Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

03/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/17/2026 07:37

भारतीय साइबर समन्वय केंद्र

गृह मंत्रालय

भारतीय साइबर समन्वय केंद्र

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 5:30PM by PIB Delhi

पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्यो का विषय हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्यम से साइबर अपराध सहित अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के इन प्रयासों को उनके एलईए की क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सलाह और वित्तीय सहायता प्रदान करके पूरक बनाती है।

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने वर्ष 2018 में देश में साइबर अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए एक ढांचा तथा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) को एक योजना के रूप में स्थापित किया। आई4सी ने अल्प समय में साइबर अपराधों से निपटने के लिए राष्ट्र की सामूहिक क्षमता को बढ़ाने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय विकसित करने की दिशा में कार्य किया है। आई4सी को 1 जुलाई 2024 से प्रभावी एमएचए के संत्तरीय कार्यालय के रूप में स्थापित किया गया है। आई4सी नागरिकों से संबंधित साइबर अपराधों से जुड़े सभी मुद्दों से निपटने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा हितधारकों के बीच समन्वय सुधारना, क्षमता निर्माण, जागरूकता आदि शामिल हैं।आई4सी के तहत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को वर्ष 2021 में वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए तथा धोखेबाजों द्वारा धन के सिफोनिंग को रोकने के लिए शुरू किया गया। आई4सी द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 31.01.2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से अधिक की राशि बचाई गई है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' को सक्रिय किया गया है।

31.01.2026 तक पुलिस प्राधिकारियों द्वारा रिपोर्ट किए गए 12.94 लाख से अधिक सिम कार्ड तथा 3.03 लाख आईएमईआई को भारत सरकार द्वारा ब्लॉक किया गया है।साइबर अपराधियों के पहचानकर्ताओं का संदिग्ध रजिस्ट्री आई4सी द्वारा 10.09.2024 को बैंकों/वित्तीय संस्थानों के सहयोग से शुरू किया गया। 31.01.2026 तक बैंकों से प्राप्त 23.05 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ता डेटा तथा 27.37 लाख लेयर 1 म्यूल खाते संदिग्ध रजिस्ट्री के भाग लेने वाले संस्थाओं के साथ साझा किए गए तथा ₹9518 करोड़ से अधिक मूल्य के लेनदेन को अस्वीकार किया गया।

समन्वय प्लेटफॉर्म को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) प्लेटफॉर्म, डेटा रिपॉजिटरी तथा साइबर अपराध डेटा साझाकरण एवं विश्लेषण के लिए एलईए के समन्वय प्लेटफॉर्म के रूप में सक्रिय किया गया है।

यह विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध शिकायतों में शामिल अपराधों तथा अपराधियों के अंतरराज्यीय लिंकेज पर आधारित विश्लेषण प्रदान करता है।

'प्रतिबिंब' मॉड्यूल अपराधियों तथा अपराध अवसंरचना के स्थान को मानचित्र पर चिह्नित करता है ताकि क्षेत्राधिकार अधिकारियों को दृश्यता प्रदान हो। यह मॉड्यूल आई4सी तथा अन्य एसएमई से कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा तकनीकी-कानूनी सहायता मांगने तथा प्राप्त करने की सुविधा भी प्रदान करता है। इससे 21,857 से अधिक आरोपी गिरफ्तार हुए तथा 1,49,636 साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए।

केंद्र सरकार ने साइबर धोखाधड़ी मामलों में ई-एफआईआर दर्ज करने की नई पहल शुरू की है। साइबर अपराध मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए 'ई-एफआईआर' प्रणाली को दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, गोवा तथा उत्तराखंड में लागू किया गया है।

यह जानकारी गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी ।

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पीके/ केसी /एमएम / डीए


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