03/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/25/2026 08:42
सरकार ने मौजूदा बजट में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को मजबूत करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीप-टेक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने को उच्च प्राथमिकता दी है।
इस दिशा में सरकार ने तीन नवंबर 2025 को अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना शुरू की है, जिसके लिए छह वर्ष की अवधि में कुल एक लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इस योजना का उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष जैसी गहन प्रौद्योगिकियों सहित रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करना है; साथ ही एआई और कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में इसके अनुप्रयोग; ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु कार्रवाई; जैव प्रौद्योगिकी, जैव विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण; तथा डिजिटल कृषि सहित डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी शामिल किया गया है।
यह योजना अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत स्थापित एक विशेष प्रयोजन कोष (एसपीएफ) के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिसमें दो स्तरीय वित्तपोषण संरचना है। इस व्यवस्था के तहत, एसपीएफ कोष की देखरेख करता है और द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधकों (एसएलएफएम) को धनराशि उपलब्ध कराता है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) को एसएलएफएम के रूप में नामित किया गया है और उन्होंने फरवरी 2026 में प्रस्तावों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसके अलावा, फंड ऑफ फंड्स सहित अतिरिक्त एसएलएफएम के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं और उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। यह योजना स्टार्टअप, कंपनियों और उद्योग-नेतृत्व वाली अनुसंधान एवं विकास संस्थाओं द्वारा प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल) 4 और उससे ऊपर के प्रौद्योगिकी विकास का समर्थन करती है।
इसके अलावा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएम-आईसीपीएस) को लागू कर रहा है, जिसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, आईओटी, साइबर सुरक्षा और क्वांटम प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) स्थापित किए गए हैं। इस मिशन के अंतर्गत, भारत के अनुकूल बहुआयामी, बहुभाषी जनरेटिव एआई मॉडल विकसित करने के लिए भारत-जेन पहल को लागू किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ), अपने मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज (एमएएचए) के अंतर्गत विज्ञान और इंजीनियरिंग के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समर्थन करता है, उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देता है और एआई-संचालित समाधानों के विकास और व्यावसायीकरण में तेजी लाता है।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2024 में इंडियाएआई मिशन को मंजूरी दी, जिसके तहत देश में एक मजबूत और समावेशी एआई पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए पांच साल की अवधि में कुल 10,371.92 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस मिशन का कार्यान्वयन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है और इसका उद्देश्य नवाचार को मजबूत करना, अनुसंधान और स्टार्टअप को समर्थन देना, डेटा तक पहुंच बढ़ाना और जिम्मेदार एआई तैनाती सुनिश्चित करना है। इंडियाएआई मिशन में सात प्रमुख स्तंभ शामिल हैं, जिनमें कंप्यूट क्षमता, मूलभूत मॉडल, डेटासेट प्लेटफॉर्म, एप्लिकेशन विकास, कौशल विकास, स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई शामिल हैं।
इस मिशन के अंतर्गत भारतजेन जैसी पहल शुरू की गई हैं, जो भारत का स्वदेशी बहुभाषी बहुरूपी व्यापक भाषा मॉडल है और 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है। इसके अलावा, सार्वजनिक सेवा वितरण और डिजिटल विश्वास को बढ़ाने के लिए एक संप्रभु एलएलएम पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को मंजूरी दे दी गई है।
एनएम-आईसीपीएस, आरडीआई और इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत (पांच वर्षों के लिए) विस्तृत आवंटन इस प्रकार है:
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क्रम सं. |
वित्तीय वर्ष |
बजट आवंटन (करोड़ में) |
|
एनएम-आईसीपीएस |
||
|
1. |
2024-25 |
815 |
|
2. |
2025-26 |
750.6 |
|
आरडीआई योजना |
||
|
3. |
2025-26 |
20,000 |
|
घटक |
कुल व्यय (करोड़ रुपये) |
|
इंडिया एआई कंप्यूट कैपासिटी |
4563.36 |
|
इंडियाएआई फाउंडेशन मॉडल्स |
1971.37 |
|
इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म |
199.55 |
|
इंडियाएआई एप्लीकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव |
689.05 |
|
इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स |
882.94 |
|
इंडियाएआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग |
1942.5 |
|
सेफ एंड ट्रस्टेड एआई |
20.46 |
|
इंडियाएआई ओवरहेड्स एंड कॉन्टिन्जेंसी (@1%) |
102.69 |
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कुल |
10,371.92 |
सरकार उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) और संबंधित संस्थागत तंत्रों की स्थापना के माध्यम से देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई पहल कर रही है।
इस संदर्भ में, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और सतत एवं संतुलित विकास वाले शहरों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) सहित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीन उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इन उत्कृष्टता केंद्रों का उद्देश्य अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देना, विस्तार योग्य एआई-आधारित समाधान विकसित करना, तथा शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
इसके अलावा, इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे तक पहुंच को सक्षम बनाने, अनुसंधान और नवाचार का समर्थन करने और सार्वजनिक हित के लिए एआई अनुप्रयोगों के विकास को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार शिक्षा और कौशल विकास में एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना और शिक्षण प्रणालियों में एआई के एकीकरण जैसी पहल कर रही है, ताकि युवाओं को उद्योग-संबंधी कौशल से लैस किया जा सके और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण किया जा सके। शिक्षा मंत्रालय उत्कृष्टता केंद्रों और उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास कार्यक्रमों सहित ऐसी पहलों का समर्थन कर रहा है, जिससे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लाभ मिल रहा है।
यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
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