04/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/13/2026 03:28
PM's speech during Nari Shakti Vandan Sammelan in New Delhi
मंच पर विराजमान दिल्ली की लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी, केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जी, श्रीमती सावित्री ठाकुर जी, राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन श्रीमती विजया राहतकर जी, यहां आप सबके बीच भी कई वरिष्ट लोग बैठे हैं, सांसद हैं, विधायक हैं, हमारी लोकसभा की पूर्व स्पीकर आदरणीय मीरा कुमार जी भी हमारे बीच है। यहां उपस्थित सभी मेरी सम्मानित बहनें, इस समय देश में बैसाखी के पर्व की उमंग है। कल देश के अलग-अलग हिस्सों में नव वर्ष भी मनाया जाएगा। मैं आज जलियावाला बाग नरसंहार के वीर बलिदानियों को भी श्रद्धांजलि देता हूं।
साथियों,
देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है। मैं बहुत जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं, कि 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह है। ये निर्णय नारीशक्ति को समर्पित है, नारीशक्ति वंदन को समर्पित है। हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। एक ऐसे भारत का संकल्प जो समता मूलक हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, लेकिन हमारी कार्य संस्कृति का, हमारे work culture का, हमारी निर्णय प्रक्रिया का, स्वाभाविक हिस्सा हो।
साथियों,
राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों की प्रतिक्षा के अंत का समय 16-17-18 है। 2023 में नई संसद में जो नया भवन निर्माण हुआ, उसमें हमने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में प्रथम कदम उठाया था। वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है। और उसके पहले आज नारी शक्ति वंदन का ये कार्यक्रम, मैं इसके लिए, इस कार्यक्रम के जरिये हमें देश की कोटि-कोटि माता-बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। और मैं इस कार्यक्रम में आपको कोई उपदेश देने नहीं आया हूं, न ही मैं आपको जगाने आया हूं। मैं आज आया हूं आप सबके, देश की कोटि-कोटि माताओं-बहनों के आशीर्वाद लेने के लिए। आप सभी देश के कोने-कोने से आई हैं1 मैं आपकी इस उपस्थिति के लिए, इस महत्वपूर्ण काम के लिए आपने जो समय निकाला है, इसके लिए आपका हृदय से अभिनंदन करता हूं। साथ ही भारत की सभी महिलाओं को, एक नए युग के आगमन की बधाई भी देता हूं।
साथियों,
लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा था, चर्चा भी होती थी। इस विमर्श को करीब-करीब 4 दशक बीत गए, 40 साल बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं। हर दल ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है। 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था। और तब एक सुर में ये बात भी उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू हो जाना चाहिए। ये बात सबने कही थी, कानून पारित हो लेकिन लागू न हो, ये सदन में किसी को मंजूर नहीं था, और खासकर के हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर के इस बात पर जोर डाला था कि 2029 में ये लागू होना चाहिए। 2029 की समय सीमा को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने, क्योंकि विपक्ष ने जो बात रखी थी, हमारे लिए वो बात भी गंभीर होती है और इसलिए हम लगातार विचार-विमर्श करते रहे, मंथन करते रहे, नए-नए रास्ते खोजते रहे, संविधान की जिनको ज्यादा अध्ययन है, ऐसे लोगों की भी सलाह ली। और 16 अप्रैल से संसद में इसी पर व्यापक चर्चा भी होने जा रही है।
