07/27/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/27/2026 08:31
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) ने हरियाणा विधानसभा सचिवालय के अनुवाद, प्रकाशन और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों के अधिकारियों के लिए एक बहुभाषी ए आई कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में एआई-आधारित भाषा प्रौद्योगिकियों को दिखाया गया और भाषा-प्रधान विधायी शासन को मजबूत करने, बहुभाषी विधायी कार्यों को बढ़ाने और अधिक समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं को सक्षम बनाने में उनकी भूमिका का पता लगाया गया।
इस कार्यशाला में विधानसभा सदस्यों, विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाकर यह पता लगाया गया कि बहुभाषी ए आई किस प्रकार विधायी कार्यप्रवाह को बढ़ा सकता है, विधायी जानकारी तक पहुंच आसान कर सकता है और विभिन्न भाषाओं में संचार को किसी बाधा के बिना सक्षम बना सकता है। सत्र में भाषा-प्रथम डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के निर्माण के भाषिनी के दृष्टिकोण, भाषा अब शासन और सार्वजनिक भागीदारी में बाधा नहीं रहेगी, पर प्रकाश डाला गया।
इस कार्यशाला में भाषिनी के बहुभाषी एआई समाधानों के बढ़ते इकोसिस्टम को दिखाया गया, जिसमें प्रतिभागियों को इसकी प्रमुख भाषा प्रौद्योगिकियों, स्वचालित वाक् पहचान (एएसआर), न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन (एनएमटी), टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर), लिप्यंतरण और बहुभाषी एपीआई से परिचित कराया गया। प्रतिभागियों को दिखाया गया कि कैसे इन क्षमताओं को सरकारी अनुप्रयोगों, डिजिटल प्लेटफार्मों और नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सहजता से विधायी प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और सुलभ बनाने के लिए एकीकृत किया जा सकता है।
भाषिनी टीम ने अपने ए आई-आधारित भाषा समाधानों का लाइव प्रदर्शन किया, जिससे प्रतिभागियों को बहुभाषी वाक् पहचान, अनुवाद, प्रतिलेखन और दस्तावेज़-आधारित तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। प्रदर्शनों में यह दिखाया गया कि बहुभाषी एआई किस प्रकार विधायी दस्तावेज़ीकरण, भाषा-समावेशी संचार, ज्ञान की सुलभता, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिक सहभागिता में सहायक होकर निर्वाचित प्रतिनिधियों और विधानसभा अधिकारियों को विभिन्न भाषाई समुदायों से अधिक प्रभावी ढंग से संवाद में सक्षम कर सकता है।
कार्यशाला में भाषा ए आई का उपयोग करके विधायी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने के अवसरों पर भी चर्चा की गई। इसमें आधिकारिक दस्तावेजों तक बहुभाषी पहुंच में सुधार, आवाज-आधारित संवाद को सक्षम बनाना और नागरिकों को उनकी भाषा में विधायी जानकारी सुलभ करना शामिल था। चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि ए आई-संचालित भाषा प्रौद्योगिकियां किस प्रकार पारदर्शिता, सुलभता और अधिक जन-भागीदारी को बढ़ावा देते हुए विधायी संस्थानों के डिजिटल परिवर्तन में सहयोग कर सकती हैं।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ श्री अमिताभ नाग ने बहुभाषी ए आई द्वारा संचालित भाषा-प्रधान डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के लिए भाषिनी के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासन में बदलाव लाने में स्वदेशी भाषा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर बल दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक नागरिक अपनी सर्वोत्तम समझ वाली भाषा में डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सके। उन्होंने शासन व्यवस्था में बहुभाषी ए आई को तेजी से अपनाने के लिए सरकारों, प्रौद्योगिकी भागीदारों और संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व पर भी बल दिया।
इस कार्यशाला ने शासन व्यवस्था में ए आई-संचालित भाषा प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की भाषिणी की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। यह भाषा-प्रधान विधायी प्रणालियों को सक्षम बनाने, बहुभाषी पहुंच को मजबूत करने और शासन को अधिक समावेशी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
हरियाणा विधानसभा के सचिव श्री राजीव प्रसाद ने कहा, "विधायी संस्थाओं द्वारा डिजिटल परिवर्तन को अपनाए जाने के साथ, प्रौद्योगिकी को आधिकारिक अभिलेखों की अक्षुण्णता से बिना समझौता सटीकता, दक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करना चाहिए। ए आई-सक्षम उपकरण प्रतिलेखन, अनुवाद और प्रलेखन को काफी सरल बना सकते हैं, जबकि विधायी कार्यवाही की गुणवत्ता और प्रामाणिकता को बनाए रखने में मानवीय विशेषज्ञता और सत्यापन अपरिहार्य बने हुए हैं।"
हरियाणा विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री हरविंदर कल्याण ने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवीय बुद्धिमत्ता को सशक्त करना चाहिए, न कि उसका स्थान लेना चाहिए। आवाज-प्रधान बहुभाषी प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी पूर्वक अपनाकर, विधायी संस्थाएं दक्षता बढ़ा सकती हैं, दस्तावेज़ीकरण को मजबूत कर सकती हैं और नागरिकों की पहुंच आसान कर सकती हैं, साथ ही यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि मानवीय निर्णय, अनुशासन और जवाबदेही प्रत्येक आधिकारिक प्रक्रिया के मूल में बनी रहे।"
हरियाणा विधानसभा के माननीय अध्यक्ष के सलाहकार श्री राम नारायण यादव ने कहा, "विधानसभा की कार्यवाही को लिखित रूप में दर्ज करने और दस्तावेजों का अनुवाद करने के लिए भाषिनी ए आई के उपयोग पर दी गई प्रस्तुति अत्यंत उपयोगी थी। लिखित रूप में सटीकता के लिए प्रकाशन विभाग को तथ्यों और भाषा पर विशेष ध्यान देना होगा, जबकि अनुवाद के लिए व्याकरण और उपयुक्त शब्दों के चयन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, ताकि दोनों कार्य सटीकता से संपन्न हो सकें।"
भाषिनी के डिजिटल इंडिया डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा, "भारत की विधानसभाएं ऐसा ज्ञान उत्पन्न करती हैं जो शासन और लोकतंत्र को आकार देता है। आवाज-आधारित, बहुभाषी ए आई को सक्षम बनाकर, भाषिनी विधायी संस्थानों को उनके दैनिक कार्यों को तेज, अधिक समावेशी और अधिक सुलभ बनाने में मदद कर रही है। रीयल-टाइम प्रतिलेखन और अनुवाद से लेकर बहुभाषी प्रकाशन, दस्तावेज़ प्रबंधन और नागरिक सहभागिता तक, हमारा लक्ष्य प्रत्येक सचिवालय को ऐसी ए आई से सशक्त बनाना है जो भारतीय भाषाओं में निर्बाध रूप से कार्य करें। हरियाणा विधानसभा के साथ हमारा सहयोग ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में एक और कदम है जो विधायी दक्षता को मजबूत करती है और यह सुनिश्चित करती है कि भाषा कभी भी शासन में बाधा न बने।"
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) के बारे में
डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के अंतर्गत आने वाला डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग (डीआईबीडी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अधीन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) द्वारा संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए भारत का राष्ट्रीय मंच है। आज, भाषिनी 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित करता है, 8 अरब से अधिक संचयी ए आई अनुमानों को सक्षम बनाता है, प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक ए आई अनुमानों को संसाधित करता है, और 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय ध्वनि भाषाओं और 35 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है, जिससे भाषा एआई के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना अधिक सुलभ हो जाती है।
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