरिकों और युवाओं में अधिक विश्वास का प्रतीक है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2047 के लिए भारत की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए देश को एक अनुयायी की भूमिका से आगे बढ़कर एक ऐसे देश के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी जिसकी क्षमताओं और नवाचारों को अन्य देश अपना सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच व्यापक साझेदारी का आह्वान करते हुए मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले की शंकाओं को दूर करके आपसी सीख और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग को एक-दूसरे से सीखना चाहिए, प्रभावी पद्धतियों को अपनाना चाहिए और अधिक तालमेल के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत को अपनी व्यापक विकासात्मक, तकनीकी और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए ''संपूर्ण सरकार के साथ-साथ संपूर्ण राष्ट्र'' का दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होगा।
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