09/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/22/2026 20:16
Link Copied
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ग्रीनलैंड और डेनमार्क के नेताओं ने 22 सितंबर, मंगलवार को एक समझौता किया। यह समझौता ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य रणनीतिक और खनिज-समृद्ध द्वीप को लेकर चल रहे गतिरोध को सुलझाना है। यह समझौता न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ।
यह समझौता ट्रंप की उस मांग से कम है, जिसमें उन्होंने अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में अपनाने की बात कही थी। ट्रंप की यह मांग रूस और चीन की बढ़ती आर्कटिक उपस्थिति को रोकने के लिए थी। हालांकि, यह समझौता बर्फीले क्षेत्र में अधिक अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की अनुमति देता है। यह विकल्प तब सामने आया जब ग्रीनलैंड के नेताओं ने पूर्ण अमेरिकी अधिग्रहण का विरोध किया।
समझौते का जिक्र करते हुए ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में विश्व नेताओं को अपने भाषण में कहा कि यह समझौता अमेरिका को उस क्षेत्र की सुरक्षा और अन्य सभी आवश्यकताओं पर स्थायी नियंत्रण देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अमेरिकी विरोधी को ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति स्थापित करने या हमारी स्पष्ट लिखित स्वीकृति के बिना वहां संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन के साथ एक त्रिपक्षीय समारोह में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को कम करना है। यह ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। अमेरिका इस द्वीप पर अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर अपनी सुरक्षा हितों को मजबूत करना चाहता है। यह समझौता रूस और चीन की आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए एक कदम है। ग्रीनलैंड की खनिज संपदा भी इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने इस समझौते को "हमेशा के लिए कायम रहने वाला समझौता" बताया। उन्होंने कहा कि यह NATO गठबंधन के महत्व को रेखांकित करता है। यह ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार का भी सम्मान करता है। ग्रीनलैंड के नेताओं ने पूर्ण अमेरिकी अधिग्रहण का विरोध किया था। यह समझौता उन्हें सैन्य उपस्थिति की अनुमति देकर एक स्वीकार्य विकल्प प्रदान करता है। यह डेनमार्क के लिए आर्कटिक सुरक्षा को NATO की निगरानी में रखने जैसा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर स्थायी नियंत्रण देता है। अमेरिका अब यह सुनिश्चित कर पाएगा कि कोई भी विरोधी शक्ति ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा न बना सके। संवेदनशील निवेशों पर भी अमेरिका की स्पष्ट लिखित स्वीकृति आवश्यक होगी। यह आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव और सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह समझौता अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।