Amar Ujala Ltd

09/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/12/2026 03:15

इबोला प्रकोप: अब तक की सबसे भयानक महामारी बनने की कगार पर संक्रमण, आखिर कहां हो गई चूक

{"_id":"6aa4f22e3c525c5313004cb7","slug":"deadliest-ebola-outbreak-in-the-history-of-congo-worst-epidemic-ever-what-is-driving-the-continued-spread-2026-09-12","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इबोला प्रकोप: अब तक की सबसे भयानक महामारी बनने की कगार पर संक्रमण, आखिर कहां हो गई चूक?","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}

इबोला प्रकोप: अब तक की सबसे भयानक महामारी बनने की कगार पर संक्रमण, आखिर कहां हो गई चूक?

Sat, 12 Sep 2026 01:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 12 Sep 2026 01:38 PM IST
सार

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला का प्रकोप बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। 1 सितंबर तक 6,186 से ज्यादा मामले और 3,007 मौतें दर्ज हुईं। इलाज, जांच और निगरानी में सुधार के बावजूद संक्रमण जारी है।

विज्ञापन
इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
  • Link Copied

विस्तार

इबोला वायरस का संक्रमण अफ्रीकी देशों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है, विशेषतौर पर साउथ अफ्रीकी देश डेमोक्रैटिक रिपब्लिक कांगो (डीआरसी) इससे सबसे ज्यादा प्रभावित देखा जा रहा है। मार्च-अप्रैल के दौरान शुरू हुआ संक्रमण अब एक भयानक महामारी का रूप लेता जा रहा है। 15 मई 2026 को इबोला के मौजूदा प्रकोप की आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई थी, इसके बाद से लगातार संक्रमण का घातक रूप देखा जा रहा है।

विज्ञापन


1 सितंबर तक कांगो में 6,186 से ज्यादा पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं जबकि 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ एक स्थानीय स्वास्थ्य संकट नहीं रह गया है। डीआरसी के लिए यह अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है।
विज्ञापन


ऐसा नहीं है कि कांगों में पहली बार इबोला का संकट देखा जा रहा है। ये 17वां प्रकोप है। हालांकि इस बार मरने वालों की संख्या 2018 से 2020 के बीच आए पिछले बड़े प्रकोप से भी ज्यादा हो गई है। उस दौरान 3,481 मामले सामने आए थे और इनमें 2,299 लोगों की मौत हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


डीआरसी में सिर्फ चुनौती संक्रमण के बढ़ते मामलों की नहीं है। विशाल और दुर्गम इलाके, खराब सड़कें और गांवों तक इलाज-जांच की पहुंच सही तरीके से न होने के कारण ये संक्रमण खतरनाक रूप लेता जा रहा है।

विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि इबोला का प्रकोप अब बहुत 'नाजुक मोड़' पर पहुंच गया है। यह अब तक की सबसे भयानक महामारी बनने की कगार पर है।
इबोला का आतंक - फोटो : Amarujala.com/AI

बुंडिबुग्यो स्ट्रेन बना सबसे बड़ा खतरा

मेडिकल रिपोर्टस से पता चलता है कि करीब 5-6 महीनों से चल रहे इस प्रकोप के लिए बुंडिबुग्यो स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है। यहां संक्रमण की रोकथाम को लेकर फिलहाल चल रही कोशिशें इतनी पर्याप्त नहीं हैं कि वायरस का फैलना पूरी तरह रोका जा सके।

इबोला पर काम करने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी कहना है कि इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए अब और तेज और जमीनी स्तर पर काम करना होगा। अभी बुंडीबुग्यो के लिए कोई लाइसेंस-प्राप्त वैक्सीन या खास इलाज भी मौजूद नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस महामारी को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है इसके लिए चार कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है।

  • कांगो का कठिन भौगोलिक और मानवीय हालात वाला क्षेत्र।
  • प्रभावित क्षेत्रों से लोगों की लगातार आवाजाही।
  • स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन पर लोगों को कम भरोसा तथा सामुदायिक भागीदारी में भी कमजोरी।
  • बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ अभी तक कोई खास दवा या वैक्सीन उपलब्ध न होना।
इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

क्यों नियंत्रित नहीं हो पा रहा है ये संक्रमण?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह प्रकोप ऐसे इलाकों में फैल रहा है जहां हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। प्रभावित क्षेत्र बहुत बड़े और दूर-दराज के हैं। कई जगह सुरक्षा की स्थिति भी ठीक नहीं है। बारिश के मौसम में खराब सड़कों के कारण छोटी दूरी तय करने में भी पूरा दिन या उससे ज्यादा समय लग सकता है।

इसका सीधा असर मरीजों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के पहुंचने, जांच के सैंपल प्रयोगशाला तक लाने, संक्रमित लोगों की पहचान करने और समय पर इलाज शुरू करने पर पड़ता है।

  • दूसरी बड़ी चुनौती लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना है। खनन वाले इलाकों में काम करने वाले लोग लगातार एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। इससे संक्रमण के फैलने का खतरा तो रहता ही है साथ ही मामलों को ट्रैक करना भी मुश्किल हो रहा है।
  • तीसरी समस्या लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा कम होना भी है। इसका असर बीमारी की निगरानी पर सीधा पड़ता है। मौजूदा जांच से संकेत मिल रहे हैं कि बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों की पहचान ही नहीं हो पा रही है, जिससे उनसे अनजाने में दूसरे लोगों को संक्रमण होने का खतरा हो सकता है।
  • चौथी चुनौती वैज्ञानिक स्तर पर है। इबोला के बुंडिबुग्यो वायरस के कारण ये संक्रमण फैल रहा है। ये पहले फैलने वाले जायर इबोला वायरस की तुलना में ज्यादा खतरनाक है। बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ अभी कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशेष इलाज भी उपलब्ध नहीं है।
इबोला की चुनौतियां - फोटो : Amarujala.com/AI

संक्रमण की रफ्तार में कमी, फिर भी चुनौतियां

महामारी से जुड़े कुछ आंकड़े भी उम्मीद जगाते हैं।

बीमारी के फैलने की रफ्तार मापने वाली दर में मई के मुकाबले काफी गिरावट आई है। मई में यह संख्या करीब 4.0 थी। इसका मतलब था कि औसतन एक संक्रमित व्यक्ति से करीब चार अन्य लोग संक्रमित हो रहे थे। अब यह संख्या घटकर एक से थोड़ी ज्यादा रह गई है। संक्रमण फैलने की रफ्तार में बड़ी कमी आई है, हालांकि बीमारी अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है।

  • स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, संक्रमण की रोकथाम के लिए गांवों और स्थानीय समुदायों पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। डिजिटल तकनीक इस काम में मदद कर सकती है।
  • टीकाकरण की सुविधा भी बढ़ाने की जरूरत है। वैक्सीन और इलाज से जुड़े क्लिनिकल ट्रायल को तेजी से, लेकिन वैज्ञानिक नियमों और पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
  • इसके साथ ही दूसरे जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को इबोला के कारण बंद नहीं होने देना चाहिए। अगर इन दिनों में इबोला को लेकर जरा सी भी लापरवाही होती है तो पहले से ही मौजूद प्रतिकूल परिस्थितियां इसे सबसे खतरनाक महामारी बना देंगी।





--------------
स्रोत:
DR Congo's Ebola outbreak spreads to 7th province as cases, deaths mount


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

Amar Ujala Ltd published this content on September 12, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 12, 2026 at 09:15 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]