भारत और स्विट्जरलैंड ने व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा, रक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमलिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ व्यापक बातचीत की। विदेश मंत्रालय के सचिव पश्चिम सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता यानी टीईपीए इस रिश्ते का प्रमुख आधार है। इसके तहत अगले 15 वर्षों में ईएफटीए देशों से भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है। इसका लक्ष्य भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करना है। दोनों पक्ष अब इस समझौते को जमीन पर लागू करने और निवेश बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
100 अरब डॉलर के निवेश से भारत को क्या मिलेगा?
सिबी जॉर्ज ने कहा कि 100 अरब डॉलर का निवेश केवल एक प्रतिबद्धता नहीं है, बल्कि इसे वास्तविक निवेश में बदलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है। भारत में 340 से ज्यादा स्विस कंपनियां मौजूद हैं। इनमें सहायक कंपनियां, संयुक्त उद्यम और दो संपर्क कार्यालय शामिल हैं। करीब 110 स्विस कंपनियों ने भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं, जबकि 30 कंपनियां यहां अनुसंधान एवं विकास केंद्र चला रही हैं। इसके अलावा 74 कंपनियां भारत को दूसरे बाजारों के लिए निर्यात केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। भारत सरकार को उम्मीद है कि आने वाले महीनों और वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत होगी और टीईपीए के तहत निवेश बढ़ेगा।
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भारत में पहले से कितना स्विस कारोबार मौजूद है?
स्विट्जरलैंड भारत के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक और निवेश साझेदार है। सिबी जॉर्ज के मुताबिक, स्विट्जरलैंड भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है। भारत में स्विट्जरलैंड का अब तक 11 अरब डॉलर से अधिक का निवेश बताया गया है। स्विस कंपनियां दवा, रसायन, सटीक इंजीनियरिंग, मशीनरी, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। करीब 340 स्विस कंपनियों की मौजूदगी इस कारोबारी रिश्ते का बड़ा आधार है। दोनों नेताओं ने इस मजबूत कारोबारी संबंध को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
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स्विट्जरलैंड में भारतीय कंपनियों का कितना निवेश है?
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच निवेश केवल एक तरफ से नहीं है। सिबी जॉर्ज ने बताया कि पिछले कई वर्षों में स्विट्जरलैंड में भारतीय निवेश करीब 9 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा है। 150 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने स्विट्जरलैंड में अपनी सहायक कंपनियां स्थापित की हैं। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, दवा, जीवन विज्ञान और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध केवल भारत में स्विस कंपनियों के विस्तार तक सीमित नहीं हैं। भारतीय कंपनियां भी स्विट्जरलैंड को कारोबार और वैश्विक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बाजार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।
पीएम मोदी ने स्विट्जरलैंड के लिए कौन से प्रस्ताव रखे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड की रचनात्मक उद्योगों को अगले साल होने वाले वेव्स 2.0 में हिस्सा लेने का न्योता दिया। पिछले साल भी वेव्स में स्विट्जरलैंड ने भाग लिया था। प्रधानमंत्री ने स्विस विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने के लिए भी आमंत्रित किया। इसके अलावा स्विस कंपनियों, खासकर वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों से गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया गया। भारत में रहने वाले भारतीय समुदाय की संख्या करीब 30 हजार बताई गई है। यह समुदाय वित्तीय सेवाओं, इंजीनियरिंग, आईटी और दवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही कैसे बढ़ेगी?
भारत और स्विट्जरलैंड ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते यानी माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया है। इसके साथ ही युवा पेशेवरों से जुड़ा समझौता भी हुआ है। इन समझौतों से कुशल पेशेवरों, छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं की दोनों देशों के बीच आवाजाही आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। बातचीत में समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति से करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया गया। दोनों देश बहुपक्षवाद में विश्वास जताते हुए इसे मजबूत करने के लिए मिलकर काम जारी रखने पर सहमत हैं।
विज्ञान, एआई और तकनीक में क्या सहयोग बढ़ेगा?
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पहले से संस्थागत सहयोग मौजूद है। इसमें स्विस-इंडिया संयुक्त शोध कार्यक्रम, स्विसनेक्स इंडिया और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन शामिल हैं। स्विस सरकार की उत्कृष्टता छात्रवृत्ति भी इस सहयोग का हिस्सा है। विज्ञान और तकनीक सहयोग पर दोनों देशों के बीच समझौता है और संयुक्त समिति भी काम कर रही है। सितंबर पिछले साल इसकी सातवीं बैठक हुई थी। दोनों देशों के संयुक्त प्रोजेक्ट हरित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा नीति जैसे क्षेत्रों में चल रहे हैं। अगले दिन स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति भारत-स्विस शोध कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में हिस्सा लेंगे। स्विट्जरलैंड जून 2027 में जिनेवा में एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। भारत ने इस सम्मेलन के सफल आयोजन में सहयोग देने की तैयारी जताई है। दोनों देशों का ध्यान एआई अनुसंधान, एआई के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल तथा नई तकनीकों से जुड़े कौशल विकास पर है।
रक्षा और दूसरे क्षेत्रों में भारत-स्विट्जरलैंड की साझेदारी कितनी बड़ी है?
भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं हैं। दोनों नेताओं ने बुनियादी ढांचे, विज्ञान, तकनीक एवं नवाचार, दवा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल, लोगों की आवाजाही, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, जलवायु और पर्यावरण तथा सांस्कृतिक संबंधों में सहयोग जारी रखने पर जोर दिया। उन्नत विनिर्माण, सटीक इंजीनियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने पर चर्चा हुई। आयुर्वेद और योग की स्विट्जरलैंड में लोकप्रियता का भी उल्लेख किया गया। रक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बात हुई। सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध लंबे समय से दोस्ताना हैं। स्विस राष्ट्रपति की यह यात्रा करीब एक दशक में किसी स्विस राष्ट्रपति की पहली द्विपक्षीय भारत यात्रा है। इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का मौका मिला है।