साथियों,
हमारा प्रयास है, और हमारी प्राथमिकता भी है, इस बार भी, ये काम संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो। और मुझे पूरा विश्वास है कि जिस प्रकार से इस अधिनियम को पारित किया गया था और संसद का, सदन का गौरव बढ़ा था, इस बार भी सबके सामूहिक प्रयास से संसद की गरिमा और नई ऊंचाईयों को छुएगी। देश की हर नारी को भी अच्छा लगेगा कि हर दल ने राजनीति से ऊपर उठकर उनके हित में ये महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, काम किया है। वैसे मैं देख रहा हूँ, बीते कुछ दिनों से देश भर में महिलाएं मुखर होकर इस विषय पर बात कर रही हैं। व्यापक रूप से डिबेट चल रहा है और लोकतंत्र की एक बहुत बड़ी तकात है। विधानसभा और लोकसभा पहुँचने के उनके सपनों को, आप सबके सपनों को नए पंख मिलने जा रहे हैं। मैं अनुभव कर रहा हूं, देश में एक सकारात्मक माहौल बना है।
साथियों,
आज़ादी की लड़ाई से लेकर संविधान सभा के निर्णयों तक, स्वतंत्र भारत की नींव रखने में भारत की नारीशक्ति ने असीमित योगदान दिया है, इतिहास गवाह है। और आज़ादी के बाद भी जिन महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिला, उन्होंने देश के लिए बहुत शानदार काम किया है। हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, महिलाएं जहां भी रहीं हैं, उन्होंने अपनी अलग लेगसी बनाई है। इस समय भी हमारे देश में राष्ट्रपति जी से लेकर वित्त मंत्री तक, ऐसे अहम पद महिलाएं ही संभाल रहीं हैं। उन्होंने देश की गरिमा और गौरव, दोनों को बढ़ाया है।
साथियों,
हमारे देश में महिला नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण पंचायती राज संस्थाएं भी हैं। आज भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। लगभग 21 राज्यों में तो पंचायतों में उनकी भागीदारी करीब-करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। और मैं जब विदेश के मेहमानों से कभी इस विषय पर बात करता हूं, ये आंकड़ा सुनते उनका मुहं खुला रह जाता है, उनको आश्चर्य होता है।
साथियों,
ये कोई साधारण बात नहीं है। लाखों महिलाओं की राजनीति और सामाजिक जीवन में ये सक्रियता, दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी बहुत ही हैरान करने वाली बात होती है। और इससे पूरे भारत का बहुत गौरव बढ़ता है।
साथियों,
अनेक अध्ययनों में ये सामने आया है कि जब निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की सहभागिता बढ़ी, तो इससे व्यवस्थाओं में भी संवेदनशीलता आई है। और ये बहुत बड़ी ताकत होती है, और इसका परिणाम है पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, ऐसे कई विषयों पर ज्यादा समर्पण भाव से, ज्यादा संवेदनशीलता से, परिणामकारी काम हुए हैं। जल जीवन मिशन, मैं समझता हूं, उसकी सबसे बड़ी सफलता का उदाहरण है, इसमें पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी की ही बहुत बड़ी भूमिका है।
साथियों,
