Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

08/05/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/05/2026 06:19

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नीति और कानूनी ढांचे की समीक्षा करते हुए वैश्विक घटनाक्रमों पर सरकार की नज़र

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नीति और कानूनी ढांचे की समीक्षा करते हुए वैश्विक घटनाक्रमों पर सरकार की नज़र

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम,सूचना प्रौद्योगिकी नियम और डीपीडीपी एक्ट डिजिटल वेल-बीइंग, यूज़र की सुरक्षा और ऑनलाइन बच्चों की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए ढांचा प्रदान करते हैं

प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 4:41PM by PIB Delhi

यद्यपि डिजिटल टेक्नोलॉजी ने शिक्षा, संचार और नवाचार तक पहुंच को काफी बढ़ाया है, लेकिन सरकार बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े जोखिमों के बारे में भी जागरूक है, जिनमें हानिकारक कंटेंट, साइबरबुलिंग, ऑनलाइन शोषण और डिजिटल लत शामिल हैं।

सरकार ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों और बदलते अंतरराष्ट्रीय नियामक तरीकों के बारे में जानकारी रखती है। इनमें डिजिटल माहौल में बच्चों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग देशों द्वारा अपनाए गए उपाय भी शामिल हैं। घरेलू नीति और कानूनी ढांचे को बनाते या समीक्षा करते समय ऐसे घटनाक्रमों की समय-समय पर जांच की जाती है। इसमें भारत के संवैधानिक ढांचे, कानूनी ज़रूरतों, टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और यूज़र की सुरक्षा, नवाचार, निजता और डिजिटल समावेश के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत को ध्यान में रखा जाता है।

सभी यूज़र्स के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद के लिए, सरकार डिजिटल इकोसिस्टम को नियंत्रित करने वाले कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे से जुड़े मामलों में सलाह-मशविरे का तरीका अपनाती है। इसके साथ ही, प्रौद्योगिकी के विकास और जनहित को ध्यान में रखते हुए साइबरस्पेस में उभरते मुद्दों से जुड़े कानूनी, नीति और संस्थागत ढांचे की जांच के लिए संबंधित पक्षों के साथ नियमित रूप से बातचीत करती है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ("आईटी एक्ट") और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थों के लिए दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ("आईटी नियम") ने मिलकर डिजिटल वेल-बीइंग, यूज़र की सुरक्षा और ज़िम्मेदार डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ढांचा तैयार किया है।

आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों के लिए ज़रूरी है कि वे अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाते समय पूरी सावधानी बरतें। उन्हें कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करने वालों को यह बताना होगा कि वे ऐसी कोई जानकारी होस्ट, डिस्प्ले, अपलोड, मॉडिफ़ाई, पब्लिश, ट्रांसमिट, अपडेट या शेयर करें जो बच्चों के लिए नुकसानदेह हो या जो उस समय लागू किसी कानून का उल्लंघन करती हो।

अगर उल्लंघन में ऐसा कोई अपराध शामिल है जो मौजूदा कानून (जैसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 के साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, या बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012) के तहत आता है और जिसकी रिपोर्टिंग ज़रूरी है, तो मध्यस्थों को लागू कानून के प्रावधानों के अनुसार संबंधित प्राधिकार को ऐसे अपराध की रिपोर्ट करनी होगी।

आईटी नियमों में हाल के बदलावों के अंतर्गत सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और अन्य मध्यस्थों के लिए ज़रूरी है कि वे सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के आदेश या उचित सरकार या उसकी एजेंसी से मिली ठोस जानकारी मिलने के तीन घंटे के भीतर गैर-कानूनी कंटेंट को हटा दें।

इसके अलावा, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 ("डीपीडीपी एक्ट") लागू किया गया है, जो डिजिटल पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग को रेगुलेट करने के लिए कानूनी ढांचा बनाता है। डीपीडीपी एक्ट ऑनलाइन बच्चों की निजता की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह बच्चों के पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग के लिए माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बनाता है और बच्चों की भलाई के लिए नुकसानदेह तरीकों, जैसे ट्रैकिंग, व्यवहार की निगरानी या बच्चों को टारगेट करके विज्ञापन दिखाने पर रोक लगाता है।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ' सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (आईएसईए)' पर एक परियोजना लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करना और आम लोगों के बीच साइबर हाइजीन और साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है। अब तक देश भर में 6,650 जागरूकता कार्यशाला आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें 11.37 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हुए हैं। इनमें स्कूल/कॉलेज के विद्यार्थी, शिक्षक, कानून लागू करने वाली एजेंसियां, सरकारी कर्मचारी और आम जनता शामिल हैं।

इसके अलावा, कई भाषाओं में जागरूकता सामग्री (जैसे हैंडबुक, छोटे वीडियो, पोस्टर, ब्रोशर, बच्चों के लिए कार्टून कहानियाँ आदि) प्रकाशित और वितरित की गई हैं। इन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया और www.isea.gov.in https://staysafeonline.in/ के ज़रिए लोगों तक पहुँचाया गया है।

इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) अपनी आधिकारिक वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल पर नियमित रूप से सुरक्षा से जुड़े टिप्स, जागरूकता पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स और वीडियो शेयर करती है। इसका उद्देश्य इंटरनेट यूज़र्स को साइबर सुरक्षा हमलों और धोखाधड़ी के बारे में जागरूक करना है, जिसमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के उपाय भी शामिल हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2020 में डिजिटल शिक्षा पर 'प्रज्ञता' (PRAGYATA) दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश सुरक्षित और प्रभावी ऑनलाइन लर्निंग के लिए रूपरेखा प्रदान करते हैं, जिसमें विद्यार्थियों की भलाई को बढ़ावा देना और सोशल मीडिया इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना शामिल है। सीबीएसई ने इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए डिजिटल शिष्टाचार, शिक्षकों के लिए साइबर-सुरक्षा प्रशिक्षण, 'साइबर सुरक्षा हैंडबुक' के प्रकाशन और साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों को साइबर क्लब स्थापित करने की सलाह जैसे कदम उठाए हैं। एनसीईआरटी ने भी अपने पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को शामिल किया है, जिसमें कक्षा 11 और 12 के लिए "सामाजिक प्रभाव" पर एक अध्याय शामिल है। साथ ही, सीआईईटी- एनसीईआरटी ने साइबर सुरक्षा पर संसाधन सामग्री विकसित और वितरित की है।

यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 05.08.2026 को लोकसभा में दी।

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पीके/केसी/पीके


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