02/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/11/2026 05:52
नैफिथ्रोमाइसिन का विकास वोकहार्ट समूह द्वारा किया गया है। यह एक नवीन मैक्रोलाइड है, इसे विशेष रूप से सामुदायिक रूप से होने वाले जीवाणु निमोनिया (सीएबीपी) के उपचार के लिए तैयार किया गया है। भारत में नैफिथ्रोमाइसिन के चरण III नैदानिक अध्ययन को जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा आंशिक रूप से समर्थित किया गया था। यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी, धारा 8के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सीएबीपी से पीड़ित वयस्कों (≥18वर्ष) के उपचार के लिए 400मिलीग्राम नैफिथ्रोमाइसिन टैबलेट की बिक्री और वितरण के लिए मेसर्स वोकहार्ट लिमिटेड को विपणन प्राधिकरण बनाया है।
सरकार स्वदेशी एंटीबायोटिक दवाओं की खोज और विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तपोषण और इकोसिस्टम समर्थन के माध्यम से अनुसंधान और विकास तथा नवाचार का समर्थन कर रही है। सरकार का समर्थन प्रारंभिक चरण के अनुसंधान और विकास, प्रारंभिक सत्यापन और उत्पादों के व्यावसायीकरण सहित अनुसंधान और विकास की पूरी प्रक्रिया को शामिल करता है। विशिष्ट प्रयास निम्नलिखित हैं:
स्वदेशी एंटीबायोटिक दवाओं के विकास से एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोध से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता मजबूत होगी। इससे उपचार में कठिनाई का सामना करने वाले/दवा प्रतिरोधी संक्रमणों के उपचार की क्षमता में सुधार होगा, प्रभावी और किफायती उपचारों तक पहुंच बढ़ेगी, आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा। इससे घरेलू अनुसंधान और उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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पीके/ केसी/ एसके