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Prime Minister’s Office of India

03/18/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/18/2026 03:38

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्यों को संबोधित किया

प्रधानमंत्री कार्यालय

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्यों को संबोधित किया


राजनीति में कोई विराम नहीं होता; आपका अनुभव और योगदान राष्ट्र के जीवन का अभिन्न अंग बना रहेगा: प्रधानमंत्री

समाज द्वारा दी गई जिम्मेदारियों के प्रति पूर्णतः समर्पित रहने के बारे में इन वरिष्ठ नेताओं से बहुत कुछ सीखने को मिलता है: प्रधानमंत्री***

यहां की विरासत एक सतत प्रक्रिया है जो हमारी संसदीय प्रणाली को समृद्ध बनाती है: प्रधानमंत्री

संसदीय प्रणाली को द्वितीय मत की अवधारणा से असीम शक्ति प्राप्त होती है; यह द्वितीय मत हमारे लोकतंत्र में एक विशाल योगदान है जिसे हमें निश्चित ही संजो कर रखना चाहिए: प्रधानमंत्री

यहां व्‍यतीत छह वर्ष राष्ट्र के प्रति अपने योगदान को आकार देने और आत्म-विकास के लिए अमूल्य हैं: प्रधानमंत्री

सेवानिवृत्त सदस्यों का राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान निरंतर महसूस किया जाता रहेगा, चाहे वे औपचारिक प्रणाली के भीतर से या स्वतंत्र सामाजिक कार्य के माध्यम से सेवा कर रहे हों: प्रधानमंत्री

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 1:13PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्यों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त साथियों को सम्मानित करने का अवसर मिलने पर हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अवसर सदन को दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक साझा भावना का संचार करने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि चाहे सदस्य वापस लौटें या व्यापक सामाजिक सेवा में लग जाएं, उनका संचित अनुभव राष्ट्र के लिए अमूल्य संपत्ति बना रहेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति के गतिशील क्षेत्र में यात्रा कभी समाप्त नहीं होती, क्योंकि भविष्य में अनुभवी नेताओं के लिए हमेशा नए अवसर विद्यमान रहते हैं। श्री मोदी ने बल देकर कहा, "राजनीति में कोई विराम नहीं होता; आपका अनुभव और योगदान राष्ट्र के जीवन का सदा हिस्सा रहेगा।"

प्रधानमंत्री ने निवर्तमान सांसदों के उत्कृष्ट योगदानों पर प्रकाश डालते हुए सुझाव दिया कि सांसदों की नई पीढ़ी को श्री देवगौड़ा, श्री खड़गे और श्री शरद पवार जैसे वरिष्‍ठ नेताओं को अपना आदर्श मानना ​​चाहिए। उन्होंने उपसभापति हरिवंश जी के मृदुभाषी स्वभाव और जटिल संकटों को संभालते हुए सदन का विश्वास बनाए रखने की क्षमता की प्रशंसा की। श्री मोदी ने कहा कि ऐसी समर्पित सेवा समाज द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा, "समाज द्वारा दी गई जिम्मेदारियों के प्रति पूर्णतः समर्पित रहने के बारे में इन वरिष्ठ नेताओं से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।"

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सदन की बदलती परंपराओं पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि चौबीसों घंटे चलने वाले मीडिया के माहौल ने भले ही सबको अधिक जागरूक बना दिया हो, लेकिन हास्य और बुद्धिमत्ता की विरासत संसदीय जीवन का एक अभिन्न अंग बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्‍येक दो वर्ष में एक समूह के जाने से ज्ञान का निरंतर आदान-प्रदान होता रहता है, जिससे सदन की समृद्ध विरासत आने वाले सदस्यों द्वारा संरक्षित रहती है। श्री मोदी ने कहा कि यह संस्थागत निरंतरता एक महत्वपूर्ण लाभ है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ करती है। प्रधानमंत्री ने कहा, "यहां की विरासत एक सतत प्रक्रिया है जो हमारी संसदीय प्रणाली को समृद्ध बनाती है।"

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राज्यसभा के अनूठे संस्थागत महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संसदीय प्रणाली को "द्वितीय मत" की अवधारणा से असीम शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों के बीच निर्णयों का आदान-प्रदान विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण नया आयाम जोड़ता है, जिससे देश के लिए अधिक परिष्कृत परिणाम सुनिश्चित होते हैं। उनके अनुसार, यह लोकतांत्रिक विरासत राष्ट्रीय निर्णय लेने में पारदर्शिता और पूर्णता की भावना को बढ़ावा देती है। श्री मोदी ने कहा, "यह द्वितीय मत हमारे लोकतंत्र में एक विशाल योगदान है जिसे हमें संजो कर रखना चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने बताया कि सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को यह विशिष्ट गौरव प्राप्त है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पुराने और नए दोनों संसद भवनों में सेवा की है। उन्होंने कहा कि नए सदन में ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनना उनके सार्वजनिक सेवा करियर में एक नया और महत्वपूर्ण स्मृति के रूप में रहेगा। श्री मोदी ने सदन को एक "महान खुला विश्वविद्यालय" बताया जो सदस्यों को राष्ट्रीय जीवन की जटिलताओं की अनूठी शिक्षा प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, "यहां व्‍यतीत छह वर्ष राष्ट्र के प्रति योगदान और आत्म-विकास के लिए अमूल्य हैं।"

अपने संबोधन के समापन में, श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि संसदीय अनुभव के वर्षों के दौरान सदस्यों की दूरदृष्टि और क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनका अमूल्य योगदान औपचारिक व्यवस्था के भीतर या स्वतंत्र सामाजिक कार्य के माध्यम से निरंतर महसूस किया जाता रहेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक बार फिर सेवानिवृत्त हो रहे प्रतिनिधियों की लंबी और समर्पित सेवा की सराहना करते हुए उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया। श्री मोदी ने कहा, "मैं एक बार फिर सभी सेवानिवृत्त सदस्यों के योगदान को नमन करता हूं और उनकी सराहना करता हूं।"

Speaking in the Rajya Sabha. https://t.co/TV2X34E4D1

- Narendra Modi (@narendramodi) March 18, 2026

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पीके/केसी/एसकेजे/एमपी


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