05/08/2026 | Press release | Distributed by Public on 05/08/2026 05:32
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह 10 मई, 2026, रविवार, को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें देश में संभावित बाढ़ और Heat Wave से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन के प्रति अपनाए गए सक्रिय और निर्णायक Whole of the Government और Whole of Society दृष्टिकोण की दिशा में यह बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, गृह मंत्रालय ने हाल के वर्षों में देश में आपदा प्रबंधन ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, NDRF को सुदृढ़ बनाना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान शून्य जनहानि के दृष्टिकोण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।
यह उच्च-स्तरीय समीक्षा मोदी सरकार की प्रोएक्टिव गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित आपदा प्रबंधन और एक आपदा-रोधी भारत के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बैठक के दौरान, गृह मंत्री केंद्र सरकार की एजेंसियों की तैयारियों का आकलन करेंगे; साथ ही, किसी भी प्रकार की जनहानि न हो और संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, संसाधनों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा करेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह पूरे देश में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए किए जा रहे दीर्घकालिक उपायों की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। इन उपायों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा, नदी प्रबंधन की पहल और मौसम के पूर्वानुमान में वैज्ञानिक प्रगति शामिल हैं। इसके साथ ही, केन्द्रीय गृह मंत्री पिछले वर्ष आयोजित की गई समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की भी जानकारी लेंगे, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और विभिन्न गतिविधियों का त्वरित एवं समन्वित निष्पादन हो सके।
इस उच्च-स्तरीय बैठक के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
• उन्नत प्रौद्योगिकी और 'real-time' डेटा एकीकरण के माध्यम से बाढ़ के पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना।
• एक साथ आने वाली आपदाओं, विशेष रूप से बाढ़ और Heat Wave जैसी चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को बढ़ाना।
• जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता और resilience-building कार्यक्रम चलाना।
• आवश्यक राहत सामग्री का पर्याप्त भंडार और चिकित्सा संबंधी तैयारियों को सुनिश्चित करना।
*****
आरके / आरआर / पीआर