05/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 05/13/2026 06:08
इंडियाएआई मिशन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के सहयोग से 9 मई, 2026 को आईआईएससी बेंगलुरु में एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा में एआई-संचालित नवाचार के दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रदर्शन के समापन का प्रतीक है।
एनएचए और आईआईएससी बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित इस हैकाथॉन का उद्देश्य दावों के निपटान में गति, पारदर्शिता और सटीकता में सुधार लाने के साथ-साथ धोखाधड़ी का पता लगाने का मजबूत समाधान विकसित करना था।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ श्री सुनील कुमार बरनवाल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह, एनएचए की संयुक्त सचिव सुश्री ज्योति यादव और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त निदेशक सुश्री शिखा दहिया ने उन नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया जिनके समाधानों में एआई-संचालित दावों के निपटान को बदलने की क्षमता है।
इस हैकाथॉन में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के अंतर्गत दावों के निपटान के लिए महत्वपूर्ण तीन गहन समस्याओं पर समाधान आमंत्रित किए गए थे। एबी पीएम-जेएवाई विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रमों में से एक है। एबी पीएम-जेएवाई प्रतिदिन 1,900 से अधिक उपचार पैकेजों के तहत बड़ी संख्या में दावों का निपटान करता है।
हैकाथॉन विजेता
समस्या कथन 1: नैदानिक दस्तावेज़ वर्गीकरण और एसटीजी अनुपालन
मिश्रित गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों को स्वचालित रूप से पढ़ना, महत्वपूर्ण डेटा निकालना, अनिवार्य दृश्य तत्वों का पता लगाना और एनएचए के मानक उपचार दिशा-निर्देशों (एसटीजी) के अनुपालन की जांच करना।
समस्या कथन 2: रेडियोधर्मी छवि-आधारित स्थिति का पता लगाना और रिपोर्ट सहसंबंध
एसटीजी के अंतर्गत साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी छवि-आधारित जांचों का सत्यापन करना, दावों का सटीक और कुशलतापूर्वक निर्णय करने के लिए उनकी रिपोर्टों से तुलना करना।
समस्या कथन 3: दस्तावेज़ जालसाजी और डीपफेक का पता लगाना
दावा प्रस्तुत करने के समय ही जाली या कृत्रिम रूप से तैयार किए गए दस्तावेजों का पता लगाना, जिनमें छेड़छाड़ किए गए डिस्चार्ज समरी, बिल में हेरफेरी, फर्जी पहचान और एआई-जनित बाहरी या कृत्रिम कारक शामिल हैं।
विजेता टीमों को क्रमशः 5 लाख रुपये, 3 लाख रुपये और 2 लाख रुपये के नकद पुरस्कार मिले। अधिकारियों ने बताया कि चयनित समाधानों को भविष्य में एबी पीएम-जेएवाई प्रणाली के अंतर्गत लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
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पीके/केसी/एके/वाईबी