हमारी लोकल बॉडीज़ और संस्थानों में इतने वर्षों से जो लाखों महिलाएं काम कर रहीं हैं, नेतृत्व कर रही हैं, उनके पास ग्रासरूट लेवल का बहुत समृद्ध और लंबा अनुभव है। वो अब और बड़ी भूमिका के लिए तैयार हैं और तत्पर भी हैं। मैं एक मेरा अपना निजी अनुभव बताता हूं। ये सामर्थ्य क्या होता है, मैं 2001 में नया-नया मुख्यमंत्री बना, मु्झे कोई ज्यादा अनुभव नहीं था, सरकार चलाने का, शासन व्यवस्था का, एक प्रकार से मैं नया व्यक्ति था। शायद 2002 या 2003 की घटना होगी, हमारे एक विधायक मेरे पास आए, बोले मेरे क्षेत्र में एक गांव की पंचायती की बहनें आपको मिलना चाहती हैं। ये खेड़ा डिस्ट्रिक्ट, आणंद डिस्ट्रिक्ट का इलाका था, जहां सरदार साहब का जन्म हुआ था, तो मैंने कहा भई उनको पंचायत का कोई काम होगा तो पंचायत मंत्री को मिला लीजिए उनको, नहीं बोले साहब वो आपसे मिलना चाहते हैं। मैंने कहा क्यों? तो बोले पंचायत में सब की सब मेंबर महिलाएं हैं, एक भी पुरूष मेंबर ही नहीं है हमारी पंचायत में। मैंने कहा ऐसे कैसे? बोले गांव वालों ने तय किया कि इस बार प्रधान महिला है तो मेंबर भी सब महिला, तो कोई पुरूष चुनाव ही नहीं लड़ा था। तो मेरा घ्यान स्वाभाविक गया, मैंने कहा भई जरूर मैं मिलूंगा। छोटा सा गांव था, कोई शायद 13 मेंबर की पंचायत थी, तो मैंने उनको समय दिया, वो सब आई मिलने के लिए। 13 बहनें थी, उसमें जो गांव की प्रधान बनी थी वो शायद 8वीं कक्षा तक पढ़ी थी। बाकी जो बहनें थी, एक दो बहनें तो घुंघट भी लगा हुआ था। वो ज्यादा शायद कुछ तो होगी स्कूल भी नहीं देखा होगा, तो सब आए, मुझे लगता है ये सब बड़े-बड़े लोगों ने उनको कोई मेंबरों ने पकड़ा दिया होगा, कुछ मांग लेकर के आए होंगे, कि मेरे गांव में ये करो, मेरे गांव में वो करो। मैं हैरान था उनके हाथ में कोई कागज नहीं था, तो बैठे मैंने परिचय किया। मैंने कहा आपने समय मांगा था क्या काम था? नहीं बोले कोई काम नहीं है, वो ऐसे ही बोले हम चुनकर आए हैं तो मिलने आए थे। अब ये मेरे लिए बड़ा आश्चर्य था, वरना नेता लोग आते हैं, तो सिर्फ मेमोरेंडम लेकर आते हैं। फिर मैंने उनको पूछा अच्छा बताईये, मैंने कहा कि आपको अगर 5 साल इतना बड़ा काम मिल गया, आप सब बहनें गांव को संभालने वाली हैं, आपका सपना क्या है, 5 साल में क्या करोगे आप लोग? गांव में कैसा करोगे? सामान्य होता तो क्या जवाब देता, ये जो हम जैसे बड़े-बड़े दिखते हैं ना, वो क्या जवाब देते, स्कूल बना लेंगे, अस्पताल बना देंगे, रोड़ बना देंगे, ऐसे ही जवाब देते। उस दिन 8वीं कक्षा पढ़ी हुई उस प्रधान ने और उसके साथ आई हुई महिला मेंबर्स ने मुझे जो जवाब दिया, वो शायद दुनिया का बड़े से बड़ा अर्थशास्त्री नहीं दे सकता है। और वो बात आज भी मेरे लिए एक लेशन की तरह है। मैं सीएम बना, पीएम बना, लेकिन उस पंचायत की महिलाओं की वो बात मेरे लिए आज भी मार्गदर्शक है। आपको आश्चर्य होगा, ऐसा क्या जवाब दिया होगा। जब मैंने उनको पूछा, क्या करेंगे आप, 5 साल आपको मिले हैं, गांव ने आपको चुनना ही था तो, तब उन्होंने मुझे जवाब दिया, कि साहब एक ही इच्छा है, मैंने कहा क्या? और वो जवाब आज भी मेरे कानों मे गूंजता रहता है जी। उन्होंने कहा हमारी इच्छा है, कि हमारे गांव में कोई गरीब न रहे। बड़े से बड़े अर्थशास्त्रियों के लिए भी इससे बड़ा कोई संदेश नहीं हो सकता है। ये अपने आप में मेरे लिए एक सुखद अनुभव था और वो आज भी शब्द मेरे कानों में गूंजते रहते हैं। और इसलिए जमीन से जुड़े हुए अनुभव से जो वाणी निकलती है ना वो वेद वाक्य बन जाता है।
और इसलिए साथियों,
नारीशक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना, ऐसी सभी महिलाओं के जीवन का बहुत बड़ा अवसर बनने जा रहा है। अब पंचायत से आगे बढ़कर पार्लियामेंट पहुंचने का उनका सफर और आसान होने जा रहा है।
साथियों,
