असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार के संकेत के बावजूद संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है, जबकि सात जिलों में अब भी तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। कई इलाकों में पानी उतरने के बाद घरों में जमा गाद, टूटी सड़कें और बर्बाद सामान लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ से
शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिश्वनाथ और कामरूप महानगर जिले प्रभावित हैं। कुल 551 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि 21,523
हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है।
इधर, केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल ने असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा पूरा कर गुरुवार को मुख्य सचिव रवि कोटा के साथ समीक्षा बैठक की। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु के नेतृत्व वाले छह सदस्यीय दल ने चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में पहुंचकर नुकसान का आकलन किया। बैठक में राज्य सरकार ने बताया कि इस बार की बाढ़ सामान्य नहीं थी।
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नागालैंड के मोकोकचुंग, वोखा और मोन जिलों में 19 जुलाई को हुई अत्यधिक बारिश तथा ऊपरी असम में स्थानीय भारी वर्षा के कारण कई ऐसे क्षेत्रों में
भी तबाही हुई, जो पहले बड़े बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नहीं माने जाते थे।
सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर जिले में पानी उतरने के बाद भी तबाही के निशान बने हुए हैं। नेपालीखुटी जैसे गांवों में गाद हटाने के दौरान शव मिलने से लोगों में दहशत है। कई परिवार अभी भी अपने घरों में लौटने की स्थिति में नहीं हैं। बिजली व्यवस्था भी प्रभावित है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करीब 12,756 घरों में अब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। राज्य सरकार ने राहत और पुनर्वास के लिए केंद्र से सहायता मानकों में ढील देने की मांग की है।
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केंद्रीय दल ने आश्वासन दिया है कि वह अपने निरीक्षण और सुझावों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। राज्य सरकार बाढ़ का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर केंद्र को भेजेगी।