03/05/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/05/2026 09:17
जनजातीय समुदायों के समग्र और व्यापक विकास के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, पशुपालन और दुधारू विभाग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और मत्स्य विभाग के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ एक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रमुख मिशन, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान(डी ए जे जी यू ए) के अंतर्गत आजीविका संबंधी पहलों के कार्यान्वयन ढांचे को सुदृढ़ करना था। यह पहल माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुअल ओराम के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाई जा रही है। यह जनजातीय क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने और समावेशी विकास को गति देने के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व में भारत का जनजातीय विकास परिदृश्य अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह जनजातीय समुदायों के लिए कुछ सबसे महत्वाकांक्षी और परिणामोन्मुखी कार्यक्रमों का आधार है।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय विकास में एक महत्वपूर्ण प्रतिमान बदलाव का प्रतीक है। यह खंडित वितरण तंत्रों से हटकर एक व्यापक, समुदाय-नेतृत्व वाले और सशक्तिकरण-संचालित शासन मॉडल की ओर अग्रसर है।2 अक्टूबर2024 को झारखंड के हजारीबाग से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू की गई यह अग्रणी पहल17 मंत्रालयों और25 हस्तक्षेपों के प्रयासों को63,843 आदिवासी बहुल गांवों में एकीकृत करती है। इससे लगभग5.5 करोड़ आदिवासी नागरिकों को सशक्त बनाया जा रहा है ।
परामर्श कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य परिचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका नियोजन के एक संरचित, प्रतिलिपि योग्य और परिणामोन्मुखी मॉडल की ओर अग्रसर होना था। चर्चा का केंद्र मानकीकृत, आर्थिक रूप से व्यवहार्य अभ्यास पैकेज विकसित करने पर था। यह पात्रता मानदंडों, इकाई लागत, कार्यान्वयन चरण, अभिसरण मार्गों और अनुमानित आय वृद्धि को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हों। मंत्रालयों ने एकीकृत कृषि मॉडल, छोटे पशुधन आधारित आजीविका, मत्स्य विकास और नवीकरणीय ऊर्जा समर्थित सूक्ष्म उद्यमों पर विचार-विमर्श किया। इसमें संस्थागत समर्थन द्वारा समर्थित समग्र आजीविका इको सिस्टम की ओर अलग-थलग परिसंपत्ति वितरण से बदलाव पर बल दिया गया।
मंत्रालय ने राज्यों को सुसंगत और सुव्यवस्थित योजना बनाने और दोहराव से बचने में सक्षम बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में योजना संसाधनों के समन्वय के महत्व पर बल दिया। कार्यशाला से प्राप्त सुझाव धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए एक एकीकृत निगरानी और मूल्यांकन ढांचा विकसित करने में सहायक होंगे।
चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि हस्तक्षेप मॉडल न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने चाहिए, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों के पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक संदर्भों के अनुरूप भी होने चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि इन क्षेत्रों में आजीविका संबंधी गतिविधियों को अक्सर कम उत्पादकता, सीमित विस्तार सहायता और अपर्याप्त बाज़ार एकीकरण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए कार्यशाला में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और मूल्यवर्धन को शामिल करते हुए एकीकृत आजीविका संरचनाओं पर बल दिया गया। इसका उद्देश्य जनजातीय परिवारों के लिए आय स्थिरता बढ़ाना और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना था।
कार्यशाला में जनजातीय कार्य सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने कहा, आज की चर्चा सतत जनजातीय आजीविका के लिए विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कई मंत्रालयों को एक साथ लाकर, हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि जनजातीय परिवारों को खंडित हस्तक्षेपों के बजाय सुसंगत, सुव्यवस्थित और व्यापक सहायता प्राप्त हो।
उन्होंने आगे कहा, हमारा मानना है कि जनजातीय कार्य और कृषि से संबंधित मंत्रालयों के बीच मजबूत समन्वय को संयुक्त परामर्शों के माध्यम से संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए, ताकि राज्यों को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अन्तर्गत आजीविका संबंधी हस्तक्षेपों को लागू करने के लिए स्पष्ट परिचालन मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। साथ ही, राज्यों को अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए कम से कम20 नवीन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रस्तावों की पहचान करनी चाहिए। यह एफआरए भूमि, मत्स्य संसाधन, पशुधन प्रणाली और पारंपरिक कृषि-पारिस्थितिकी को स्थायी आय सृजन से जोड़ते हों।
मंत्रालय ने कहा कि अभिसरण-आधारित दृष्टिकोण से आय सृजन और आजीविका सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा, विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में जहां कमजोरियां अभी भी बनी हुई हैं। कार्यशाला के परिणाम राज्यों को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ढांचे के अन्तर्गत एकसमान लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल मॉडल अपनाने में मार्गदर्शन करेंगे।
जनजातीय आजीविका के लिए निरंतर समर्थन सुनिश्चित करने हेतु प्रमुख विभागों, विशेष रूप से कृषि और मत्स्य पालन विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने जनजातीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक स्थिरता और स्थिर, विश्वसनीय आय स्रोतों वाले स्थायी आजीविका समूहों के निर्माण हेतु एक एकीकृत दृष्टिकोण विकसित करने के महत्व पर बल दिया।
चर्चाओं के बाद भाग लेने वाले मंत्रालयों ने हस्तक्षेप योजनाओं को परिष्कृत करने और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय तंत्र को मजबूत करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। कार्यशाला के परिणामों के आधार पर राज्यों को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इससे वे क्षेत्रीय योजनाओं को अधिक कुशलता से एकीकृत करने वाली वार्षिक कार्य योजनाएँ तैयार कर सकेंगे। मंत्रालय ने यह भी कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अन्तर्गत अपनाई गई संरचित पद्धति से जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय, निधि प्रवाह की बेहतर पूर्वानुमान क्षमता और जनजातीय परिवारों के बीच आय संबंधी परिणामों की अधिक सुदृढ़ निगरानी में सहायता मिलेगी।
मंत्रालय ने इस बात पर भी बल दिया कि ये अभिसरण-संचालित आजीविका ढाँचे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। यह समावेशी विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखता है।
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