आज विकसित भारत की हमारी यात्रा में महिलाओं की भूमिका और भी अहम हो गई है। मुझे संतोष है कि 2014 में, आप सबने देशवासियों ने हमें यहां सेवा करने का अवसर दिया है, और तब से लेकर अब तक, हमारी सरकार ने महिलाओं के जीवन चक्र के हर पड़ाव के लिए योजनाएं बनाईं, उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया। आज पहली सांस से लेकर आखिरी सांस तक हमारी सरकार कोई ना कोई योजना लेकर के भारत की बहन-बेटियों की सेवा में हाजिर है। गर्भ में बेटी की हत्या ना हो, इसके लिए हमने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान शुरू किया। गर्भ की अवस्था में मां को सही पोषण मिले, इसके लिए हर गर्भवती माँ को 'मातृ वंदना योजना' के तहत 5 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी। जन्म के बाद बेटी को पढ़ाई में मुश्किल ना हो, इसके लिए ज्यादा से ज्यादा ब्याज मिले ऐसी 'सुकन्या समृद्धि योजना' शुरू की। बेटी को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए बचपन में उसे सही समय पर टीके लगते रहें, इसके लिए 'मिशन इंद्रधनुष' शुरू किया। बेटी को स्कूल में शौचालय की परेशानी ना हो, इसके लिए 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत देश में करोड़ों शौचालय बनवाए गए। बेटी को पीरियड्स के दौरान परेशानी ना हो, इसके लिए लगभग मुफ्त में सेनीटरी नैपकिन देने का अभियान शुरू किया गया। बेटी अगर स्पोर्ट्स में आगे जाना चाहती है, तो उसे 'खेलो इंडिया अभियान' के तहत सालाना एक लाख रुपए तक की मदद मिल रही है। बेटी अगर बड़ी होकर भविष्य में सेना में जाना चाहे तो उसके लिए सरकार ने सैनिक स्कूल में एडमिशन के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, नेशनल डिफेंस एकेडमी में जाने के रास्ते खोले। जीवन के आगे के पड़ाव में, बेटी को रसोई में धुएं की परेशानी ना उठानी पड़े, इसके लिए हमने 'उज्ज्वला योजना' शुरू की, करोड़ों गैस कनेक्शन मुफ्त दिए। बेटी को मीलों तक सिर पर पानी ना ढोना पड़े, इसके लिए हमने 'हर घर नल से जल' अभियान शुरू किया। बेटी को अपने परिवार के लिए राशन की चिंता ना करना पड़े इसके लिए मुफ्त राशन की योजना शुरू की गई। अपने परिवारिक जीवन में बेटियों को इलाज की चिंता ना हो, इसके लिए उन्हें 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान योजना का संबल बना दी। 80 परसेंट तक डिस्काउंट पर सस्ती दवा के लिए जन औषधि केंद्र हों, इन सबका सबसे ज्यादा लाभ हमारी बहनों और बेटियों को हो रहा है।
साथियों,
आप सभी इस बात को भली-भांति जानते हैं, कि भारत में महिलाओं को सशक्त करने के लिए उनकी आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है। इसलिए हमने अपनी सरकार के हर निर्णय में, हर योजना में इस पहलू का ध्यान रखा है। पहले परिवार की संपत्ति मुख्य रूप से पुरुषों के नाम होती थी। घर है तो पुरूष के नाम पर, खेत है तो पुरूष के नाम पर, दुकान है तो पुरूष के नाम पर, गाड़ी है तो पुरूष के नाम पर, स्कूटर है तो वो भी पुरूष के नाम पर, और ये सहज चलता था। हमने 'पीएम आवास योजना' में घरों को प्राथमिकता के आधार पर परिवार की महिलाओं के नाम पर रजिस्टर कराना शुरू किया। बच्चे स्कूल जाते हैं तो स्वाभाविक रूप से पिता का नाम लिखा जाता है, हमने आकर के शुरू किया, मां का नाम भी लिखा जाएगा। बीते 11 साल में इस निर्णय का लाभ 3 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को अपने घर का नाम, घर खुद की मालकिन बनी हैं। इससे आज घरों में महिलाएं भी आर्थिक रूप से भी सशक्त बन रहीं हैं। आमतौर पर पिता और बेटा कुछ व्यापार की बात करते हैं ना, और अगर मां चाय लेकर आए और थोड़ी देर खड़ी रहे, अरे तुम जाओ, किचन में जाओ, हम बात कर रहे हैं। मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन पता बहुत है। लेकिन अब जब वो आर्थिक ताकत बनी है ना तो बेटा भी कहता है अरे जरा मम्मी को बुलाईये ना बातचीत में, उनको बुलाईये ना।
