09/29/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/29/2026 11:36
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टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' की सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर समूह के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान हुए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा कि टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग से समूह का 150 साल पुराना दीर्घकालिक निवेश और सामाजिक-विकास मॉडल बुनियादी तौर पर बदल जाएगा। उनके अनुसार, सार्वजनिक लिस्टिंग के बाद होल्डिंग कंपनी को अपने सामाजिक उद्देश्यों और तिमाही वित्तीय रिटर्न मांगने वाले सार्वजनिक निवेशकों की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाना होगा, जिससे एक नया विरोधाभास पैदा होगा।
नोएल टाटा के अनुसार, टाटा समूह ऐतिहासिक रूप से देश की जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं में निवेश करता आया है, जैसा कि जेआरडी टाटा के दर्शन में निहित था। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स का मुख्य दायरा स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।
यह पूरा विवाद सितंबर 2026 में तब तेज हुआ जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस की अपर लेयर एनबीएफसी श्रेणी से हटने की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य बना रहा।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस को एक रणनीतिक पुनर्गठन का प्रस्ताव भेजा है, जिसे आरबीआई (आरबीआई) के साथ साझा करके लिस्टिंग से बचा जा सके।
ऑपरेटिंग बिजनेस को शामिल करना: इस प्रस्ताव के तहत 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स' जैसी समूह की कुछ परिचालन कंपनियों को टाटा संस में शामिल करने की योजना है।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस से आग्रह किया है कि वह इस पुनर्गठन प्रस्ताव की समीक्षा करे, इसमें आवश्यक संशोधन करे और रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ बातचीत करे। यदि आरबीआई इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो टाटा संस अपनी प्राइवेट कंपनी की स्थिति बनाए रख सकेगी और अपने दीर्घकालिक सामाजिक व औद्योगिक निवेश मॉडल को बिना किसी बाजार दबाव के जारी रख सकेगी। हालांकि, बोर्ड और ट्रस्ट्स के बीच बना यह गतिरोध आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, जिस पर पूरे भारतीय कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं।