02/04/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/04/2026 09:10
परमाणु ऊर्जा स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल, चौबीसों घंटे उपलब्ध बिजली का एक आधारभूत स्रोत है, साथ ही देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देने की अपार क्षमता रखती है। परमाणु ऊर्जा के विस्तार से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने और2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए2047 तक100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल करने के उद्देश्य से केंद्रीय बजट2025-26 में उल्लिखित परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की है।
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सतत तरीके से सुनिश्चित करने के लिए एक स्वदेशी त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की परिकल्पना की गई है। परमाणु ऊर्जा के पूरे जीवनचक्र के दौरान होने वाला उत्सर्जन, जलविद्युत और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के उत्सर्जन के तुलनीय है।
2013-14 से स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता4,780 मेगावाट से बढ़कर वर्तमान में8,780 मेगावाट हो गई है(आरएपीएस-1 को छोड़कर- 100 मेगावाट)। कुल13,600 मेगावाट क्षमता(पीएफबीआर सहित) वर्तमान में कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में है और इसके2031-32 तक धीरे-धीरे पूरा होने की उम्मीद है।
2047 तक100 गीगावाट की क्षमता हासिल करने के परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत, स्वदेशी700 मेगावाट क्षमता वाले10-10 रिएक्टरों के दो नए बेड़े और500 मेगावाट क्षमता वाले दो(02) ईंधन-संचालन संयंत्रों की परिकल्पना की गई है। सभी ईंधन-संचालन संयंत्र और पीएचडब्ल्यूआर बेड़े का एक हिस्सा स्वदेशी ईंधन का उपयोग करेगा।
इसके अतिरिक्त, बीएआरसी ने ऊर्जा-गहन क्षेत्रों के लिए कैप्टिव पावर प्लांट के रूप में उपयोग के लिए उपयुक्त एसएमआर(स्मॉल-मीटर) के डिजाइन, विकास और स्थापना का कार्य भी किया है। परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत, 2033 तक स्वदेशी एसएमआर के अनुसंधान एवं विकास के लिए भी धनराशि आवंटित की गई है।
परमाणु ऊर्जा विभाग और विद्युत मंत्रालय ने2047 तक लगभग100 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन का एक रोडमैप तैयार किया है। फिलहाल, हरियाणा के सोनीपत लोकसभा क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, हरियाणा के गोरखपुर में700 मेगावाट की दो इकाइयां(जीएचएवीपी-1 और2) निर्माणाधीन हैं और700 मेगावाट की दो अन्य इकाइयां(जीएचएवीपी-3 और4) विभिन्न चरणों में कार्यान्वयन के अधीन हैं।
यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
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