साथियों,
2014 में हमारे देश में करोड़ों महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने कभी बैंक का दरवाजा भी नहीं देखा था। महिलाएं बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी ही नहीं थीं, तो उन्हें बैंकिंग का लाभ कैसे मिलता? हमने जनधन योजना शुरू की तो देश की 32 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खाते खुले। मै जब गुजरात में था तो एक निर्णय मुझे बड़ा शुरूआत में बहुत कठिनाई हुई थी। गुजरात में कॉपरेटिव डेयरी का बड़ा साम्राज्य है, बहुत बड़ा काम होता है, और पशुपालन का ज्यादातर काम हमारी माताएं-बहनें करती हैं, वो दूध भरने के लिए जाती हैं और फिर वो पैसे हफ्ते के बाद वो पैसे देते हैं, तो पुरूषों को देते थे पैसे। मैं जब मुख्यमंत्री बना, मैंने कहा कि मैं नहीं दूंगा पुरूषों को, उस समय मैंने बैंको में जो दूध भरने आने वाली बहनें थीं, उनके बैंक खाते खुलवाए, और उस समय डेयरी में दूध का पैसा सीधा महिलाओं के बैंक खाते में जाने लगा।
साथियों,
आज हमारी बेटियाँ नए-नए बिजनेसेस में अपनी पहचान बना रही हैं। मुद्रा योजना में 60 प्रतिशत से ज्यादा लोन्स, 60 प्रतिशत से ज्यादा लोन्स महिलाओं ने लिए हैं। देश की स्टार्टअप revolution को भी महिलाएं लीड कर रहीं हैं। आज 42 परसेंट से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। महिलाओं के करियर पर प्रभाव ना पड़े, इसके लिए हमने मैटरनिटी लीव को भी बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया है। दुनिया के समृद्ध देशों में भी ये नहीं है। जब मैं उनको बताता हूं तो आंखें फट जाती है उनकी।
साथियों,
आपको याद होगा, कुछ साल पहले देश ने 'स्किल इंडिया मिशन' launch किया था। हमने vocational training programs शुरू किए थे। आज उसका परिणाम हम हजारों ड्रोन दीदी के जरिए हो रही कृषि क्रांति के रूप में देख रहे हैं। मैं एक बार ये जो ड्रोन दीदी हैं, उनके साथ वीडियो कॉंफ्रेंस पर बात कर रहा था। गांव की बेटियां हैं, कोई बहू है वो ड्रोन चलाने से, तो उन्होंने मुझे कहा कि अब तक तो हमें गांव में कोई बोला, अब तो बोले पायलट कहकर बुलाते हैं। हमारी पहचान बन गई है, हम पायलट हैं। यानी perception कितना बड़ा तेजी से चेंज हो सकता है एक छोटे से निर्णय से। महिलाएं टेक्नालजी के जरिए आधुनिक खेती करना सीख रही हैं। आपको ये जानकर खुशी होगी कि पिछले 11 साल में करीब 10 करोड़ महिलाएं, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रही ऐसी 6 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। और इसमें से 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। और ये जो वीमन सेल्फ हेल्प ग्रुप है, उनको बैंको से पैसा मिलता है काम के लिए। और आप जानकर के खुश हो जाएंगे, अगर उनको बुधवार को पैसा जमा करना है, तो मंगलवार को जाकर जमा कर देती हैं, एक दिन पहले। बहनों के पास जो व्यवहार है, कोई एनपीए नहीं हो रहा है जी, सारे के पैसे बैंक से जाते हैं, उतने ही वापस आते हैं। और मैंने देखा है, मैंने शासन में आने के बाद बैंकों के कारोबार में गरीबों की अमीरी भी देखी है और अमीरों की गरीबी भी देखी है।
इतना ही नहीं साथियों,
ये हमारी माताएं-बहनें 'वोकल फॉर लोकल' की ब्रांड एंबेसडर बन रही हैं। बहनों, Women led development के विज़न की बहुत बड़ी सफलता ये है कि इसने महिलाओं के प्रति पुरानी सोच को चुनौती दी है। अब जी-20 समिट हमारा जब चल रहा था, हम चेयर कर रहे थे, दुनिया के देशों को मुझे समझाना पड़ा था कि वीमेन डेवलपमेंट और वीमेन लेड डेवलपमेंट में क्या अंतर होता है। दुनिया का बहुत बड़ा वर्ग वीमेन डेवलपमेंट तक सहमत था, वीमेन लेड डेवलपमेंट के लिए मुझे ताकत लगानी पड़ी थी, और हमें सफलता मिली थी। इस सोच का परिणाम है कि, आज महिलाएं उन सेक्टर्स में भी बुलंदियों को छू रहीं हैं जहां कभी पुरुषों का एकाधिकार माना जाता था। आज हमारी बेटियां फाइटर पायलट बनकर आसमान की बुलंदियां छू रही हैं। आज भारत में विश्व के किसी भी देश की तुलना में, ये आंकड़ा भी आपको खुश कर देगा, विश्व के किसी भी देश की तुलना में महिला पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक हिन्दुस्तान में है। आज PhD enrolment में बेटियों की संख्या 2014 की तुलना में डबल हो चुकी है। हायर एजुकेशन और रिसर्च में करीब करीब आधी भागीदारी हमारी बेटियों की है। मैथ्स और साइंस की पढ़ाई में, STEM Education में बेटियों की संख्या करीब-करीब 43 परसेंट तक पहुंच गई है। मुझे याद है मैं दुनिया के एक समृद्ध देश में एक बार गया, तो वहां के शिक्षा मंत्री मेरे साथ लिफ्ट में हम लोग जा रहे थे, उन्होंने पूछा मुझे कि भारत में महिला एजूकेशन में कैसा है? मैंने कहा बहुत अच्छा है, ज्यादा है, कुछ जगह पर तो पुरूषों से ज्यादा है। तो फिर उन्होंने बड़ी जिज्ञासा से पूछा, स्टेम एजूकेशन में क्या महिला हिस्सा, मैंने कहा 50 पर्सेंट हिस्सा उन्हीं का है, तो उनके लिए आश्चर्य था, ये दुनिया के समृद्ध देश के शिक्षा मंत्री की मैं बात कर रहा हूं।
साथियों,
हमारे समाज में एक बड़ी चुनौती महिला सुरक्षा को लेकर भी रही है। सदियों से महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए मौन रहना पड़ा है। हमारी सरकार ने इस दिशा में भी मजबूत कदम उठाए हैं। न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील बने, निर्णय प्रक्रिया तेज हो, इसके लिए हमने कानूनी बदलाव तो किए ही हैं, साथ ही, फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना भी की गई है। भारतीय न्याय संहिता में भी महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, अब किसी भी स्थान से ई-एफआईआर या जीरो-एफआईआर दर्ज की जा सकती है। पीड़िता के बयान को ऑडियो-वीडियो के माध्यम से रिकॉर्ड करने जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। ऐसे कितने ही कदम हैं, जिनके जरिए हम प्रगतिशील समाज की अवधारणा को साकार कर रहे हैं।
साथियों,
जीवन के हर पड़ाव, हर चिंता, सुख-दुख, हर अवसर पर, ऐसी हर परिस्थिति में ध्यान देते हुए, हमारी सरकार ने अनेक छोटे-बड़े कदमों से महिलाओं को सशक्त किया है। इसी का परिणाम है, देश अब अपने लोकतंत्र को नई बुलंदी पर लेकर जाने के लिए तैयार है।
साथियों,
देश की नारीशक्ति ने अपने परिश्रम, साहस और आत्मविश्वास से नई ऊंचाइयों को छुआ है। अब हमें मिलकर इस शक्ति को नई ऊर्जा देनी है, उसके लिए अवसरों का विस्तार करना है। मैं आज इस मंच से देश की हर माता, बहनें, बेटियां, सबको विश्वास दिलाना चाहता हूं, कि देश उनकी आकांक्षाओं को समझता है, और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है।
साथियों,
मैं संसद में होने वाली चर्चा से पहले, देश की नारीशक्ति से भी ये अपील करता हूँ, कि आप इस पूरी प्रक्रिया में अपनी सक्रियता बनाए रखिए। आप अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों से भी जरूर मिलिए। देश की महिलाएं अपने सांसदों से अपना पक्ष रखें, अपनी अपेक्षाएँ उन्हें बताएं। और जिस दिन वो सदन में आने के लिए अपने यहां से निकले, तो जरा फूलमाला देकर के उनको विदाई भी दीजिए। ताकि जब माताओं-बहनों के आशीर्वाद लेकर के सांसद निकलेंगे ना, तो दूसरा निर्णय कर ही नहीं सकते। ताकि ये मेरे सांसद साथी सही निर्णय लें, महिलाओं के हित में निर्णय लें, सहमति से निर्णय लें।
साथियों,
मेरा आपसे एक और आग्रह है। नारीशक्ति वंदन कार्यक्रम में होने वाली चर्चाओं को आप सब देश के गाँव-गाँव तक लेकर जाएँ। व्यक्तिगत मेल मिलाप से, सोशल मीडिया के जरिए, अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए, हमें देश के इस बड़े फैसले को देश की हर महिला तक पहुंचाना है। हमें उन्हें aware करना है, ताकि, वो इस बड़े निर्णय की ताकत को समझ सकें, ताकि, वो अपनी भूमिका को समझ सकें, और, खुलकर ये सपना देख सकें, कि आने वाले कल में राज्यों से लेकर देश की संसद तक, वो अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती हैं। आइए, हम मिलकर, सब मिलकर यह संकल्प लें, नारी शक्ति के पास उनके अधिकार होंगे, और वो निर्णय प्रक्रिया में पूरी तरह भागीदार भी बनेंगी। यही हमारे उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है। मैं तो यह भी कहूंगा कि 16-17-18, मैं वो तो स्पीकर महोदय के अधिकार का क्षेत्र है, लेकिन मैं तो चाहूंगा की उस समय दर्शक दीर्घा महिलाओं से ही भरी रहे। एक उत्सव का माहौल बनेगा पूरे देश में, और ये, ये दल वो दल वाला विषय नहीं रहने वाला है, कौन जीता, कौन हारा, किसने किया, किसी ने नहीं, सब सारा क्रेडिट देश की मातृशक्ति को है, सारा क्रेडिट देश की संसद को है, सारा क्रेडिट हिन्दुस्तान के सभी राजनीतिक दलों को है, सारी क्रेडिट पिछले 3-4 दशक से लगातार जो-"""जो काम कर रहे हैं, सबको क्रेडिट है। ये सबका है, सबके सहयोग से है और सबकी भलाई के लिए है। इसी विश्वास के साथ आप सबने इतना समय निकाला, इतना उमंग उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में शरीक हुए, मैं हृदय ये आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आभार व्यक्त करता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
Speaking at the Nari Shakti Vandan Sammelan in Delhi. https://t.co/bnocSJqwYB
- Narendra Modi (@narendramodi) April 13, 2026India's Nari Shakti has made immense contributions. pic.twitter.com/BxSbAHK67K
- PMO India (@PMOIndia) April 13, 2026In our country, the Panchayati Raj institutions are a remarkable example of women's leadership. pic.twitter.com/7uNzwK3ySl
- PMO India (@PMOIndia) April 13, 2026Supporting women at every stage of life. pic.twitter.com/mclimUNZ9i
- PMO India (@PMOIndia) April 13, 2026Today, women are excelling even in sectors once considered male-dominated. pic.twitter.com/FFE9Dj820g
- PMO India (@PMOIndia) April 13, 2026
India's Nari Shakti have reached new heights through their hard work, courage and confidence.
Now, we must come together to empower them further by expanding opportunities. pic.twitter.com/vIaH6tRxx2